करीमनगर ज्वेलरी लूट: सुबोध सिंह गैंग के तीन सदस्य गिरफ्तार, जेल से रची थी साजिश

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करीमनगर ज्वेलरी लूट: सुबोध सिंह गैंग के तीन सदस्य गिरफ्तार, जेल से रची थी साजिश

सारांश

बिहार के पूर्णिया जेल में बंद मास्टरमाइंड सुबोध सिंह ने कथित तौर पर जेल के भीतर से ही करीमनगर की ज्वेलरी लूट की साजिश रची — यह अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क की बेबाक चुनौती है। तेलंगाना पुलिस ने तीन सदस्यों को दबोचा, लेकिन 10 आरोपी अभी भी फरार हैं।

मुख्य बातें

3 मई को करीमनगर की पीएमजे ज्वेलरी शॉप में दिनदहाड़े सशस्त्र लूट; चार कर्मचारी गोली लगने से घायल।
लुटेरे 161 तोला सोने के गहने और 112 कैरेट के हीरे लूटकर फरार हुए।
मुख्य आरोपी रघुनाथ करमाकर (आसनसोल, पश्चिम बंगाल) सहित रवीश कुमार और महताब खान गिरफ्तार।
मास्टरमाइंड सुबोध सिंह पूर्णिया जेल में बंद; कथित तौर पर जेल से ही लूट की योजना बनाई।
कुल 13 आरोपियों की पहचान; शेष की तलाश जारी, पुलिस न्यायालय से पूछताछ की अनुमति लेगी।
बरामदगी में ₹51,000 नकद , दो मोबाइल , दो सिम कार्ड और जाली आधार कार्ड शामिल।

तेलंगाना के करीमनगर में 3 मई को पीएमजे ज्वेलरी शॉप में दिनदहाड़े हुई सशस्त्र लूट के मामले में पुलिस ने कुख्यात सुबोध सिंह गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस वारदात में लुटेरों ने गोलीबारी कर चार कर्मचारियों को घायल किया था और 161 तोला सोने के गहने तथा 112 कैरेट के हीरे लूटकर फरार हो गए थे।

मुख्य घटनाक्रम

करीमनगर के पुलिस कमिश्नर गौश आलम ने गुरुवार, 14 मई को पुष्टि की कि इस मामले में कुल 13 आरोपियों की पहचान की जा चुकी है। अब तक गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में मुख्य आरोपी रघुनाथ करमाकर — जो पश्चिम बंगाल के आसनसोल का रहने वाला है और इस वारदात में गैंग का नेतृत्व कर रहा था — शामिल है। इसके अलावा रवीश कुमार और महताब खान को क्रमशः बंगाल और बिहार से पकड़ा गया है।

पुलिस ने आरोपियों के पास से ₹51,000 नकद, दो मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड और कुछ जाली आधार कार्ड बरामद किए हैं।

जेल से रची गई साजिश

पुलिस कमिश्नर गौश आलम के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड सुबोध सिंह है, जो बिहार से अपना गिरोह संचालित करता है और फिलहाल पूर्णिया जेल में बंद है। आरोप है कि उसने जेल के अंदर से ही इस लूट की पूरी योजना बनाई थी। पुलिस ने कहा कि वे उससे पूछताछ के लिए न्यायालय की अनुमति लेंगे।

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने वारदात से दो महीने पहले ही करीमनगर और आसपास के इलाकों — खम्मम, मंचरियाल, पेद्दापल्ली और जगतियाल — में रेकी की थी और अंततः करीमनगर को निशाना बनाया।

वारदात और फरार होने का तरीका

लूट को अंजाम देने में पाँच लुटेरे सीधे तौर पर शामिल थे। वारदात के बाद वे बाइक पर सवार होकर धर्मापुरी में जाकर छिप गए, फिर तीन अलग-अलग गुटों में बंटकर ट्रेन और बस के ज़रिए भाग निकले। इसके अलावा पुलिस ने आठ अन्य सहयोगियों की पहचान की है, जिन्होंने गिरोह को साजो-सामान और लॉजिस्टिक सहायता मुहैया कराई।

गैंग की पृष्ठभूमि

सुबोध सिंह गिरोह बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड में लूट की वारदातों में शामिल रहा है। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, यह गैंग अत्यंत शातिर और पेशेवर ढंग से अपराध को अंजाम देने के लिए कुख्यात है। तेलंगाना में इस प्रकार की सशस्त्र ज्वेलरी लूट की यह पहली घटना बताई जा रही है।

आगे की जांच

पुलिस कमिश्नर गौश आलम ने फरार आरोपियों की पहचान सार्वजनिक करने से इनकार किया, यह कहते हुए कि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। बाकी बचे आरोपियों को पकड़ने के लिए कई टीमें सक्रिय रूप से उनका पीछा कर रही हैं। यह मामला अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क की उस बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है जो जेल के भीतर से बाहर के अपराधों को नियंत्रित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जेल प्रशासन संचार निगरानी में कहाँ चूका। दस आरोपियों का अभी भी फरार होना यह भी बताता है कि अंतरराज्यीय समन्वय तंत्र को और मज़बूत किए जाने की ज़रूरत है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करीमनगर ज्वेलरी लूट में क्या हुआ था?
3 मई को करीमनगर की पीएमजे ज्वेलरी शॉप में सशस्त्र लुटेरों ने घुसकर गोलीबारी की, जिसमें चार कर्मचारी घायल हुए। लुटेरे 161 तोला सोने के गहने और 112 कैरेट के हीरे लूटकर बाइक से फरार हो गए।
सुबोध सिंह गैंग के कौन-से सदस्य गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने रघुनाथ करमाकर (पश्चिम बंगाल, आसनसोल), रवीश कुमार और महताब खान को गिरफ्तार किया है। रघुनाथ करमाकर ने वारदात के दौरान गैंग का नेतृत्व किया था।
सुबोध सिंह कौन है और वह कहाँ है?
सुबोध सिंह इस गिरोह का मास्टरमाइंड है जो बिहार से अपना नेटवर्क चलाता है। वह फिलहाल पूर्णिया जेल में बंद है और कथित तौर पर उसने जेल के भीतर से ही इस लूट की योजना बनाई थी।
इस गैंग ने लूट की योजना कैसे बनाई थी?
जांच के अनुसार, आरोपियों ने वारदात से दो महीने पहले करीमनगर, खम्मम, मंचरियाल, पेद्दापल्ली और जगतियाल में रेकी की थी। वारदात के बाद वे धर्मापुरी में छिपे और फिर तीन गुटों में बंटकर ट्रेन व बस से भाग निकले।
बाकी फरार आरोपियों को कब पकड़ा जाएगा?
पुलिस कमिश्नर गौश आलम के अनुसार, फरार आरोपियों का पीछा करने के लिए कई टीमें लगाई गई हैं। फरार आरोपियों की पहचान जांच की संवेदनशीलता के कारण सार्वजनिक नहीं की गई है। पुलिस मास्टरमाइंड सुबोध सिंह से पूछताछ के लिए न्यायालय की अनुमति भी लेगी।
राष्ट्र प्रेस
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