झारखंड के साधारण परिवारों के युवाओं ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में हासिल की अद्वितीय सफलता

Click to start listening
झारखंड के साधारण परिवारों के युवाओं ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में हासिल की अद्वितीय सफलता

सारांश

झारखंड के युवाओं की प्रेरणादायक कहानियाँ, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। जानें उनके संघर्ष और मेहनत के बारे में।

Key Takeaways

  • सपने बड़े रखें, भले ही संसाधन सीमित हों।
  • स्वयं के अध्ययन से भी सफलता संभव है।
  • कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

रांची, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। किसी के पिता एक दर्जी हैं, तो कोई डाकघर में क्लर्क है। सीमित संसाधनों, छोटे शहरों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद, उनके सपने बड़े हैं। ये प्रेरणादायक कहानियां झारखंड के उन युवाओं की हैं, जिन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में अद्वितीय सफलता प्राप्त की है।

दुमका जिले के कुमड़ाबाद की सुदीपा दत्ता ने ऑल इंडिया रैंक 41 प्राप्त की है। उनके पिता सच्चिदानंद दत्ता डाकघर में सहायक पोस्टमास्टर हैं और मां पंपा दत्ता एक गृहिणी हैं। सुदीपा ने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान के सहारे केवल सेल्फ-स्टडी के माध्यम से यह सफलता पाई।

वह नियमित रूप से दुमका के राजकीय पुस्तकालय में पढ़ाई करती थीं और ग्रुप डिस्कशन तथा मॉक टेस्ट के जरिए अपनी तैयारी मजबूत करती रहीं। यह सफलता उन्हें तीसरे प्रयास में मिली। इससे पहले उन्हें झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीडीपीओ पद के लिए भी चयनित किया गया था।

साहिबगंज जिले के कुलीपाड़ा की निहारिका सिन्हा ने अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 365 प्राप्त की है। निहारिका एक बेहद साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता निरंजन सिन्हा पेशे से दर्जी हैं, और मां शबनम कुमारी स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध पर नर्स हैं।

सीमित संसाधनों के बावजूद, निहारिका ने अपने लक्ष्यों से समझौता नहीं किया। उन्होंने 2018 में सेंट जेवियर स्कूल, साहिबगंज से दसवीं और 2020 में जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली, रांची से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद, निहारिका ने सेंट जेवियर कॉलेज, कोलकाता से 2023 में राजनीति शास्त्र में स्नातक किया और फिर यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं। पहले प्रयास में उन्हें मेंस परीक्षा में सफलता नहीं मिली, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल कर लिया।

बोकारो की अपूर्वा वर्मा ने भी इस परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 42 प्राप्त की है। अपूर्वा वर्तमान में दिल्ली पुलिस में सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के पद पर कार्यरत हैं। व्यस्त सरकारी सेवा के साथ-साथ उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी जारी रखी और अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प के साथ यह उपलब्धि हासिल की।

इसके अलावा, लातेहार के विपुल गुप्ता ने ऑल इंडिया रैंक 103 प्राप्त की है, जबकि रांची के डोरंडा स्थित फिरदौस नगर निवासी इस्तियाक ने ऑल इंडिया रैंक 354 और धनबाद की श्रुति मोदी ने 569वीं रैंक प्राप्त कर अंतिम सूची में स्थान बनाया है।

Point of View

जिन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता पाई। यह दर्शाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद कैसे सपनों को साकार किया जा सकता है।
NationPress
06/03/2026

Frequently Asked Questions

सिविल सेवा परीक्षा में सफलता कैसे प्राप्त की जा सकती है?
सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के लिए नियमित अध्ययन, मॉक टेस्ट और ग्रुप डिस्कशन मददगार होते हैं।
क्या बिना कोचिंग के सिविल सेवा परीक्षा पास किया जा सकता है?
हाँ, कई छात्रों ने सेल्फ-स्टडी के माध्यम से भी सफलता हासिल की है।
Nation Press