JSSC-CGL परीक्षा रद्द मामला: झारखंड हाई कोर्ट में तीखी बहस, सरकार ने माना 'सिस्टमैटिक फेलियर'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाई कोर्ट में 7 अक्टूबर 2026 को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष सीलबंद जांच रिपोर्ट पेश करते हुए स्वीकार किया कि परीक्षा में 'सिस्टमैटिक फेलियर' और व्यापक स्तर पर अनियमितताएँ हुई हैं। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि जांच में अभी तक ऐसा कोई पुख्ता आधार सामने नहीं आया है जिससे सभी 2,700 सफल अभ्यर्थियों को सामूहिक रूप से दोषी ठहराया जा सके।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने परीक्षा रद्द करने के निर्णय को न्यायसंगत ठहराया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर धांधली के तथ्य जांच में सामने आए हैं और अब तक 28 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सरकारी पक्ष ने यह भी संकेत दिया कि जांच के आगे बढ़ने के साथ गिरफ्तारियों की संख्या और बढ़ सकती है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि जांच तीन साल तक चलती रहेगी तो न्यायालय इंतज़ार करता नहीं रह सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई अभ्यर्थी योग्यता के आधार पर सफल हुआ है, तो व्यापक अनियमितता का हवाला देकर उसे प्रभावित करने से पहले संबंधित पहलुओं पर विचार अनिवार्य है।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन ने तर्क दिया कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के किसी परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। उनके अनुसार मामला मूल रूप से संभावित प्रश्नों की जानकारी पहले से उपलब्ध कराए जाने से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि नेपाल में 28 अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्नों की जानकारी दी गई थी, जिनमें से 10 सफल हुए। इन 10 अभ्यर्थियों के परिणाम जारी न करने का निर्देश पहले हाई कोर्ट ने दिया था, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि एसआईटी की जांच दो साल से अधिक समय से जारी है और अब तक आरोप-पत्र दाखिल नहीं किया गया है। उनका तर्क था कि जब तक दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों की स्पष्ट पहचान न हो, तब तक पूरी परीक्षा रद्द करना उचित नहीं है।
अदालत की टिप्पणियाँ
हाई कोर्ट ने सरकार से सीधे सवाल किया कि यदि पूरी परीक्षा व्यवस्था में 'सिस्टमैटिक फेलियर' की बात हो रही है, तो इस पहलू की गहन जांच पूरी किए बिना आगे बढ़ना कैसे उचित है। अदालत ने करीब 2,700 सफल अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। एक अन्य पक्ष की ओर से दलील दी गई कि हाई कोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय पहले ही इस मामले में दिशा-निर्देश दे चुके हैं और दोषी तथा निर्दोष अभ्यर्थियों के बीच स्पष्ट भेद किया जाना चाहिए।
सरकार का 18 अगस्त का आदेश
गौरतलब है कि सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त को जेएसएससी-सीजीएल सहित 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का आदेश जारी किया था। सरकार के इस निर्णय को बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
आगे क्या होगा
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार, 8 अक्टूबर को सुबह 11 बजे के लिए निर्धारित की है। यह मामला झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और हज़ारों अभ्यर्थियों के भविष्य से सीधे जुड़ा है — अदालत का अगला कदम इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।