72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: राष्ट्रपति मुर्मु ने अनंत नाग को दादासाहब फाल्के से नवाज़ा, केवड़िया में समारोह
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 22 सितंबर 2026 को एकता नगर, केवड़िया, गुजरात में आयोजित भव्य समारोह में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने वयोवृद्ध अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में असाधारण योगदान के लिए वर्ष 2024 का दादासाहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया — जो भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
अनंत नाग को दादासाहब फाल्के: थिएटर और सिनेमा का समन्वय
राष्ट्रपति मुर्मु ने अनंत नाग के अभिनय की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कला थिएटर और सिनेमा के श्रेष्ठ आयामों का समन्वय प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि अनंत नाग अपने सहज, संयत और प्रामाणिक अभिनय के लिए जाने जाते हैं और कलाकारों की भावी पीढ़ियों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
गौरतलब है कि दादासाहब फाल्के पुरस्कार भारत सरकार द्वारा सिनेमा के क्षेत्र में आजीवन योगदान के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है। अनंत नाग ने कन्नड़ और हिंदी सिनेमा में दशकों तक यादगार भूमिकाएँ निभाई हैं।
पुरस्कृत फिल्मों का विश्लेषण
राष्ट्रपति ने इस समारोह में सम्मानित प्रमुख फिल्मों की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि फिल्म 'आर्टिकल 370' देश की एकता से जुड़ी गंभीर चुनौतियों और उनके समाधान का जीवंत विवरण प्रस्तुत करती है। 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' को उन्होंने वीर सावरकर की असाधारण जीवनगाथा को एक कलात्मक श्रद्धांजलि बताया।
फिल्म 'भक्षक' को महिला-सुरक्षा के अत्यंत गंभीर विषय पर समाज को जागृत करने वाली कृति के रूप में सराहा गया। गैर-फीचर फिल्म 'भंगार' को जीवन-मृत्यु और सार्थकता के अनदेखे आयामों को अभिव्यक्त करने के लिए रेखांकित किया गया। विशेष रूप से संथाली फिल्म 'आंगेन' को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किए जाने पर राष्ट्रपति ने कहा कि इससे सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समावेश को बढ़ावा मिला है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में आयोजन का प्रतीकात्मक महत्त्व
राष्ट्रपति मुर्मु ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि यह पुरस्कार समारोह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के प्रांगण में, वॉल ऑफ यूनिटी के समीप आयोजित हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो भारत की एकता के शिल्पकार सरदार वल्लभभाई पटेल स्वयं देश की सांस्कृतिक एकता के इस महोत्सव को आशीर्वाद दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सभी भाषाओं और क्षेत्रों की फिल्मों में भारत की छवि दिखती है — भारत के लोगों के सपने, परम्पराएं, संघर्ष और भविष्य की संभावनाएं इन फिल्मों में जीवंत होती हैं।
ज्यूरी में महिला भागीदारी और फिल्म उद्योग की जिम्मेदारी
राष्ट्रपति ने ज्यूरी सदस्यों की सराहना करते हुए यह सुझाव दिया कि प्रत्येक क्षेत्रीय ज्यूरी में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में महिलाओं का दृष्टिकोण शामिल करने से ही एक समग्र मानवीय दृष्टिकोण संभव होता है।
उन्होंने फिल्म उद्योग से यह भी आग्रह किया कि मज़दूरों, छोटे कलाकारों, सहायकों और संघर्षरत लोगों को सम्मान और सामाजिक सुरक्षा मिले। उन्होंने कहा कि पूरी टीम के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता फिल्म उद्योग की कार्य संस्कृति का अनिवार्य हिस्सा होनी चाहिए।
लोकप्रिय कलाकारों से स्वास्थ्य का संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु ने लोकप्रिय फिल्म कलाकारों की समाज में विशेष भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि जब सफल कलाकार अनुशासित जीवनशैली के फायदों के बारे में बताते हैं, तो करोड़ों बच्चे और युवा उनका अनुकरण करते हैं। उन्होंने लोकप्रिय कलाकारों से आग्रह किया कि वे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का समर्थन न करें। उनके शब्दों में — 'एक सच्चा स्टार वही है जो रोशनी फैलाता है, अंधेरा नहीं।'
यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक विविधता और सिनेमाई उत्कृष्टता के उत्सव के रूप में याद किया जाएगा, और आने वाले वर्षों में भी फिल्म निर्माताओं को सकारात्मक एवं जिम्मेदार सिनेमा की ओर प्रेरित करता रहेगा।