7 अक्टूबर 2026
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JSSC-CGL परीक्षा रद्द मामला: झारखंड हाई कोर्ट में तीखी बहस, सरकार ने माना 'सिस्टमैटिक फेलियर'

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JSSC-CGL परीक्षा रद्द मामला: झारखंड हाई कोर्ट में तीखी बहस, सरकार ने माना 'सिस्टमैटिक फेलियर'

सारांश

JSSC-CGL परीक्षा रद्द मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने सरकार से तीखे सवाल पूछे — जांच अधूरी है तो 2,700 निर्दोष अभ्यर्थियों का भविष्य क्यों दाँव पर? सरकार ने 'सिस्टमैटिक फेलियर' माना, 28 गिरफ्तार, पर दो साल बाद भी आरोप-पत्र नहीं। अगली सुनवाई गुरुवार को।

मुख्य बातें

झारखंड हाई कोर्ट में 7 अक्टूबर 2026 को JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर लंबी सुनवाई हुई।
राज्य सरकार ने सीलबंद रिपोर्ट पेश कर परीक्षा में 'सिस्टमैटिक फेलियर' और व्यापक अनियमितता स्वीकार की; अब तक 28 से अधिक गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि किसी परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक का प्रमाण नहीं; नेपाल में 28 में से 10 अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्नों की जानकारी थी, उनके परिणाम पहले से रोके गए हैं।
अदालत ने सवाल किया कि 2,700 सफल अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा कैसे होगी और जांच पूरी हुए बिना परीक्षा रद्द करना कैसे उचित है।
एसआईटी जांच दो साल से अधिक समय से जारी, अब तक आरोप-पत्र दाखिल नहीं।
अगली सुनवाई 8 अक्टूबर, सुबह 11 बजे निर्धारित।

झारखंड हाई कोर्ट में 7 अक्टूबर 2026 को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष सीलबंद जांच रिपोर्ट पेश करते हुए स्वीकार किया कि परीक्षा में 'सिस्टमैटिक फेलियर' और व्यापक स्तर पर अनियमितताएँ हुई हैं। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि जांच में अभी तक ऐसा कोई पुख्ता आधार सामने नहीं आया है जिससे सभी 2,700 सफल अभ्यर्थियों को सामूहिक रूप से दोषी ठहराया जा सके।

मुख्य घटनाक्रम

राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने परीक्षा रद्द करने के निर्णय को न्यायसंगत ठहराया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर धांधली के तथ्य जांच में सामने आए हैं और अब तक 28 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सरकारी पक्ष ने यह भी संकेत दिया कि जांच के आगे बढ़ने के साथ गिरफ्तारियों की संख्या और बढ़ सकती है।

अदालत ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि जांच तीन साल तक चलती रहेगी तो न्यायालय इंतज़ार करता नहीं रह सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई अभ्यर्थी योग्यता के आधार पर सफल हुआ है, तो व्यापक अनियमितता का हवाला देकर उसे प्रभावित करने से पहले संबंधित पहलुओं पर विचार अनिवार्य है।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन ने तर्क दिया कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के किसी परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। उनके अनुसार मामला मूल रूप से संभावित प्रश्नों की जानकारी पहले से उपलब्ध कराए जाने से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि नेपाल में 28 अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्नों की जानकारी दी गई थी, जिनमें से 10 सफल हुए। इन 10 अभ्यर्थियों के परिणाम जारी न करने का निर्देश पहले हाई कोर्ट ने दिया था, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि एसआईटी की जांच दो साल से अधिक समय से जारी है और अब तक आरोप-पत्र दाखिल नहीं किया गया है। उनका तर्क था कि जब तक दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों की स्पष्ट पहचान न हो, तब तक पूरी परीक्षा रद्द करना उचित नहीं है।

अदालत की टिप्पणियाँ

हाई कोर्ट ने सरकार से सीधे सवाल किया कि यदि पूरी परीक्षा व्यवस्था में 'सिस्टमैटिक फेलियर' की बात हो रही है, तो इस पहलू की गहन जांच पूरी किए बिना आगे बढ़ना कैसे उचित है। अदालत ने करीब 2,700 सफल अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। एक अन्य पक्ष की ओर से दलील दी गई कि हाई कोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय पहले ही इस मामले में दिशा-निर्देश दे चुके हैं और दोषी तथा निर्दोष अभ्यर्थियों के बीच स्पष्ट भेद किया जाना चाहिए।

सरकार का 18 अगस्त का आदेश

गौरतलब है कि सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त को जेएसएससी-सीजीएल सहित 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का आदेश जारी किया था। सरकार के इस निर्णय को बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

आगे क्या होगा

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार, 8 अक्टूबर को सुबह 11 बजे के लिए निर्धारित की है। यह मामला झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और हज़ारों अभ्यर्थियों के भविष्य से सीधे जुड़ा है — अदालत का अगला कदम इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता का है। सरकार ने 'सिस्टमैटिक फेलियर' तो मान लिया, लेकिन दो साल से अधिक जांच के बाद भी आरोप-पत्र दाखिल न होना यह संकेत देता है कि जांच एजेंसी खुद दबाव में है या अक्षम। असली विडंबना यह है कि जिन 2,700 अभ्यर्थियों ने ईमानदारी से परीक्षा दी, वे अनिश्चितता में झूल रहे हैं — जबकि जो 10 संदिग्ध थे, उनके परिणाम पहले से रोके जा चुके थे। न्यायालय का यह प्रश्न कि 'दोषी और निर्दोष में भेद क्यों नहीं हो रहा', सरकारी नीति निर्माताओं के लिए एक आईना है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

JSSC-CGL परीक्षा क्यों रद्द की गई?
राज्य सरकार ने CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर 18 अगस्त को JSSC-CGL सहित 22 परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश जारी किया था। सरकार का कहना है कि परीक्षा में 'सिस्टमैटिक फेलियर' और बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं।
झारखंड हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर की सुनवाई में क्या कहा?
हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा कि जांच अधूरी रहने पर 2,700 सफल अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा कैसे होगी। अदालत ने यह भी कहा कि यदि जांच तीन साल तक चलती रही तो न्यायालय इंतज़ार नहीं करता रहेगा।
JSSC-CGL मामले में नेपाल से क्या संबंध है?
याचिकाकर्ताओं के अनुसार नेपाल में 28 अभ्यर्थियों को परीक्षा के संभावित प्रश्नों की जानकारी पहले से दी गई थी, जिनमें से 10 सफल हुए। हाई कोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय पहले ही इन 10 अभ्यर्थियों के परिणाम जारी न करने का निर्देश दे चुके हैं।
SIT जांच की स्थिति क्या है?
याचिकाकर्ताओं के अनुसार SIT जांच दो साल से अधिक समय से चल रही है, लेकिन अब तक आरोप-पत्र दाखिल नहीं हुआ है। इस आधार पर उन्होंने तर्क दिया कि दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों की पहचान स्पष्ट हुए बिना पूरी परीक्षा रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे के लिए निर्धारित की है। उस सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें आगे जारी रहेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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