जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ एफआईआर: पेथापुर थाने में हंगामे और पुलिस कार्य में बाधा का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी और सात अन्य लोगों के खिलाफ गुजरात पुलिस ने पेथापुर पुलिस स्टेशन में हंगामा करने, एक पुलिस इंस्पेक्टर के कार्य में बाधा डालने और समुदायों के बीच तनाव भड़काने की कोशिश के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। यह मामला गांधीनगर नगर निगम (GMC) चुनाव के मतदान से एक दिन पहले, 8 अक्टूबर 2026 की रात हुई कथित घटना से जुड़ा है।
मुख्य घटनाक्रम
8 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे पेथापुर के संजारी पार्क में वार्ड 4 से कांग्रेस उम्मीदवार यूनुस परमार और उनके साथियों ने कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रचारक भावेश भावसार को उस इलाके में प्रचार न करने की चेतावनी दी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
इस शिकायत के बाद परमार को पेथापुर पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए बुलाया गया। पुलिस इंस्पेक्टर ए.एम. देसाई की शिकायत के अनुसार, जब वे परमार से पूछताछ कर रहे थे, तभी मेवाणी और अन्य आरोपी पुलिस स्टेशन के पूछताछ कमरे में घुस गए, गैर-कानूनी भीड़ बनाई और जबरदस्ती परमार का बयान दर्ज होने से रोक दिया।
पुलिस के आरोप
इंस्पेक्टर देसाई की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, थाने में हंगामा किया और एक सरकारी कर्मचारी को उसकी ड्यूटी से रोका। बाद में मेवाणी और अन्य आरोपी अपने समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन के बाहर बैठ गए और ठाकोर समुदाय का नाम लेकर नारे लगाए।
एफआईआर में यह भी आरोप है कि आरोपियों ने पूरी घटना को मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया और समुदायों के बीच दुश्मनी भड़काने के इरादे से वह फुटेज सोशल मीडिया पर शेयर की।
कानूनी धाराएँ
मेवाणी और सात अन्य आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2) और 191(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा धारा 221, 351(2) और 352 — जो सरकारी कर्मचारी को कार्य में बाधा डालने, आपराधिक धमकी और शांति भंग के इरादे से अपमान करने से संबंधित हैं — भी लगाई गई हैं। गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 भी लागू की गई है।
पेथापुर पुलिस स्टेशन के अधिकारी के अनुसार, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
राजनीतिक संदर्भ
यह एफआईआर ऐसे समय में दर्ज की गई जब रविवार, 12 अक्टूबर को गांधीनगर नगर निगम के 11 वार्डों में मतदान हो रहा था। गौरतलब है कि जिग्नेश मेवाणी गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के एक प्रमुख चेहरा हैं और यह उनके खिलाफ दर्ज होने वाले कई विवादास्पद मामलों में से एक है।
एफआईआर में यह भी आरोप है कि आरोपियों की हरकतों ने गांधीनगर के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी अधिसूचना का उल्लंघन किया।
आगे क्या होगा
पुलिस ने संकेत दिया है कि जाँच जारी है और आवश्यकतानुसार कार्रवाई की जाएगी। विपक्ष इसे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बता सकता है, जबकि पुलिस का दावा है कि यह पूरी तरह तथ्यों पर आधारित शिकायत के आधार पर दर्ज मामला है। मेवाणी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।