राहुल गांधी पर उत्तराखंड पुलिस की एफआईआर को केपीसीसी प्रमुख हरिप्रसाद ने बताया 'गंभीर अन्याय', भाजपा पर लगाया राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने बुधवार, 2 सितंबर को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने इस कार्रवाई को 'गंभीर अन्याय' करार दिया और आरोप लगाया कि यह एफआईआर पूरी तरह 'राजनीतिक प्रेरणा' से दर्ज की गई है।
विरोध प्रदर्शन में हरिप्रसाद का बयान
बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में इस एफआईआर के विरोध में आयोजित प्रदर्शन को संबोधित करते हुए हरिप्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ने कोई अपराध नहीं किया, बल्कि उन्होंने केवल उस स्थान के कथित 'शुद्धिकरण' पर सवाल उठाया था, जहाँ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाषण दिया था। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी ने कोई गलती नहीं की है, फिर भी उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है — यह बहुत बड़ा अन्याय है।'
हरिप्रसाद के अनुसार, खड़गे के भाषण के बाद उस स्थल का 'शुद्धिकरण' किया गया था और ऐसी प्रथा पर सवाल उठाना किसी भी दृष्टिकोण से अपराध की श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने कहा, 'संविधान छुआछूत की इजाजत नहीं देता। किसी के भाषण देने के बाद उस जगह को शुद्ध करना संविधान का सीधा अपमान है।'
संवैधानिक पद पर हमला — हरिप्रसाद का तर्क
केपीसीसी अध्यक्ष ने इस घटना को केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संवैधानिक पद पर हमला बताया। उनके अनुसार, राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता के संवैधानिक पद पर आसीन हैं, और उनके खिलाफ इस तरह की एफआईआर दर्ज करना न केवल उनका, बल्कि खड़गे का भी अपमान है। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी के खिलाफ दलितों पर अत्याचार से जुड़ा मामला दर्ज करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है — जबकि असल में जो छुआछूत की प्रथा का पालन कर रहे हैं, उनके खिलाफ संविधान के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।'
भाजपा पर राजनीतिक निशानेबाजी का आरोप
हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जानबूझकर राहुल गांधी को निशाना बना रही है और उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि भाजपा ने तय कर लिया है कि राहुल गांधी की आवाज को किसी भी तरह से दबाया जाए।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद में केंद्र सरकार की आलोचना करने के बाद भी विपक्ष के नेता के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी पर कानूनी दबाव बनाने के आरोप लगे हों। हरिप्रसाद ने याद दिलाया कि इससे पहले एक अन्य मामले में राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी, जिसे बाद में न्यायालय ने बहाल किया था। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच संसदीय टकराव अपने चरम पर है।
संविधान और छुआछूत — व्यापक संदर्भ
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 छुआछूत को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है और इसे दंडनीय अपराध घोषित करता है। हरिप्रसाद ने इसी संदर्भ में तर्क दिया कि जो व्यक्ति इस प्रथा पर सवाल उठाए, उसके खिलाफ नहीं बल्कि इस प्रथा को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
आगे क्या होगा
कांग्रेस कथित तौर पर इस एफआईआर को चुनौती देने की कानूनी तैयारी में है। हरिप्रसाद ने स्पष्ट किया कि पार्टी राहुल गांधी के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और इस मामले को हर मंच पर उठाया जाएगा। उन्होंने कहा, 'भाजपा को संविधान में कोई भरोसा नहीं है — राहुल गांधी के खिलाफ यह मामला दर्ज करना एक गंभीर अपराध है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'