कमला एकादशी पर राजवेश में सजे बाबा महाकाल, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में 27 मई 2026 को कमला एकादशी के पावन अवसर पर भोर से ही भक्तों की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सूखे मेवों और बहुमूल्य आभूषणों से सुसज्जित कर राजा के रूप में तैयार किया गया, जिसे देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। देश-विदेश से आए हजारों भक्तों के 'हर-हर महादेव' और 'जय महाकाल' के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान रहा।
भस्म आरती और विशेष शृंगार
बुधवार को तड़के भस्म आरती के लिए श्रद्धालु देर रात से ही पंक्तियों में खड़े हो गए थे। रोजाना की परंपरा के अनुसार, भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा का जलाभिषेक किया गया और तत्पश्चात पंचामृत से स्नान करवाया गया। इसके बाद अखाड़े की ओर से बाबा को भस्म अर्पित की गई।
कमला एकादशी के विशेष शृंगार में बाबा के मस्तक पर चंद्रमा और त्रिशूल सजाए गए। शंख, डमरू और घंटियों की मधुर ध्वनि से संपूर्ण वातावरण दिव्य और आध्यात्मिक हो उठा।
एकादशी पर हरि-हर की विशेष पूजा
महाकाल मंदिर में एकादशी के दिन महादेव को भगवान विष्णु (हरि) के रूप में मानकर पूजा-अर्चना की जाती है। इस विशेष अवसर पर बाबा को बेलपत्र के साथ-साथ तुलसी की माला भी अर्पित की जाती है — यह परंपरा शिव और विष्णु की एकता का प्रतीक मानी जाती है। मंदिर के पुजारियों द्वारा विष्णु सहस्रनाम और शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ कर लोक कल्याण की कामना की गई।
भक्तों की अगाध आस्था
नंदी हॉल में बैठकर अनेक श्रद्धालु बाबा की भक्ति में लीन दिखे। गौरतलब है कि कई खास एकादशियों पर महाकालेश्वर मंदिर में शिव-शक्ति मिलन के रूप में माता पार्वती को गोद में लिए भगवान महाकाल के अलौकिक दर्शन भी भक्तों को प्राप्त होते हैं। इस बार भी मंदिर परिसर में चारों ओर भक्ति और आस्था का अनूठा माहौल छाया रहा।
आगे का कार्यक्रम
महाकालेश्वर मंदिर में वर्ष भर विभिन्न पर्वों और एकादशियों पर इसी प्रकार के विशेष शृंगार और अनुष्ठान आयोजित होते हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार, आने वाले पर्वों पर भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की जाएगी।