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कर्नाटक कैबिनेट गठन: शिवकुमार और सिद्दारमैया दिल्ली पहुंचे, 3 जून को शपथ ग्रहण की संभावना

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कर्नाटक कैबिनेट गठन: शिवकुमार और सिद्दारमैया दिल्ली पहुंचे, 3 जून को शपथ ग्रहण की संभावना

सारांश

कर्नाटक में सत्ता की बागडोर संभालने से पहले का सबसे अहम दौर शुरू हो गया है — शिवकुमार और सिद्दारमैया एक ही उड़ान से दिल्ली पहुंचे हैं। 10-12 मंत्रियों की सूची लगभग तैयार है, लेकिन तीन उपमुख्यमंत्री पद की मांग और जाति-समुदाय के समीकरण ही असली पेच हैं।

मुख्य बातें

डीके शिवकुमार और सिद्दारमैया 1 जून को एक ही उड़ान से नई दिल्ली पहुंचे, कांग्रेस आलाकमान से कैबिनेट सूची पर चर्चा करेंगे।
पहले चरण में मुख्यमंत्री सहित 10 से 12 मंत्रियों के शपथ ग्रहण की संभावना; समारोह 3 जून को अपेक्षित।
प्रस्तावित सामाजिक संरचना में ओबीसी से 2, एससी से 2, एसटी से 1, वोक्कालिगा से 2, मुस्लिम से 1, लिंगायत से 2 नेताओं को स्थान।
शेष मंत्री पद राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के बाद दूसरे चरण में भरे जाएंगे।
सिद्दारमैया खेमे की ओर से कम से कम तीन उपमुख्यमंत्री नियुक्त करने का दबाव बनाए जाने की संभावना।

कर्नाटक के मनोनीत मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्दारमैया नई कैबिनेट के गठन पर अंतिम मुहर लगवाने के लिए सोमवार, 1 जून को नई दिल्ली पहुंचे। दोनों नेता कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप देंगे। सूत्रों के अनुसार, पहले बैच के मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह 3 जून को आयोजित होने की उम्मीद है।

दिल्ली रवानगी और प्रमुख नेताओं की उपस्थिति

शिवकुमार और सिद्दारमैया एक ही उड़ान से नई दिल्ली पहुंचे। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बेंगलुरु स्थित अपने आवास से दिल्ली के लिए रवाना हो चुके थे। सिद्दारमैया के पुत्र और विधान परिषद सदस्य यतींद्र सिद्दारमैया तथा कई अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी राजधानी पहुंच चुके हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया, शिवकुमार, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल और कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला पहले ही आपस में विचार-विमर्श कर मंत्रियों की प्रारंभिक सूची तैयार कर चुके हैं।

कैबिनेट की संभावित सामाजिक संरचना

सूत्रों ने संकेत दिया कि पहले चरण में मुख्यमंत्री सहित लगभग 10 से 12 मंत्री शामिल होंगे। प्रस्तावित सामाजिक संरचना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से दो, अनुसूचित जाति (एससी) से दो, अनुसूचित जनजाति (एसटी) से एक, वोक्कालिगा समुदाय से दो, मुस्लिम समुदाय से एक और लिंगायत समुदाय से दो नेताओं को स्थान दिए जाने की संभावना है।

यह संरचना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस नेतृत्व जाति और समुदाय-आधारित प्रतिनिधित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है — जो कर्नाटक की बहुलतावादी राजनीति में एक अपरिहार्य रणनीति मानी जाती है।

दो चरणों में कैबिनेट विस्तार की योजना

पार्टी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस नेतृत्व दो चरणों में कैबिनेट विस्तार पर विचार कर रहा है। शेष मंत्री पद राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के बाद भरे जाने की संभावना है। पहले चरण में सिद्दारमैया के समर्थकों को कैबिनेट में बड़ा हिस्सा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया ने कथित तौर पर अपने खेमे से मंत्री पद के इच्छुक नेताओं की एक अलग सूची भी तैयार की है, जिसे वह कांग्रेस आलाकमान को सौंप सकते हैं।

उपमुख्यमंत्री पद को लेकर दबाव

सूत्रों ने यह भी बताया कि सिद्दारमैया की ओर से कर्नाटक में अतिरिक्त उपमुख्यमंत्री पद बनाने के लिए दबाव डाले जाने की संभावना है। उनके आवास पर हुई चर्चाओं के अनुसार, उनके खेमे का मानना है कि सरकार में जाति और समुदाय का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए कम से कम तीन उपमुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने चाहिए।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत के बाद सत्ता-साझेदारी और जाति-प्रतिनिधित्व को लेकर आंतरिक समीकरण साधना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। मंत्रियों की अंतिम सूची को केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही सार्वजनिक किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतनी ही जटिल है सत्ता की आंतरिक बंदरबांट। शिवकुमार और सिद्दारमैया का एक ही उड़ान से दिल्ली जाना एकता का प्रतीक है, लेकिन तीन उपमुख्यमंत्री पद की मांग और सिद्दारमैया खेमे की अलग सूची यह बताती है कि भीतर की खींचतान अभी थमी नहीं है। दो चरणों में कैबिनेट विस्तार की रणनीति व्यावहारिक है, पर इससे असंतुष्ट नेताओं को लंबे समय तक प्रबंधित करने का जोखिम भी बना रहेगा। असली परीक्षा यह होगी कि क्या आलाकमान जाति-समीकरण साधते हुए दोनों खेमों को संतुष्ट कर पाता है — या फिर यह असंतोष राज्य सरकार की स्थिरता के लिए शुरुआती चुनौती बन जाता है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक की नई कैबिनेट का शपथ ग्रहण कब होगा?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों के पहले बैच का शपथ ग्रहण समारोह 3 जून को होने की उम्मीद है। पहले चरण में मुख्यमंत्री सहित लगभग 10 से 12 मंत्री शामिल हो सकते हैं।
कर्नाटक कैबिनेट में किन समुदायों को प्रतिनिधित्व मिलेगा?
प्रस्तावित संरचना में ओबीसी से 2, अनुसूचित जाति से 2, अनुसूचित जनजाति से 1, वोक्कालिगा से 2, मुस्लिम समुदाय से 1 और लिंगायत समुदाय से 2 नेताओं को स्थान दिए जाने की संभावना है। अंतिम सूची कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी के बाद तय होगी।
क्या कर्नाटक में तीन उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे?
सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया खेमे की ओर से कम से कम तीन उपमुख्यमंत्री नियुक्त करने का दबाव बनाए जाने की संभावना है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान के साथ दिल्ली में हुई चर्चा के बाद ही होगा।
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार दो चरणों में क्यों होगा?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, शेष मंत्री पद राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के बाद दूसरे चरण में भरे जाएंगे। यह रणनीति पार्टी को चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रतिनिधित्व संतुलित करने का अवसर देती है।
कांग्रेस आलाकमान कैबिनेट सूची में क्या देखेगा?
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान जिला और समुदायवार प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए सूची की बारीकी से जांच करेगा। के.सी. वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला इस प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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