22 जुलाई 2026
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करीमनगर में हथियारबंद गिरोह का कहर: 66 तोला सोना और ₹21 लाख नकद लूटे, परिवार को बंधक बनाया

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करीमनगर में हथियारबंद गिरोह का कहर: 66 तोला सोना और ₹21 लाख नकद लूटे, परिवार को बंधक बनाया

सारांश

करीमनगर में तीन महीने के भीतर दूसरी बड़ी लूट — इस बार 8 नकाबपोश लुटेरों ने एक बुजुर्ग परिवार को बंधक बनाकर 66 तोला सोना और ₹21 लाख उड़ा लिए। पीड़ितों के अनुसार लुटेरे उत्तर भारतीय लहजे में बोल रहे थे और उन्हें घर की दिनचर्या की पूर्व जानकारी थी।

मुख्य बातें

करीमनगर के भगत नगर इलाके में मंगलवार रात 8 हथियारबंद नकाबपोश लुटेरों ने घर में घुसकर लूट की वारदात को अंजाम दिया।
लुटेरों ने 66 तोला सोने के आभूषण , ₹21 लाख नकद , 10 तोला चाँदी और दो मोटरसाइकिलें लूट लीं।
मकान मालिक अजमत अली , उनकी पत्नी और दो बेटियों के साथ मारपीट की गई; परिवार को एक कमरे में बंद कर मोबाइल फोन छीन लिए गए।
पीड़ितों के अनुसार लुटेरे उत्तर भारतीय लहजे में हिंदी बोल रहे थे; पुलिस को संदेह है गिरोह वेमुलावाड़ा बाईपास से फरार हुआ।
यह तीन महीने में दूसरी बड़ी लूट है — 3 मई 2026 को पीएमजे ज्वैलरी शॉप में 161 तोला सोना और 112 कैरेट हीरे लूटे गए थे।
पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है; पिछली वारदात में बिहार के सुबोध सिंह गिरोह की संलिप्तता सामने आई थी।

तेलंगाना के करीमनगर कस्बे के भगत नगर इलाके में मंगलवार रात करीब 8 नकाबपोश हथियारबंद लुटेरों के एक गिरोह ने एक घर में घुसकर परिवार के सदस्यों को चाकू और रिवॉल्वर की नोक पर बंधक बना लिया और 66 तोला सोने के आभूषण, ₹21 लाख नकद तथा 10 तोला चाँदी लूट ली। पुलिस के अनुसार यह घटना 22 जुलाई 2026 की रात उस समय हुई जब मकान मालिक अजमत अली सोने से पहले लाइट बंद करने के लिए पहली मंजिल से नीचे उतरे थे।

घटनाक्रम: कैसे हुई वारदात

पुलिस के अनुसार, नकाबपोश लुटेरे उस क्षण घर में दाखिल हुए जब अजमत अली अकेले भूतल पर थे। लुटेरों ने उन्हें दबोचकर मुँह पर टेप चिपका दिया और घर के भीतर खींच ले गए, जहाँ उनकी बेरहमी से पिटाई की गई। इसके बाद अपराधियों ने अली की पत्नी और दो बेटियों के साथ भी मारपीट की। चाकू और रिवॉल्वर से लैस लुटेरों ने परिवार को धमकी दी कि शोर मचाने पर जान से मार दिया जाएगा।

सभी सदस्यों को बाँधने के बाद गिरोह ने घर की तलाशी ली और कीमती सामान समेट लिया। भागने से पहले परिवार के सभी लोगों को एक कमरे में बंद कर दिया गया और उनके मोबाइल फोन भी छीन लिए गए ताकि वे पुलिस या पड़ोसियों से मदद न माँग सकें। भूतल पर खड़ी दो मोटरसाइकिलें भी गिरोह चुराकर ले गया।

लुटेरों की पहचान और भागने का रास्ता

पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि लुटेरे नकाब पहने हुए थे और उत्तर भारतीय लहजे में हिंदी बोल रहे थे। पुलिस को संदेह है कि गिरोह वेमुलावाड़ा बाईपास के रास्ते फरार हुआ। जाँच अधिकारियों का मानना है कि लुटेरों को अजमत अली की दिनचर्या, घर में रखे आभूषणों और नकदी की पूर्व जानकारी थी, और उन्होंने जानबूझकर ऐसे घर को निशाना बनाया जहाँ अधिकतर बुजुर्ग और महिलाएँ रहती हैं।

