कैलाश मानसरोवर यात्रा: विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी — बिना पूरे दस्तावेज़ यात्रा न करें, नेपाल में फंसे श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 28 जून 2026 को कैलाश मानसरोवर यात्रा के इच्छुक तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि जब तक सभी आवश्यक ट्रैवल दस्तावेज़ — चीन का वैध वीज़ा और एंट्री परमिट — पूरी तरह प्राप्त न हो जाएं, तब तक भारत से यात्रा शुरू न करें। मंत्रालय को ऐसे कई भारतीय नागरिकों से मदद के अनुरोध मिले हैं जो प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के ज़रिए यात्रा पर निकले, लेकिन अधूरे दस्तावेज़ों के कारण नेपाल में फंस गए।
एडवाइजरी में क्या कहा गया
विदेश मंत्रालय ने नागरिकों को स्पष्ट रूप से सलाह दी है कि कन्फर्म दस्तावेज़ों के बिना या दस्तावेज़ मिलने की उम्मीद में यात्रा शुरू करना जोखिमभरा है और इससे रास्ते में फंसने की संभावना काफी बढ़ जाती है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि तीर्थयात्री यह सुनिश्चित करें कि उनका टूर ऑपरेटर विधिवत रूप से पंजीकृत और अधिकृत हो।
गौरतलब है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए चीन से विशेष परमिट की आवश्यकता होती है, जो एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। कई अनधिकृत टूर ऑपरेटर यात्रियों को बिना पक्के दस्तावेज़ों के यात्रा पर रवाना कर देते हैं, जिससे श्रद्धालु नेपाल-चीन सीमा पर अटक जाते हैं।
राजदूत का वीडियो संदेश और तैयारियों का जायज़ा
चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने तीर्थयात्रियों के लिए एक विशेष वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने यात्रा की तैयारियों, कैलाश पर्वत की परिक्रमा के अपने अनुभव और यात्रा से जुड़ी अनिवार्य सावधानियाँ साझा कीं। राजदूत और दूतावास की टीम ने स्वयं कैलाश पर्वत के परिक्रमा मार्ग और सभी आधिकारिक प्रवेश स्थानों का दौरा किया।
दूतावास की टीम ने केवल प्रवेश बिंदुओं का निरीक्षण नहीं किया, बल्कि उन होटलों की भी जाँच की जहाँ यात्रियों को हर रात ठहराया जाएगा — रसोई, कमरों की स्थिति और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का भी मुआयना किया गया। राजदूत ने बताया कि चीनी सरकार के साथ मिलकर तैयारियाँ पूरी करने की कोशिश की गई है।
इस वर्ष विशेष महत्व और भीड़ की चेतावनी
राजदूत दोरईस्वामी ने यह भी बताया कि यह वर्ष चीनी और पारंपरिक तिब्बती कैलेंडर के अनुसार हर 12 साल में एक बार आने वाला विशेष वर्ष है, जिसे स्थानीय लोगों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस कारण यात्रा मार्ग पर असाधारण भीड़ की संभावना है और तीर्थयात्रियों को इसके लिए मानसिक व शारीरिक रूप से तैयार रहना चाहिए।
उत्तराखंड मार्ग से यात्रा का विवरण
उत्तराखंड के लिपुलेख मार्ग से होने वाली इस वर्ष की कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। पहला जत्था 4 जुलाई को उत्तराखंड पहुँचेगा। इस वर्ष 50-50 श्रद्धालुओं के 10 जत्थे लिपुलेख मार्ग से रवाना होंगे। श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात यह है कि इस बार केवल 38 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना होगा, जबकि शेष यात्रा वाहनों के माध्यम से पूरी की जा सकेगी।
आगे क्या करें तीर्थयात्री
विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी के अनुसार, तीर्थयात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले तीन बातें अवश्य सुनिश्चित करनी चाहिए — चीन का वैध वीज़ा व एंट्री परमिट हाथ में हो, टूर ऑपरेटर का पंजीकरण प्रमाणित हो, और यात्रा की शारीरिक चुनौतियों के लिए पर्याप्त तैयारी हो। यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब पहला जत्था कुछ ही दिनों में रवाना होने वाला है।