12 जुलाई 2026
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कमला एकादशी पर राजवेश में सजे बाबा महाकाल, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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कमला एकादशी पर राजवेश में सजे बाबा महाकाल, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

सारांश

कमला एकादशी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल भांग, चंदन, सूखे मेवों और आभूषणों से राजा के रूप में सजे। भोर से ही हजारों श्रद्धालु भस्म आरती के लिए उमड़े और 'जय महाकाल' के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान रहा।

मुख्य बातें

27 मई 2026 को कमला एकादशी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में विशेष भस्म आरती आयोजित हुई।
बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सूखे मेवों और आभूषणों से राजा के रूप में सजाया गया; मस्तक पर चंद्रमा और त्रिशूल सुशोभित किए गए।
महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा जलाभिषेक, पंचामृत स्नान और भस्म अर्पण किया गया।
एकादशी पर बाबा को तुलसी की माला अर्पित की गई और विष्णु सहस्रनाम व शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ हुआ।
देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने 'हर-हर महादेव' और 'जय महाकाल' के जयकारों से परिसर को गुंजायमान किया।

उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में 27 मई 2026 को कमला एकादशी के पावन अवसर पर भोर से ही भक्तों की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सूखे मेवों और बहुमूल्य आभूषणों से सुसज्जित कर राजा के रूप में तैयार किया गया, जिसे देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। देश-विदेश से आए हजारों भक्तों के 'हर-हर महादेव' और 'जय महाकाल' के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान रहा।

भस्म आरती और विशेष शृंगार

बुधवार को तड़के भस्म आरती के लिए श्रद्धालु देर रात से ही पंक्तियों में खड़े हो गए थे। रोजाना की परंपरा के अनुसार, भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा का जलाभिषेक किया गया और तत्पश्चात पंचामृत से स्नान करवाया गया। इसके बाद अखाड़े की ओर से बाबा को भस्म अर्पित की गई।

कमला एकादशी के विशेष शृंगार में बाबा के मस्तक पर चंद्रमा और त्रिशूल सजाए गए। शंख, डमरू और घंटियों की मधुर ध्वनि से संपूर्ण वातावरण दिव्य और आध्यात्मिक हो उठा।

एकादशी पर हरि-हर की विशेष पूजा

महाकाल मंदिर में एकादशी के दिन महादेव को भगवान विष्णु (हरि) के रूप में मानकर पूजा-अर्चना की जाती है। इस विशेष अवसर पर बाबा को बेलपत्र के साथ-साथ तुलसी की माला भी अर्पित की जाती है — यह परंपरा शिव और विष्णु की एकता का प्रतीक मानी जाती है। मंदिर के पुजारियों द्वारा विष्णु सहस्रनाम और शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ कर लोक कल्याण की कामना की गई।

भक्तों की अगाध आस्था

नंदी हॉल में बैठकर अनेक श्रद्धालु बाबा की भक्ति में लीन दिखे। गौरतलब है कि कई खास एकादशियों पर महाकालेश्वर मंदिर में शिव-शक्ति मिलन के रूप में माता पार्वती को गोद में लिए भगवान महाकाल के अलौकिक दर्शन भी भक्तों को प्राप्त होते हैं। इस बार भी मंदिर परिसर में चारों ओर भक्ति और आस्था का अनूठा माहौल छाया रहा।

आगे का कार्यक्रम

महाकालेश्वर मंदिर में वर्ष भर विभिन्न पर्वों और एकादशियों पर इसी प्रकार के विशेष शृंगार और अनुष्ठान आयोजित होते हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार, आने वाले पर्वों पर भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु हाल के वर्षों में डिजिटल प्रसार और सुगम यात्रा सुविधाओं के कारण यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब उज्जैन को धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की सरकारी योजनाएँ भी गति पकड़ रही हैं। हालांकि, भारी भीड़ के बीच श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना आस्था का उत्सव।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमला एकादशी क्या है और महाकाल मंदिर में इसका क्या महत्व है?
कमला एकादशी ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते हैं। महाकालेश्वर मंदिर में इस दिन भगवान महाकाल को भगवान विष्णु (हरि) के रूप में मानकर विशेष पूजा की जाती है और तुलसी की माला अर्पित की जाती है।
27 मई 2026 को महाकालेश्वर मंदिर में क्या विशेष हुआ?
कमला एकादशी पर बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सूखे मेवों और आभूषणों से राजा के रूप में सजाया गया। महानिर्वाणी अखाड़े ने जलाभिषेक, पंचामृत स्नान और भस्म अर्पण किया, और हजारों श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में भाग लिया।
महाकाल मंदिर में भस्म आरती कब होती है?
भस्म आरती प्रतिदिन भोर में होती है। श्रद्धालु इसके लिए देर रात से ही पंक्तियों में लग जाते हैं। परंपरा के अनुसार, भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।
एकादशी पर महाकाल मंदिर में कौन-से विशेष अनुष्ठान होते हैं?
एकादशी पर मंदिर के पुजारी विष्णु सहस्रनाम और शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करते हैं। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा जलाभिषेक और भस्म अर्पण किया जाता है। कुछ विशेष एकादशियों पर शिव-शक्ति मिलन के रूप में माता पार्वती को गोद में लिए महाकाल के दर्शन भी होते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर में एकादशी पर हरि-हर पूजा की क्या परंपरा है?
एकादशी के दिन शिव और विष्णु की एकता को रेखांकित करते हुए बाबा महाकाल को बेलपत्र के साथ-साथ तुलसी की माला भी अर्पित की जाती है, जो सामान्यतः विष्णु को चढ़ाई जाती है। यह परंपरा हरि-हर की अभिन्नता का प्रतीक मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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