पीएम मोदी के जवाब से कानपुर के युवा आशुतोष यादव गदगद, बोले — 'राष्ट्र हित के लिए त्याग ज़रूरी'
सारांश
मुख्य बातें
कानपुर निवासी युवा नागरिक आशुतोष यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक व्यक्तिगत पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में, जब पीएम ने ईंधन बचाने के लिए अपने काफिले का आकार स्वयं घटाया है, तब भी उनकी सुरक्षा व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए। 24 जून 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय से जवाब मिलने के बाद यादव ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र में एक आम नागरिक की आवाज़ सर्वोच्च पद तक पहुँच सकती है — यह अपने आप में बड़ी बात है।
पत्र की पृष्ठभूमि और आशुतोष की अपील
आशुतोष यादव ने बताया कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील की और उसी भावना के अनुरूप अपने काफिले का आकार कम किया, तो उन्हें लगा कि देश के सर्वोच्च नेता की सुरक्षा पर इसका कोई विपरीत असर न पड़े। उन्होंने कहा, 'जब पीएम मोदी ने ईंधन बचाने की अपील की थी और उसी के अनुसार अपने काफिले का आकार कम कर दिया था, तब मैंने उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी क्योंकि वे देश के प्रधानमंत्री हैं।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पत्र किसी राजनीतिक प्रेरणा से नहीं, बल्कि 'राष्ट्र प्रथम' की भावना से लिखा गया था। उनका मानना है कि देश के नागरिकों को राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए व्यक्तिगत सुविधाओं का त्याग करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
युवाओं पर भरोसा और विकसित भारत का लक्ष्य
आशुतोष ने बताया कि प्रधानमंत्री के पत्र में युवाओं की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। उनके अनुसार, पीएम मोदी ने लिखा कि 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने का लक्ष्य देश के युवाओं के कंधों पर टिका है, क्योंकि उनमें देश की तकदीर बदलने की क्षमता है। पत्र में यह भी कहा गया कि एकता की भावना ही किसी भी योजना या विज़न को साकार करने की नींव होती है।
यादव ने कहा, 'आज हमारा लक्ष्य अपनी अर्थव्यवस्था को सबसे विकसित बनाना है। राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ हमें त्याग करने की ज़रूरत है, भले ही इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमें भूखा ही क्यों न रहना पड़े।'
बुनियादी ढाँचे और UPI की तारीफ
आशुतोष यादव ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और देश में हाईवे तथा रेलवे नेटवर्क के विस्तार को भारत की सबसे बड़ी समकालीन उपलब्धियों में गिना। उनका कहना था कि ये परिवर्तन आम नागरिक के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं और देश की आर्थिक रीढ़ को मज़बूत करते हैं।
कोविड नेतृत्व और वैश्विक चुनौतियाँ
अपने पत्र में आशुतोष ने कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा कि उस संकटकाल में जिस नेतृत्व ने देश में उम्मीद और भरोसा जगाया, वह आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास जताया कि मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत और अधिक सशक्त होकर उभरेगा।
आगे की राह
आशुतोष यादव ने कहा कि यह अनुभव उन्हें और अधिक सक्रिय नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने अन्य युवाओं से भी आह्वान किया कि वे लोकतांत्रिक माध्यमों का उपयोग कर अपनी बात सरकार तक पहुँचाएँ। उनके अनुसार, देश की चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास और राष्ट्रीय एकता ही सबसे बड़ा हथियार है।