आयुष्मान सारथी चैटबॉट लॉन्च: जेपी नड्डा ने व्हाट्सएप पर दी पीएम-जय सेवाएं, ड्रग रजिस्ट्री भी शुरू
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 29 जून 2026 को नई दिल्ली में कई अहम डिजिटल स्वास्थ्य पहलों का शुभारंभ किया, जिनमें 'आयुष्मान सारथी–पीएम-जय व्हाट्सएप चैटबॉट', ड्रग रजिस्ट्री और यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI) प्रमुख हैं। इन पहलों का मकसद करोड़ों पीएम-जय लाभार्थियों को सरकारी दफ्तरों या कॉल सेंटर की दौड़ से मुक्ति दिलाकर स्वास्थ्य सेवाओं को उनकी उंगलियों तक पहुंचाना है।
आयुष्मान सारथी चैटबॉट: क्या है और कैसे काम करेगा
आयुष्मान सारथी एक व्हाट्सएप-आधारित चैटबॉट है जो सुरक्षित एपीआई-आधारित इंटीग्रेशन के ज़रिए प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जय) के मुख्य सिस्टम से जुड़ा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म रियल-टाइम में जानकारी और सेवाएं उपलब्ध कराता है — बिना किसी अलग ऐप डाउनलोड किए।
इस चैटबॉट के ज़रिए लाभार्थी पीएम-जय पात्रता जाँच, आयुष्मान कार्ड देखना व डाउनलोड करना, ई-केवाईसी अपडेट, आधार लिंकिंग, कार्ड लॉक/अनलॉक और 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए आयुष्मान वय वंदना कार्ड जैसी सेवाएं सीधे व्हाट्सएप पर प्राप्त कर सकेंगे।
ड्रग रजिस्ट्री: दवाओं के लिए 'सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ'
नड्डा ने ड्रग रजिस्ट्री भी लॉन्च की, जिसे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के अंतर्गत विकसित किया गया है। यह भारत में दवाओं की पहचान, भंडारण, आदान-प्रदान और उपयोग को मानकीकृत करने वाला एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
इसे केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और पुणे स्थित नेशनल रिसोर्स सेंटर फॉर ईएचआर स्टैंडर्ड्स के सहयोग से तैयार किया गया है। मंत्रालय का कहना है कि यह रजिस्ट्री स्वास्थ्य प्रणालियों में दवाओं से जुड़ी जानकारी के लिए एकमात्र प्रामाणिक स्रोत के रूप में काम करेगी।
यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस: इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य नेटवर्क
यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI) आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सर्विस लेयर है — एक ओपन नेटवर्क जो मरीजों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए जोड़ता है, बिना किसी एकल ऐप पर निर्भर हुए। जब कोई मरीज UHI-सक्षम ऐप से स्वास्थ्य सेवाएं खोजता है, तो उसकी रिक्वेस्ट गेटवे के माध्यम से पंजीकृत सेवा प्रदाताओं तक पहुंचती है।
गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार डिजिटल स्वास्थ्य ढाँचे को मज़बूत करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है और पीएम-जय के तहत लाभार्थियों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है।
आम जनता पर असर
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन पहलों से कॉल सेंटर और सरकारी दफ्तरों पर निर्भरता घटेगी, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सरल होगी और डेटा-आधारित शासन को बढ़ावा मिलेगा। फीडबैक संग्रह और शिकायत प्रबंधन को स्वचालित करने से स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार संभव होगा। आने वाले समय में इन प्लेटफॉर्म के विस्तार और अन्य राज्यों में एकीकरण पर नज़र रहेगी।