12 अक्टूबर 2026
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जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ एफआईआर: पेथापुर थाने में हंगामे और पुलिस कार्य में बाधा का आरोप

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जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ एफआईआर: पेथापुर थाने में हंगामे और पुलिस कार्य में बाधा का आरोप

सारांश

गांधीनगर नगर निगम चुनाव के दिन कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी और 7 अन्य के खिलाफ पेथापुर थाने में हंगामे, पुलिस पूछताछ में बाधा और ठाकोर समुदाय के नाम पर नारेबाजी के आरोप में एफआईआर दर्ज। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं।

मुख्य बातें

कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी और 7 अन्य के खिलाफ पेथापुर पुलिस स्टेशन में हंगामे और पुलिस कार्य में बाधा के आरोप में एफआईआर दर्ज।
घटना 8 अक्टूबर 2026 की रात की है; FIR रात को तब दर्ज की गई जब 12 अक्टूबर को GMC के 11 वार्डों में मतदान हो रहा था।
BJP प्रचारक भावेश भावसार को कथित तौर पर धमकी देने के आरोपी कांग्रेस उम्मीदवार यूनुस परमार की पूछताछ के दौरान यह घटना हुई।
आरोपियों पर BNS धारा 189(2), 191(2), 221, 351(2), 352 और गुजरात पुलिस अधिनियम धारा 135 लागू।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर की और ठाकोर समुदाय का नाम लेकर नारे लगाए।
अभी तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं ; जाँच जारी है।

कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी और सात अन्य लोगों के खिलाफ गुजरात पुलिस ने पेथापुर पुलिस स्टेशन में हंगामा करने, एक पुलिस इंस्पेक्टर के कार्य में बाधा डालने और समुदायों के बीच तनाव भड़काने की कोशिश के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। यह मामला गांधीनगर नगर निगम (GMC) चुनाव के मतदान से एक दिन पहले, 8 अक्टूबर 2026 की रात हुई कथित घटना से जुड़ा है।

मुख्य घटनाक्रम

8 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे पेथापुर के संजारी पार्क में वार्ड 4 से कांग्रेस उम्मीदवार यूनुस परमार और उनके साथियों ने कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रचारक भावेश भावसार को उस इलाके में प्रचार न करने की चेतावनी दी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

इस शिकायत के बाद परमार को पेथापुर पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए बुलाया गया। पुलिस इंस्पेक्टर ए.एम. देसाई की शिकायत के अनुसार, जब वे परमार से पूछताछ कर रहे थे, तभी मेवाणी और अन्य आरोपी पुलिस स्टेशन के पूछताछ कमरे में घुस गए, गैर-कानूनी भीड़ बनाई और जबरदस्ती परमार का बयान दर्ज होने से रोक दिया।

पुलिस के आरोप

इंस्पेक्टर देसाई की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, थाने में हंगामा किया और एक सरकारी कर्मचारी को उसकी ड्यूटी से रोका। बाद में मेवाणी और अन्य आरोपी अपने समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन के बाहर बैठ गए और ठाकोर समुदाय का नाम लेकर नारे लगाए।

एफआईआर में यह भी आरोप है कि आरोपियों ने पूरी घटना को मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया और समुदायों के बीच दुश्मनी भड़काने के इरादे से वह फुटेज सोशल मीडिया पर शेयर की।

कानूनी धाराएँ

मेवाणी और सात अन्य आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2) और 191(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा धारा 221, 351(2) और 352 — जो सरकारी कर्मचारी को कार्य में बाधा डालने, आपराधिक धमकी और शांति भंग के इरादे से अपमान करने से संबंधित हैं — भी लगाई गई हैं। गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 भी लागू की गई है।

पेथापुर पुलिस स्टेशन के अधिकारी के अनुसार, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

राजनीतिक संदर्भ

यह एफआईआर ऐसे समय में दर्ज की गई जब रविवार, 12 अक्टूबर को गांधीनगर नगर निगम के 11 वार्डों में मतदान हो रहा था। गौरतलब है कि जिग्नेश मेवाणी गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के एक प्रमुख चेहरा हैं और यह उनके खिलाफ दर्ज होने वाले कई विवादास्पद मामलों में से एक है।

एफआईआर में यह भी आरोप है कि आरोपियों की हरकतों ने गांधीनगर के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी अधिसूचना का उल्लंघन किया।

आगे क्या होगा

पुलिस ने संकेत दिया है कि जाँच जारी है और आवश्यकतानुसार कार्रवाई की जाएगी। विपक्ष इसे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बता सकता है, जबकि पुलिस का दावा है कि यह पूरी तरह तथ्यों पर आधारित शिकायत के आधार पर दर्ज मामला है। मेवाणी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे स्वाभाविक रूप से विवादास्पद बनाती है — विपक्ष इसे दबाने की कोशिश कहेगा, पुलिस इसे प्रक्रियागत शिकायत। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या किसी विधायक का चुनाव के दौरान थाने में पहुँचकर पूछताछ रोकना लोकतांत्रिक हस्तक्षेप है या कानूनी प्रक्रिया की अवमानना। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करने और सामुदायिक नारेबाजी के आरोप इस मामले को साधारण कानून-व्यवस्था से आगे ले जाते हैं। मेवाणी के पिछले रिकॉर्ड और गुजरात में विपक्ष-पुलिस टकराव के इतिहास को देखते हुए, इस मामले की निष्पक्ष जाँच ही इसकी विश्वसनीयता तय करेगी।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की गई है?
कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी पर पेथापुर पुलिस स्टेशन में हंगामा करने, पुलिस इंस्पेक्टर ए.एम. देसाई के कार्य में बाधा डालने और समुदायों के बीच तनाव भड़काने का आरोप है। यह घटना 8 अक्टूबर 2026 की रात की बताई जा रही है, जब पुलिस कांग्रेस उम्मीदवार यूनुस परमार से पूछताछ कर रही थी।
मेवाणी पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
मेवाणी और 7 अन्य पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2), 191(2), 221, 351(2) और 352 लगाई गई हैं। इसके साथ गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 भी लागू की गई है, जो सरकारी कर्मचारी को बाधा, आपराधिक धमकी और शांति भंग से जुड़ी हैं।
क्या जिग्नेश मेवाणी को गिरफ्तार किया गया है?
नहीं, पेथापुर पुलिस स्टेशन के अधिकारी के अनुसार अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। जाँच जारी है।
यह मामला गांधीनगर नगर निगम चुनाव से कैसे जुड़ा है?
यह घटना GMC चुनाव प्रचार के दौरान 8 अक्टूबर को हुई और FIR 12 अक्टूबर को मतदान के दिन दर्ज हुई। वार्ड 4 से कांग्रेस उम्मीदवार यूनुस परमार पर BJP प्रचारक को धमकी देने का आरोप था, जिसकी पुलिस पूछताछ के दौरान यह हंगामा हुआ बताया जा रहा है।
सोशल मीडिया वीडियो से जुड़ा आरोप क्या है?
एफआईआर के अनुसार आरोपियों ने थाने के अंदर की घटना को मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया और विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी भड़काने के इरादे से वह फुटेज सोशल मीडिया पर शेयर की। यह आरोप BNS की धारा 191(2) के अंतर्गत आता है।
राष्ट्र प्रेस
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