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कानपुर के छात्र आशुतोष यादव ने PM मोदी को लिखा पत्र, सुरक्षा की चिंता के साथ देशहित में त्याग का संकल्प

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कानपुर के छात्र आशुतोष यादव ने PM मोदी को लिखा पत्र, सुरक्षा की चिंता के साथ देशहित में त्याग का संकल्प

सारांश

कानपुर के प्रतियोगी छात्र आशुतोष यादव ने PM मोदी को पत्र लिखकर सुरक्षा काफिले को सीमित करने की पहल पर चिंता जताई और पेट्रोलियम संयम व विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता घटाने के आह्वान के साथ देशहित में हर त्याग करने का संकल्प लिया।

मुख्य बातें

कानपुर के प्रतियोगी छात्र आशुतोष यादव ने 15 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा।
पत्र में सुरक्षा काफिले को सीमित करने की पहल पर चिंता जताई और सावधानी बरतने का आग्रह किया।
आशुतोष ने पेट्रोलियम संयम , सोने की खरीद में कमी और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता घटाने के PM के आह्वान का समर्थन किया।
उन्होंने भारत के शीर्ष-5 अर्थव्यवस्था में शामिल होने और चिनाब ब्रिज , पूर्वोत्तर रेल जैसे बुनियादी ढाँचे की सराहना की।
युवाओं से संवैधानिक तरीकों से असहमति जताने और देश की एकता-अखंडता की रक्षा करने का आग्रह किया।

कानपुर के प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी आशुतोष यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है। 15 जून 2025 को सामने आए इस पत्र में आशुतोष ने न केवल प्रधानमंत्री की सादगी की सराहना की, बल्कि यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में देश के शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने पेट्रोलियम उत्पादों के संयमित उपयोग और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता घटाने के प्रधानमंत्री के आह्वान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

पत्र लिखने की प्रेरणा

आशुतोष यादव के अनुसार, हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से पेट्रोलियम उत्पादों का सीमित उपयोग करने, सोने की खरीद में सावधानी बरतने और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करने का आग्रह किया था, ताकि भारतीय विदेश मुद्रा भंडार पर अनावश्यक दबाव न पड़े। इस आह्वान से प्रेरित होकर आशुतोष ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा और अपने परिवार समेत इस पहल के साथ खड़े रहने का वचन दिया।

उन्होंने कहा, 'मैंने पीएम मोदी के आह्वान को लेकर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। पीएम मोदी की पहल के साथ मैं और मेरा पूरा परिवार हैं।'

सुरक्षा काफिले पर चिंता

समाचारों के माध्यम से आशुतोष को प्रधानमंत्री की ओर से अपने सुरक्षा काफिले को सीमित करने की पहल की जानकारी मिली। उन्होंने इस सादगी की सराहना करते हुए भी चिंता जताई। उनके शब्दों में, 'वैश्विक संदर्भ में भारत तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है, तो कई देश और लोग हैं जिन्हें भारत की यह प्रगति अखर रही होगी।' इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे अपनी सुरक्षा के प्रति सावधानी बरतते रहें।

देशहित में त्याग का संकल्प

आशुतोष ने कहा कि हर नागरिक के पास देशप्रेम दिखाने के अपने-अपने तरीके होते हैं। उनके अनुसार, 'किसी भी नागरिक के लिए देशप्रेम दिखाने का एक अवसर होता है कि वह सेना में जाकर देश की रक्षा करे, लेकिन जिसे सीमा पर जाने का अवसर नहीं मिला, वह अपने देशहित में काम करके निश्चित रूप से देश सेवा कर सकता है।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक संकट के समय यदि कोई भी त्याग करना पड़े तो वे पूरी तरह तैयार हैं।

बुनियादी ढाँचे और आर्थिक प्रगति की सराहना

आशुतोष ने पिछले करीब 12 वर्षों में देश की आर्थिक और भौतिक प्रगति को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत 2014 के बाद दुनिया की शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। चिनाब ब्रिज, पूर्वोत्तर में रेल कनेक्टिविटी, मुंबई सी-लिंक, नए हाईवे, एयरपोर्ट, IIT और IIM जैसे संस्थान देश के बदलते स्वरूप के प्रमाण हैं। उनका मानना है कि बेहतर बुनियादी ढाँचे से निवेश और रोज़गार दोनों में वृद्धि होती है।

युवाओं के लिए संदेश

आशुतोष यादव ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि लोकतंत्र में अपनी माँगें और असहमति संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीकों से रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी मार्ग से बचना चाहिए। उनके अनुसार, देशहित सर्वोपरि है और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ना ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस पत्र की विषय-वस्तु — सुरक्षा काफिले की सादगी पर चिंता और आर्थिक राष्ट्रवाद के प्रति प्रतिबद्धता — उस व्यापक सामाजिक मनोविज्ञान को दर्शाती है जो मोदी सरकार के इर्द-गिर्द बनी है। यह पत्र राजनीतिक नहीं, भावनात्मक है — और यही इसकी सीमा भी है। पेट्रोलियम संयम या सोने की खरीद में कमी जैसे आह्वान व्यक्तिगत स्तर पर प्रशंसनीय हैं, किंतु विदेश मुद्रा भंडार पर दबाव की संरचनात्मक समस्याएँ नीतिगत हस्तक्षेप माँगती हैं, न कि केवल नागरिक त्याग। युवाओं की यह ऊर्जा यदि सूचित नागरिक भागीदारी में बदले, तो यह लोकतंत्र की असली ताकत बन सकती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आशुतोष यादव ने PM मोदी को पत्र क्यों लिखा?
कानपुर के प्रतियोगी छात्र आशुतोष यादव ने PM मोदी के पेट्रोलियम संयम, सोने की खरीद में कमी और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता घटाने के आह्वान से प्रेरित होकर पत्र लिखा। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के सुरक्षा काफिले को सीमित करने की पहल पर चिंता भी जताई।
आशुतोष यादव की PM मोदी की सुरक्षा को लेकर क्या चिंता है?
आशुतोष का मानना है कि भारत तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था है और इससे कई देशों और समूहों को आपत्ति हो सकती है, इसलिए प्रधानमंत्री की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि सादगी की पहल के बावजूद वे सुरक्षा के प्रति सावधान रहें।
PM मोदी ने देशवासियों से क्या आह्वान किया था जिसका आशुतोष ने समर्थन किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय विदेश मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों का सीमित उपयोग, सोने की खरीद में सावधानी और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता घटाने का आग्रह किया था। आशुतोष ने इन तीनों बिंदुओं पर अपनी और अपने परिवार की प्रतिबद्धता पत्र में व्यक्त की।
आशुतोष यादव ने भारत के विकास के बारे में क्या कहा?
आशुतोष के अनुसार 2014 के बाद भारत दुनिया की शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। उन्होंने चिनाब ब्रिज, पूर्वोत्तर रेल कनेक्टिविटी, मुंबई सी-लिंक, नए हाईवे, एयरपोर्ट, IIT और IIM को बेहतर बुनियादी ढाँचे के उदाहरण के रूप में गिनाया।
आशुतोष यादव ने युवाओं को क्या संदेश दिया?
आशुतोष ने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी माँगें और असहमति संवैधानिक व लोकतांत्रिक तरीकों से रखें। उन्होंने कहा कि विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने वाले रास्तों से बचना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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