करीमनगर ज्वेलरी लूट: सुबोध सिंह गैंग के तीन सदस्य गिरफ्तार, जेल से रची थी साजिश
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के करीमनगर में 3 मई को पीएमजे ज्वेलरी शॉप में दिनदहाड़े हुई सशस्त्र लूट के मामले में पुलिस ने कुख्यात सुबोध सिंह गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस वारदात में लुटेरों ने गोलीबारी कर चार कर्मचारियों को घायल किया था और 161 तोला सोने के गहने तथा 112 कैरेट के हीरे लूटकर फरार हो गए थे।
मुख्य घटनाक्रम
करीमनगर के पुलिस कमिश्नर गौश आलम ने गुरुवार, 14 मई को पुष्टि की कि इस मामले में कुल 13 आरोपियों की पहचान की जा चुकी है। अब तक गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में मुख्य आरोपी रघुनाथ करमाकर — जो पश्चिम बंगाल के आसनसोल का रहने वाला है और इस वारदात में गैंग का नेतृत्व कर रहा था — शामिल है। इसके अलावा रवीश कुमार और महताब खान को क्रमशः बंगाल और बिहार से पकड़ा गया है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से ₹51,000 नकद, दो मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड और कुछ जाली आधार कार्ड बरामद किए हैं।
जेल से रची गई साजिश
पुलिस कमिश्नर गौश आलम के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड सुबोध सिंह है, जो बिहार से अपना गिरोह संचालित करता है और फिलहाल पूर्णिया जेल में बंद है। आरोप है कि उसने जेल के अंदर से ही इस लूट की पूरी योजना बनाई थी। पुलिस ने कहा कि वे उससे पूछताछ के लिए न्यायालय की अनुमति लेंगे।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने वारदात से दो महीने पहले ही करीमनगर और आसपास के इलाकों — खम्मम, मंचरियाल, पेद्दापल्ली और जगतियाल — में रेकी की थी और अंततः करीमनगर को निशाना बनाया।
वारदात और फरार होने का तरीका
लूट को अंजाम देने में पाँच लुटेरे सीधे तौर पर शामिल थे। वारदात के बाद वे बाइक पर सवार होकर धर्मापुरी में जाकर छिप गए, फिर तीन अलग-अलग गुटों में बंटकर ट्रेन और बस के ज़रिए भाग निकले। इसके अलावा पुलिस ने आठ अन्य सहयोगियों की पहचान की है, जिन्होंने गिरोह को साजो-सामान और लॉजिस्टिक सहायता मुहैया कराई।
गैंग की पृष्ठभूमि
सुबोध सिंह गिरोह बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड में लूट की वारदातों में शामिल रहा है। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, यह गैंग अत्यंत शातिर और पेशेवर ढंग से अपराध को अंजाम देने के लिए कुख्यात है। तेलंगाना में इस प्रकार की सशस्त्र ज्वेलरी लूट की यह पहली घटना बताई जा रही है।
आगे की जांच
पुलिस कमिश्नर गौश आलम ने फरार आरोपियों की पहचान सार्वजनिक करने से इनकार किया, यह कहते हुए कि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। बाकी बचे आरोपियों को पकड़ने के लिए कई टीमें सक्रिय रूप से उनका पीछा कर रही हैं। यह मामला अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क की उस बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है जो जेल के भीतर से बाहर के अपराधों को नियंत्रित करती है।