29 जून 2026
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जेपी नड्डा की अध्यक्षता में CCHFW का 16वाँ सम्मेलन, SSBSK कार्यक्रम का होगा शुभारंभ

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जेपी नड्डा की अध्यक्षता में CCHFW का 16वाँ सम्मेलन, SSBSK कार्यक्रम का होगा शुभारंभ

सारांश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में CCHFW का 16वाँ सम्मेलन सोमवार को विज्ञान भवन में होगा। इसमें SSBSK कार्यक्रम लॉन्च होगा, जो HBNC और HBYC को एकीकृत कर जन्म से 36 माह तक के बच्चों को जोखिम-आधारित घरेलू स्वास्थ्य सेवाएँ देगा।

मुख्य बातें

जेपी नड्डा 29 जून 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में CCHFW के 16वें सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे।
समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SSBSK) का औपचारिक शुभारंभ होगा, जो जन्म से 36 माह तक के बच्चों को लक्षित करता है।
SSBSK, HBNC और HBYC को एकीकृत कर एक समग्र राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाएगा।
'जोखिमग्रस्त' नवजातों को पहले 42 दिनों में अधिकतम 9 बार और बच्चों को 36 माह तक 8 बार घरेलू स्वास्थ्य सेवा मिलेगी।
आशा, ANM, CHO और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मिलकर घर-घर सेवाएँ देंगे; DSS, चाइल्ड ट्रैकिंग ऐप और अलर्ट सिस्टम से निगरानी होगी।
सम्मेलन में NHM, SDG और खाद्य-औषधि सुधार पर भी चर्चा होगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा सोमवार, 29 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) के 16वें सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। इस उच्चस्तरीय बैठक में बाल स्वास्थ्य, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और खाद्य-औषधि सुधार सहित कई प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।

मुख्य घटनाक्रम

सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SSBSK) का औपचारिक शुभारंभ होगा। यह एक व्यापक राष्ट्रीय पहल है, जो जन्म से लेकर 36 माह तक के बच्चों को निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण और समुदाय-आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई है। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्यक्रम सरकार की उस प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है जिसमें देश के प्रत्येक बच्चे तक सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने का लक्ष्य है।

SSBSK की संरचना और विशेषताएँ

SSBSK दो मौजूदा सामुदायिक कार्यक्रमों — होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (HBNC) और होम-बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड (HBYC) — को एकीकृत कर एक समग्र राष्ट्रीय ढाँचे में परिवर्तित करेगा। इस एकीकरण से जन्म से तीन वर्ष तक बच्चों की देखभाल में निरंतरता सुनिश्चित होगी और बाल पोषण, जीवित रहने की दर तथा प्रारंभिक मस्तिष्क विकास को मज़बूती मिलेगी।

कार्यक्रम में पहली बार जोखिम-आधारित (रिस्क-स्ट्रैटिफाइड) प्रणाली लागू की जाएगी। इसके तहत 'जोखिमग्रस्त' नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पहले 42 दिनों में अधिकतम नौ बार घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएँ दी जाएंगी, जबकि 'जोखिमग्रस्त' बच्चों को 36 माह की आयु तक अधिकतम आठ बार घरेलू स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।

ज़मीनी क्रियान्वयन और डिजिटल तकनीक

इस कार्यक्रम की डिलीवरी आशा कार्यकर्ताओं, सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (AWW) के संयुक्त प्रयास से घर-घर जाकर की जाएगी। प्रत्येक ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHSND) पर वेल-बेबी सेशन और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मासिक शिशु शिविर आयोजित होंगे।

निगरानी और फॉलो-अप के लिए निर्णय सहायता प्रणाली (DSS), चाइल्ड ट्रैकिंग एप्लीकेशन, रेफरल प्रणाली और अलर्ट मैकेनिज्म जैसी डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना को ज़मीनी सेवाओं से जोड़ने की माँग तेज़ हो रही है।

सम्मेलन का व्यापक एजेंडा

CCHFW के इस सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), सतत विकास लक्ष्य (SDG), खाद्य एवं औषधि सुधार तथा संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विचार-विमर्श होगा। बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद और केंद्र-राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। गौरतलब है कि CCHFW भारत का सर्वोच्च केंद्र-राज्य स्वास्थ्य नीति मंच है, जो केंद्र और राज्यों के बीच स्वास्थ्य नीति समन्वय का प्रमुख ज़रिया है। आने वाले महीनों में SSBSK के क्रियान्वयन की प्रगति इस सम्मेलन में लिए गए निर्णयों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि दोनों कार्यक्रम समानांतर चलते हुए भी अक्सर एक-दूसरे से असंबद्ध रहे। असली परीक्षा ज़मीनी क्रियान्वयन की होगी: आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर पहले से ही कार्यभार अधिक है, और नई जोखिम-आधारित प्रणाली के तहत विज़िट की संख्या बढ़ाना बिना पर्याप्त मानव संसाधन और प्रशिक्षण के संभव नहीं होगा। डिजिटल ट्रैकिंग और अलर्ट सिस्टम का जुड़ाव सकारात्मक है, लेकिन ग्रामीण कनेक्टिविटी की सीमाएँ इसकी प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती हैं। CCHFW जैसे मंच पर राज्यों की सहमति और संसाधन-साझेदारी के बिना यह योजना केंद्रीय घोषणा तक सिमट सकती है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CCHFW का 16वाँ सम्मेलन कब और कहाँ होगा?
यह सम्मेलन 29 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होगा। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा करेंगे और इसमें राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री व वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SSBSK) क्या है?
SSBSK एक व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम है जो जन्म से 36 माह तक के बच्चों को निर्बाध घरेलू और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए बनाया गया है। यह HBNC और HBYC को एकीकृत कर जोखिम-आधारित देखभाल प्रणाली लागू करेगा।
SSBSK के तहत 'जोखिमग्रस्त' बच्चों को कितनी बार घरेलू स्वास्थ्य सेवा मिलेगी?
'जोखिमग्रस्त' नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पहले 42 दिनों में अधिकतम नौ बार घर जाकर सेवाएँ दी जाएंगी। 'जोखिमग्रस्त' बच्चों को 36 माह की आयु तक अधिकतम आठ बार घरेलू स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।
SSBSK को ज़मीनी स्तर पर कौन लागू करेगा?
कार्यक्रम की डिलीवरी आशा कार्यकर्ताओं, ANM, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के संयुक्त प्रयास से होगी। निगरानी के लिए चाइल्ड ट्रैकिंग ऐप, DSS और अलर्ट मैकेनिज्म का उपयोग किया जाएगा।
CCHFW सम्मेलन में SSBSK के अलावा और किन विषयों पर चर्चा होगी?
सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), सतत विकास लक्ष्य (SDG), खाद्य एवं औषधि सुधार और संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।
राष्ट्र प्रेस
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