जीतू पटवारी के खिलाफ ग्वालियर कोर्ट का गिरफ्तारी वारंट, 27 जुलाई को पेशी का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी की कानूनी मुश्किलें 1 जुलाई 2026 को उस समय और गहरी हो गईं, जब ग्वालियर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए 27 जुलाई 2026 को अदालत में अनिवार्य उपस्थिति का निर्देश दिया। यह मामला 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक विवादास्पद बयान से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भिंड संसदीय क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के उम्मीदवार देवाशीष जरारिया के संदर्भ में कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने एक बयान दिया था। पटवारी ने कथित तौर पर आरोप लगाया था कि जरारिया का भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ सांठगांठ और लेनदेन है।
इस बयान के विरोध में BSP उम्मीदवार जरारिया ने ऊमरी थाने में शिकायत दर्ज कराई और पटवारी के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की सीडी भी पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंपी।
कोर्ट में क्या हुआ
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने 16 जनवरी 2026 को पटवारी को पेश होने का नोटिस जारी किया था, परंतु वे निर्धारित तिथि पर अदालत में उपस्थित नहीं हुए। पुलिस ने न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का पता नहीं चल पा रहा है।
इस पर न्यायालय ने कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि पटवारी सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं और उनके बयान सामने आ रहे हैं, तो पुलिस उन्हें तलाश करने में असमर्थ क्यों है। यह गौरतलब है कि किसी सक्रिय राजनेता के संदर्भ में पुलिस का ऐसा तर्क न्यायालय को स्वीकार्य नहीं हुआ।
कोर्ट का आदेश
विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने पटवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के साथ ही भिंड पुलिस अधीक्षक को स्पष्ट निर्देश दिया है कि 27 जुलाई 2026 को जीतू पटवारी की उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। यह आदेश पुलिस के लिए बाध्यकारी है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस संगठन को पुनर्गठित करने की कोशिशें जारी हैं और पटवारी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी की कमान संभाल रहे हैं। किसी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट का जारी होना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें 27 जुलाई 2026 पर टिकी हैं, जब भिंड पुलिस को पटवारी को अदालत के सामने पेश करना है। यदि वे उपस्थित नहीं होते हैं, तो न्यायालय आगे की कड़ी कार्रवाई कर सकता है।