8 अक्टूबर 2026
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'जोश' अभियान लॉन्च: 11 राज्यों में 58,000 वॉलंटियर्स करेंगे टीबीमुक्त भारत की मुहिम

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'जोश' अभियान लॉन्च: 11 राज्यों में 58,000 वॉलंटियर्स करेंगे टीबीमुक्त भारत की मुहिम

सारांश

भारत मंडपम से लॉन्च हुआ 'जोश' अभियान टीबी के खिलाफ लड़ाई को सरकारी दफ्तरों से निकालकर गलियों तक ले जाने की कोशिश है। 11 राज्यों के 55 जिलों में 58,000 वॉलंटियर्स — एनसीसी कैडेट से लेकर जन प्रतिनिधि तक — मिलकर जांच, इलाज और कलंक-मुक्ति का संदेश देंगे।

मुख्य बातें

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 8 अक्टूबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में 'जोश' (Joint Squad for Health) अभियान लॉन्च किया।
पायलट चरण में 11 राज्यों के 55 जिलों में 58,000 वॉलंटियर्स टीबी जागरूकता, जांच और उपचार की दिशा में काम करेंगे।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के अनुसार भारत में टीबी मामलों में 21% की कमी और इलाज कवरेज 92% तक पहुँची।
अभियान में एनसीसी कैडेट्स , मॉय भारत वॉलंटियर्स , जन प्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हैं।
टीबी पहचान के लिए हैंडहेल्ड एक्स-रे , AI और NAT तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
स्वास्थ्य, युवा कार्यक्रम एवं खेल और रक्षा — तीनों मंत्रालयों के संयुक्त तत्वावधान में चलाया जाने वाला यह पहला साझा टीबी अभियान है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'जोश' (Joint Squad for Health) अभियान का शुभारंभ किया — एक सामुदायिक वॉलंटियर पहल जो तपेदिक (टीबी) उन्मूलन को जन-आंदोलन में तब्दील करने की दिशा में भारत का अब तक का सबसे संगठित प्रयास बताई जा रही है। 11 राज्यों के 55 जिलों में इस पायलट कार्यक्रम के तहत करीब 58,000 वॉलंटियर्स घर-घर जाकर टीबी जांच, उपचार और जागरूकता का संदेश फैलाएँगे।

अभियान की संरचना और भागीदार

यह अभियान तीन मंत्रालयों — स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय — के संयुक्त तत्वावधान में चलाया जाएगा। वॉलंटियर्स की फ़ौज में एनसीसी कैडेट्स, मॉय भारत के स्वयंसेवक, जन प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी शामिल हैं। पहले चरण में ब्लॉक, वार्ड और सामुदायिक स्तर पर जुड़ाव को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि 'टीबी मुक्त भारत' का संदेश स्वास्थ्य केन्द्रों की सीमा से निकलकर सीधे घरों और गलियों तक पहुँचे।

मुख्य घटनाक्रम और नेताओं के वक्तव्य

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कार्यक्रम में कहा, '58,000 स्वयंसेवक गांव-गांव जाकर काम करेंगे।' उन्होंने खेल विभाग और रक्षा मंत्रालय को इस 'सपने को साकार करने' के लिए धन्यवाद दिया। नड्डा ने रेखांकित किया कि वॉलंटियर्स की भूमिका महज़ जागरूकता प्रसार तक सीमित नहीं है — उन्हें टीबी से जुड़े डर और सामाजिक कलंक को दूर कर मरीज़ों को समय पर इलाज से जोड़ना होगा।

नड्डा ने यह भी कहा, 'केवल जागरुकता और स्क्रीनिंग पर्याप्त नहीं; निदान और उपचार सुनिश्चित करना होगा, सामुदायिक भागीदारी बढ़ानी होगी और नए विचार लाने होंगे।'

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि एक स्वस्थ आबादी के बिना विकसित भारत का लक्ष्य अधूरा है। उन्होंने स्वास्थ्य, युवा और रक्षा को 'त्रिशक्ति' बताते हुए कहा कि तीनों मिलकर एक राष्ट्रीय मिशन पर हैं।

टीबी आँकड़े: प्रगति और चुनौतियाँ

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, भारत में टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है और मरीज़ों की इलाज कवरेज बढ़कर 92 प्रतिशत हो गई है। टीबी पहचान के लिए अब हैंडहेल्ड एक्स-रे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (NAT) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था, और अब उसकी समयसीमा पर विशेषज्ञों में चर्चा जारी है।

जोश टीमें क्या करेंगी

सामुदायिक स्तर पर 'जोश' टीमें टीबी के लक्षण, रोकथाम के उपाय, समय पर जांच और उपचार पूरा करने के महत्व से संबंधित जानकारी प्रसारित करेंगी। इसके साथ ही वे टीबी से जुड़े मिथकों और गलत धारणाओं को दूर करने, सामाजिक कलंक घटाने और परिवारों को राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ने का काम करेंगी।

आगे क्या होगा

पहले चरण की सफलता के आधार पर इस अभियान को और राज्यों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है। कार्यक्रम में युवा एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी उपस्थित थे। गौरतलब है कि यह अभियान राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सरकारी तंत्र के साथ-साथ नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य माना गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर वैश्विक टीबी रिपोर्टों में भारत अभी भी सर्वाधिक बोझ वाले देशों में शामिल है। 58,000 वॉलंटियर्स का जमीनी नेटवर्क तभी असरदार होगा जब उनकी जवाबदेही, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और डेटा रिपोर्टिंग की निगरानी की ठोस व्यवस्था हो — जिसका विवरण अभी सामने नहीं आया है। तीन मंत्रालयों की साझेदारी रचनात्मक है, लेकिन बहु-मंत्रालयी अभियानों में समन्वय की कमी पहले भी बाधा बनती रही है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'जोश' अभियान क्या है और यह कब शुरू हुआ?
'जोश' (Joint Squad for Health) एक सामुदायिक वॉलंटियर अभियान है जिसे 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम से लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य टीबी उन्मूलन के लिए घर-घर जागरूकता, जांच और उपचार का संदेश पहुँचाना है।
'जोश' अभियान में कितने वॉलंटियर्स शामिल हैं और वे क्या करेंगे?
इस अभियान में करीब 58,000 वॉलंटियर्स शामिल हैं, जो 11 राज्यों के 55 जिलों में काम करेंगे। ये वॉलंटियर्स टीबी के लक्षणों की जानकारी देंगे, मिथकों को दूर करेंगे, सामाजिक कलंक घटाएँगे और लोगों को समय पर जांच व उपचार के लिए प्रेरित करेंगे।
भारत में टीबी की मौजूदा स्थिति क्या है?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के अनुसार भारत में टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है और इलाज कवरेज 92 प्रतिशत तक पहुँच गई है। टीबी पहचान के लिए अब हैंडहेल्ड एक्स-रे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और NAT तकनीकों का उपयोग भी बढ़ रहा है।
'जोश' अभियान में कौन-कौन से मंत्रालय और संगठन शामिल हैं?
यह अभियान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में चलाया जा रहा है। एनसीसी कैडेट्स, मॉय भारत के वॉलंटियर्स, निर्वाचित जन प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी इसका हिस्सा हैं।
इस अभियान का आगे क्या विस्तार होगा?
फिलहाल पहले चरण में 11 राज्यों के 55 जिलों में यह पायलट कार्यक्रम चलाया जाएगा। पहले चरण की सफलता के आधार पर इसे और राज्यों तक विस्तारित किए जाने की संभावना जताई जा रही है, हालाँकि इसकी आधिकारिक समयसीमा अभी घोषित नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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