कन्नूर हवाई अड्डा रनवे विस्तार: CM सतीशन ने जल्द फैसले का वादा किया, 8 साल से लटका अधिग्रहण
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 15 अक्टूबर 2026 को विधानसभा में स्वीकार किया कि कन्नूर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे विस्तार के लिए प्रस्तावित भूमि शायद उपयुक्त नहीं है और इस लंबित प्रक्रिया के कारण कीझल्लूर गाँव के स्थानीय निवासियों को वर्षों से गंभीर परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार जल्द से जल्द निर्णय लेगी और प्रभावित परिवारों की मुश्किलें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
मुख्य घटनाक्रम
प्रस्तावित योजना के अनुसार कन्नूर हवाई अड्डे के रनवे को मौजूदा 3,050 मीटर से बढ़ाकर 4,000 मीटर करना है। इसके लिए कीझल्लूर गाँव में लगभग 99.32 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जानी है, जिसकी अनुमानित लागत ₹942.93 करोड़ आँकी गई है।
केरल सरकार ने 27 दिसंबर 2016 को जारी एक आदेश के जरिये 99.92 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रशासनिक मंजूरी दी थी। 2017 में अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई, लेकिन लगभग 9 वर्षों बाद भी भूमि का वास्तविक अधिग्रहण नहीं हो सका है।
भूमि की तकनीकी अनुपयुक्तता
मुख्यमंत्री सतीशन ने विधानसभा को बताया कि प्रस्तावित स्थल काफी निचले स्तर पर स्थित है और रनवे के लिए आवश्यक ऊँचाई तक लाने हेतु वहाँ बड़ी मात्रा में मिट्टी भरनी पड़ेगी, जो इसे तकनीकी और वित्तीय दृष्टि से अव्यावहारिक बनाता है। उन्होंने कहा, "मुझे अभी भी समझ नहीं आ रहा है कि नोटिफिकेशन क्यों जारी किया गया और इलाके के लोगों को इतनी परेशानी में क्यों डाला गया।"
गौरतलब है कि 2017 में भारी बारिश के दौरान हवाई अड्डे की चहारदीवारी ढह गई थी, जिससे प्रभावित क्षेत्र के कई घरों को नुकसान पहुँचा था। तब से लंबी अनिश्चितता के कारण इलाके के मकान भी धीरे धीरे जर्जर होते जा रहे हैं।
पुनर्वास पैकेज पर विवाद
प्रस्तावित अधिग्रहण को भूमि मालिकों के तीखे विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। विस्थापित होने वाले परिवारों ने सरकार द्वारा मंजूर ₹10 लाख के विशेष पुनर्वास पैकेज को अस्वीकार कर दिया है। यह पैकेज कोझिकोड हवाई अड्डे पर रनवे और सेफ्टी एरिया के लिए अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे के आधार पर तैयार किया गया था।
प्रभावित परिवारों ने माँग की है कि उन्हें या तो कन्नूर हवाई अड्डे के भूमि अधिग्रहण के पहले चरण में दिया गया पैकेज मिले, या फिर ₹15 लाख का संशोधित मुआवजा दिया जाए। इन परिवारों ने सुनवाई का बहिष्कार कर अधिकारियों को अपनी माँगें लिखित रूप में सौंपी हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
मुख्यमंत्री सतीशन ने आश्वासन दिया कि पुनर्वास पैकेज के मुद्दे को सुलझाने के लिए सरकार प्रभावित भूमि मालिकों के साथ आगे और बातचीत करेगी। उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने वाले विधायक टीके गोविंदन से भी आग्रह किया कि वे समझौता कराने की दिशा में पहल करें।
यह समीक्षा अंततः यह तय करेगी कि रनवे विस्तार के लिए प्रस्तावित स्थल को बरकरार रखा जाएगा या नहीं, और दशक भर से लंबित भूमि अधिग्रहण व पुनर्वास के मुद्दों का समाधान कैसे निकाला जाएगा। आलोचकों का कहना है कि 2016 17 में की गई प्रशासनिक मंजूरी तकनीकी परीक्षण के बिना जारी की गई, जिसने स्थानीय परिवारों को वर्षों की अनिश्चितता में धकेल दिया।