28 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कैलाश मानसरोवर यात्रा: विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी — बिना पूरे दस्तावेज़ यात्रा न करें, नेपाल में फंसे श्रद्धालु

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कैलाश मानसरोवर यात्रा: विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी — बिना पूरे दस्तावेज़ यात्रा न करें, नेपाल में फंसे श्रद्धालु

सारांश

विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी सिर्फ सावधानी नहीं — यह उन श्रद्धालुओं की वास्तविक पीड़ा का जवाब है जो अधूरे दस्तावेज़ों के साथ नेपाल में फंस गए। पहला जत्था 4 जुलाई को रवाना होने से पहले यह चेतावनी हर तीर्थयात्री के लिए अनिवार्य पठन है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 28 जून 2026 को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एडवाइजरी जारी की।
चीन का वैध वीज़ा और एंट्री परमिट हाथ में आने से पहले यात्रा शुरू न करें।
कई श्रद्धालु प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के ज़रिए गए और अधूरे दस्तावेज़ों के कारण नेपाल में फंस गए।
राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने दूतावास टीम के साथ परिक्रमा मार्ग, होटल और चिकित्सा सुविधाओं का स्वयं निरीक्षण किया।
इस वर्ष 12 साल में एक बार आने वाला विशेष तिब्बती-चीनी कैलेंडर वर्ष है, जिससे असाधारण भीड़ की संभावना है।
लिपुलेख मार्ग से 50-50 श्रद्धालुओं के 10 जत्थे रवाना होंगे; पहला जत्था 4 जुलाई को उत्तराखंड पहुँचेगा; केवल 38 किलोमीटर पैदल यात्रा।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने 28 जून 2026 को कैलाश मानसरोवर यात्रा के इच्छुक तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि जब तक सभी आवश्यक ट्रैवल दस्तावेज़ — चीन का वैध वीज़ा और एंट्री परमिट — पूरी तरह प्राप्त न हो जाएं, तब तक भारत से यात्रा शुरू न करें। मंत्रालय को ऐसे कई भारतीय नागरिकों से मदद के अनुरोध मिले हैं जो प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के ज़रिए यात्रा पर निकले, लेकिन अधूरे दस्तावेज़ों के कारण नेपाल में फंस गए।

एडवाइजरी में क्या कहा गया

विदेश मंत्रालय ने नागरिकों को स्पष्ट रूप से सलाह दी है कि कन्फर्म दस्तावेज़ों के बिना या दस्तावेज़ मिलने की उम्मीद में यात्रा शुरू करना जोखिमभरा है और इससे रास्ते में फंसने की संभावना काफी बढ़ जाती है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि तीर्थयात्री यह सुनिश्चित करें कि उनका टूर ऑपरेटर विधिवत रूप से पंजीकृत और अधिकृत हो।

गौरतलब है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए चीन से विशेष परमिट की आवश्यकता होती है, जो एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। कई अनधिकृत टूर ऑपरेटर यात्रियों को बिना पक्के दस्तावेज़ों के यात्रा पर रवाना कर देते हैं, जिससे श्रद्धालु नेपाल-चीन सीमा पर अटक जाते हैं।

राजदूत का वीडियो संदेश और तैयारियों का जायज़ा

चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने तीर्थयात्रियों के लिए एक विशेष वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने यात्रा की तैयारियों, कैलाश पर्वत की परिक्रमा के अपने अनुभव और यात्रा से जुड़ी अनिवार्य सावधानियाँ साझा कीं। राजदूत और दूतावास की टीम ने स्वयं कैलाश पर्वत के परिक्रमा मार्ग और सभी आधिकारिक प्रवेश स्थानों का दौरा किया।

दूतावास की टीम ने केवल प्रवेश बिंदुओं का निरीक्षण नहीं किया, बल्कि उन होटलों की भी जाँच की जहाँ यात्रियों को हर रात ठहराया जाएगा — रसोई, कमरों की स्थिति और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का भी मुआयना किया गया। राजदूत ने बताया कि चीनी सरकार के साथ मिलकर तैयारियाँ पूरी करने की कोशिश की गई है।