तीन महीने में दूसरी बड़ी लूट

यह ऐसे समय में आया है जब करीमनगर में पहले से ही बड़ी लूट की घटनाएँ चिंता का विषय बनी हुई हैं। गौरतलब है कि 3 मई 2026 को दिनदहाड़े लुटेरों के एक गिरोह ने पीएमजे ज्वैलरी शॉप में लूटपाट की और गोलीबारी में चार कर्मचारी घायल हो गए थे। उस वारदात में 161 तोला सोने के आभूषण और 112 कैरेट के हीरे लूटे गए थे।

गहन जाँच के बाद पुलिस ने उस मामले में बिहार के कुख्यात सुबोध सिंह गिरोह की संलिप्तता का पता लगाया और गिरोह के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, सुबोध सिंह ने पूर्णिया जेल में रहते हुए ही उस डकैती की योजना बनाई थी। यह गिरोह बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड में कई लूट की वारदातों में शामिल रहा है।

पुलिस की जाँच

करीमनगर पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि संदिग्धों की पहचान के लिए तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। ताज़ा वारदात में उत्तर भारतीय लहजे का उल्लेख और सुनियोजित तरीके से की गई लूट यह संकेत देती है कि जाँच का दायरा राज्य की सीमाओं से परे भी जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अंतरराज्यीय गिरोह जो टोह लेकर कमज़ोर परिवारों को निशाना बनाते हैं। मई की वारदात में बिहार के सुबोध सिंह गिरोह की संलिप्तता और अब उत्तर भारतीय लहजे का उल्लेख यह सवाल उठाता है कि क्या तेलंगाना पुलिस के पास अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क की पर्याप्त खुफिया जानकारी है। पीड़ित परिवार की दिनचर्या और घर में रखी संपत्ति की पूर्व जानकारी यह संकेत देती है कि लुटेरों का स्थानीय नेटवर्क भी हो सकता है — जिसकी जाँच उतनी ही ज़रूरी है जितनी बाहरी गिरोह की।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करीमनगर में क्या लूट हुई और कब?
मंगलवार रात तेलंगाना के करीमनगर के भगत नगर इलाके में 8 हथियारबंद नकाबपोश लुटेरों ने अजमत अली के घर में घुसकर 66 तोला सोने के आभूषण, ₹21 लाख नकद और 10 तोला चाँदी लूट ली। परिवार के सभी सदस्यों के साथ मारपीट की गई और उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया।
लुटेरे कौन थे और क्या पुलिस ने किसी को पकड़ा?
पुलिस के अनुसार अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। पीड़ितों ने बताया कि लुटेरे नकाब पहने थे और उत्तर भारतीय लहजे में हिंदी बोल रहे थे। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और वेमुलावाड़ा बाईपास के रास्ते भागने के संदेह की जाँच कर रही है।
करीमनगर में इससे पहले कब बड़ी लूट हुई थी?
3 मई 2026 को दिनदहाड़े लुटेरों ने पीएमजे ज्वैलरी शॉप में लूटपाट की और गोलीबारी में चार कर्मचारी घायल हुए थे। उस वारदात में 161 तोला सोने के आभूषण और 112 कैरेट के हीरे लूटे गए थे, और बाद में बिहार के कुख्यात सुबोध सिंह गिरोह की संलिप्तता सामने आई थी।
लुटेरों ने इसी घर को क्यों निशाना बनाया?
पुलिस के अनुसार लुटेरों को मकान मालिक की दिनचर्या और घर में रखे आभूषणों व नकदी की पूर्व जानकारी थी। उन्होंने जानबूझकर ऐसे घर को चुना जहाँ अधिकतर बुजुर्ग और महिलाएँ रहती थीं, जो सुनियोजित टोह का संकेत देता है।
सुबोध सिंह गिरोह क्या है और इसका इस मामले से क्या संबंध है?
सुबोध सिंह गिरोह बिहार स्थित एक कुख्यात अंतरराज्यीय आपराधिक गिरोह है, जो बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड में लूट की वारदातों में शामिल रहा है। करीमनगर की मई 2026 की ज्वैलरी शॉप लूट में इस गिरोह की संलिप्तता सामने आई थी; ताज़ा वारदात में इस गिरोह का सीधा संबंध अभी पुलिस जाँच में स्थापित नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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