अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार: कर्नाटक विधानसभा में उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को कर्नाटक विधानसभा में कन्नड़ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान — दादासाहेब फाल्के पुरस्कार — के लिए चुने जाने पर औपचारिक बधाई दी। राज्य सरकार ने इस अवसर को पूरे कर्नाटक के लिए गर्व का क्षण बताया।
विधानसभा में परमेश्वर के उद्गार
विधानसभा में अपने संबोधन में परमेश्वर ने कहा कि दादासाहेब फाल्के पुरस्कार फिल्म उद्योग का सर्वोच्च सम्मान है और यह प्रत्येक सिने-व्यक्तित्व को सहजता से नहीं मिलता। उन्होंने कहा, 'एक बार भी पुरस्कार जीतना बेहद मुश्किल होता है। अनंत नाग को पाँच बार फिल्म पुरस्कार मिलना उनकी प्रतिभा का प्रमाण है।'
परमेश्वर ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर किसी कलाकार की उपलब्धियों और व्यक्तित्व को पहचानना आधुनिक युग में संपूर्ण फिल्म और कला जगत को और अधिक प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
अनंत नाग की कलात्मक यात्रा
भटकल में जन्मे और बाद में बेंगलुरु में बसे अनंत नाग ने 1970 के दशक में थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में टेलीविजन व सिनेमा में कदम रखा। उन्होंने अपने जीवनकाल में 70 से अधिक नाटकों और 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।
परमेश्वर ने स्मरण दिलाया कि अनंत नाग ने अपने दिवंगत भाई और अभिनेता शंकर नाग के साथ मिलकर कन्नड़ फिल्म उद्योग में एक नई लहर पैदा की — और यह उस दौर में जब डॉ. राजकुमार और विष्णुवर्धन जैसे दिग्गज उद्योग पर छाए हुए थे। अपरंपरागत फिल्मों के ज़रिये अनंत नाग ने एक विशिष्ट पहचान बनाई जो उन्हें भीड़ से अलग करती थी।
राजनीतिक जीवन का संक्षिप्त अध्याय
उपमुख्यमंत्री ने अनंत नाग के राजनीतिक कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्हें 1989-94 के दौरान कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया था। इसके बाद उन्होंने 1994 में मल्लेश्वरम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर जीत हासिल की और राज्य सरकार में मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
परमेश्वर ने कहा कि अनंत नाग का राजनीतिक करियर अपेक्षाकृत छोटा रहा और बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति से विमुख होकर सिनेमा में वापसी की तथा अपनी कलात्मक यात्रा जारी रखी।
कन्नड़ सिनेमा का दूसरा दादासाहेब फाल्के सम्मान
परमेश्वर ने याद दिलाया कि कन्नड़ फिल्म जगत के महानायक डॉ. राजकुमार इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को पाने वाले पहले कन्नड़ कलाकार थे। गौरतलब है कि लगभग 30 वर्षों के अंतराल के बाद, अनंत नाग को यह सम्मान मिला है — जो कन्नड़ सिनेमा के लिए एक और ऐतिहासिक पल है।
अनंत नाग ने कन्नड़ के अलावा कई अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी अभिनय किया और अपने बहुआयामी काम से फिल्म उद्योग को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों में काम कम कर सादगीपूर्ण जीवन अपना लिया था।
आगे की राह
कर्नाटक सरकार की ओर से इस सार्वजनिक अभिनंदन ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य इस पुरस्कार को महज एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गर्व का विषय मानता है। यह सम्मान कन्नड़ कला और संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर और सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है।