इस वर्ष विशेष महत्व और भीड़ की चेतावनी

राजदूत दोरईस्वामी ने यह भी बताया कि यह वर्ष चीनी और पारंपरिक तिब्बती कैलेंडर के अनुसार हर 12 साल में एक बार आने वाला विशेष वर्ष है, जिसे स्थानीय लोगों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस कारण यात्रा मार्ग पर असाधारण भीड़ की संभावना है और तीर्थयात्रियों को इसके लिए मानसिक व शारीरिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

उत्तराखंड मार्ग से यात्रा का विवरण

उत्तराखंड के लिपुलेख मार्ग से होने वाली इस वर्ष की कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। पहला जत्था 4 जुलाई को उत्तराखंड पहुँचेगा। इस वर्ष 50-50 श्रद्धालुओं के 10 जत्थे लिपुलेख मार्ग से रवाना होंगे। श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात यह है कि इस बार केवल 38 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना होगा, जबकि शेष यात्रा वाहनों के माध्यम से पूरी की जा सकेगी।

आगे क्या करें तीर्थयात्री

विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी के अनुसार, तीर्थयात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले तीन बातें अवश्य सुनिश्चित करनी चाहिए — चीन का वैध वीज़ा व एंट्री परमिट हाथ में हो, टूर ऑपरेटर का पंजीकरण प्रमाणित हो, और यात्रा की शारीरिक चुनौतियों के लिए पर्याप्त तैयारी हो। यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब पहला जत्था कुछ ही दिनों में रवाना होने वाला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हर बार सरकार की प्रतिक्रिया एडवाइजरी तक सीमित रहती है, न कि ऑपरेटरों पर कार्रवाई तक। इस वर्ष 12 साल के विशेष तिब्बती कैलेंडर के कारण भीड़ और जटिलताएं दोनों बढ़ेंगी — ऐसे में केवल चेतावनी पर्याप्त नहीं, बल्कि एक केंद्रीकृत सत्यापन तंत्र की ज़रूरत है जो यात्रा शुरू होने से पहले ही दस्तावेज़ों की जाँच अनिवार्य करे।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए कौन-से दस्तावेज़ ज़रूरी हैं?
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए चीन का वैध वीज़ा और एंट्री परमिट अनिवार्य है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये दस्तावेज़ हाथ में आने के बाद ही भारत से यात्रा शुरू करें, अन्यथा नेपाल या सीमा पर फंसने का जोखिम है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पहला जत्था कब रवाना होगा?
इस वर्ष का पहला जत्था 4 जुलाई 2026 को उत्तराखंड पहुँचेगा। लिपुलेख मार्ग से 50-50 श्रद्धालुओं के कुल 10 जत्थे यात्रा पर रवाना होंगे।
क्यों नेपाल में फंस जाते हैं कैलाश यात्री?
कई भारतीय नागरिक प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के ज़रिए यात्रा पर निकलते हैं, लेकिन उनके पास चीन के लिए ज़रूरी एंट्री परमिट और वीज़ा नहीं होते। ऐसे में वे नेपाल-चीन सीमा पर आगे नहीं बढ़ पाते और वहीं अटक जाते हैं।
इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा में इतनी भीड़ क्यों होगी?
2026 चीनी और पारंपरिक तिब्बती कैलेंडर के अनुसार हर 12 साल में एक बार आने वाला विशेष वर्ष है, जिसे स्थानीय और तिब्बती समुदाय अत्यंत पवित्र मानते हैं। इस कारण परिक्रमा मार्ग पर असाधारण भीड़ की संभावना है।
लिपुलेख मार्ग से यात्रा में कितना पैदल चलना होगा?
इस वर्ष लिपुलेख मार्ग से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को केवल 38 किलोमीटर पैदल चलना होगा। शेष यात्रा वाहनों के माध्यम से पूरी की जा सकेगी, जो पिछले वर्षों की तुलना में राहत की बात है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 11 महीने पहले