कर्नाटक कांग्रेस के अल्पसंख्यक नेता उपचुनाव में पार्टी की जीत पर आश्वस्त

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कर्नाटक कांग्रेस के अल्पसंख्यक नेता उपचुनाव में पार्टी की जीत पर आश्वस्त

सारांश

कर्नाटक कांग्रेस के अल्पसंख्यक नेता उपचुनावों में जीत के प्रति आश्वस्त हैं। उन्होंने आंतरिक सर्वेक्षण और जनसमर्थन का हवाला दिया। क्या ये नेता अपनी उम्मीदों में सही साबित होंगे?

Key Takeaways

  • कर्नाटक कांग्रेस के अल्पसंख्यक नेताओं का उपचुनाव में जीत का विश्वास।
  • आंतरिक सर्वेक्षण से मिली सकारात्मक रिपोर्ट।
  • विपक्षी दलों द्वारा गलत सूचना फैलाने के आरोप।
  • अल्पसंख्यक समुदाय का पार्टी के प्रति वफादारी।
  • उम्मीदवार चयन में अल्पसंख्यक नेताओं की सहभागिता।

बेंगलुरु, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक कांग्रेस के अल्पसंख्यक नेताओं ने शुक्रवार को बागलकोट और दावनगेरे उपचुनावों में पार्टी की असाधारण जीत का विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने आंतरिक सर्वेक्षण के परिणामों और सभी वर्गों के मजबूत समर्थन का उल्लेख किया।

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक रिजवान अरशद, यासिर खान पठान, बल्किस बानू, केपीसीसी उपाध्यक्ष सैयद अहमद, वरिष्ठ कांग्रेस नेता उबेदुल्ला शरीफ, आगा सुल्तान, मकांदर, और चांद पाशा सहित कई नेता उपस्थित थे।

बेंगलुरु स्थित केपीसीसी कार्यालय में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सरकार के मुख्य सचेतक और विधान परिषद सदस्य सलीम अहमद ने कहा कि पार्टी के आंतरिक आकलन से स्पष्ट जीत और भारी बहुमत का संकेत मिलता है।

उन्होंने कहा कि दावनगेरे दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र में दिवंगत शमनूर शिवशंकरप्पा द्वारा किए गए विकास कार्यों ने पार्टी की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अहमद ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं के बारे में गलत जानकारी फैलाई है, लेकिन उन्होंने कहा कि मतदाता, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग, पार्टी के प्रति वफादार बने हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की ओर से पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं और मतदाताओं को धन्यवाद दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ वरिष्ठ नेताओं द्वारा पार्टी की संभावनाओं को कमजोर करने के समन्वित प्रयासों के बावजूद, अल्पसंख्यकों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया है। अहमद ने यह भी बताया कि एआईसीसी और केपीसीसी के अध्यक्षों और मुख्यमंत्री सहित पार्टी नेतृत्व इन घटनाक्रमों से अवगत हैं।

उन्होंने आगे कहा कि उम्मीदवारों का चयन अल्पसंख्यक नेताओं से परामर्श के बाद किया गया था, हालांकि बाद में कुछ गलतफहमियां उत्पन्न हो गईं।

विधायक रिजवान अरशद ने कहा कि दावनगेरे उपचुनाव में सभी जातियों, धर्मों और समुदायों के लोग कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन कर रहे थे। उन्होंने भाजपा और एसडीपीआई सहित विपक्षी दलों पर सोशल मीडिया पर झूठी बातें फैलाने का आरोप लगाया कि टिकट वितरण में अल्पसंख्यकों को दरकिनार किया गया है।

अरशद ने स्वीकार किया कि अल्पसंख्यक नेताओं ने अपने समुदाय के उम्मीदवार के लिए टिकट की मांग की थी और पार्टी ने सैद्धांतिक रूप से सहमति दे दी थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी एक उम्मीदवार पर सहमति नहीं बन पाई। एमएलसी अब्दुल जब्बार ने खुद को एक मजबूत दावेदार के रूप में पेश किया था, लेकिन जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से मिली प्रतिक्रिया से उनकी जीत की संभावना को लेकर चिंताएं सामने आईं।

उन्होंने स्वीकार किया कि बिना विकल्प दिए केवल एक नाम पर जोर देने से उन्हें झटका लगा। उन्होंने कहा कि हमें कई नाम सुझाने चाहिए थे या वरिष्ठ नेताओं के साथ बेहतर समन्वय करना चाहिए था। उस चूक का हमें नुकसान हुआ।

Point of View

जो आगामी उपचुनावों में निर्णायक सिद्ध हो सकता है।
NationPress
11/04/2026

Frequently Asked Questions

कर्नाटक में उपचुनाव कब हैं?
कर्नाटक में उपचुनाव 2023 में होने की उम्मीद है, लेकिन सटीक तारीखों की घोषणा अभी बाकी है।
कांग्रेस के अल्पसंख्यक नेताओं ने क्या कहा?
कांग्रेस के अल्पसंख्यक नेताओं ने उपचुनाव में पार्टी की जीत का भरोसा जताया है और सभी समुदायों का समर्थन मिलने की बात की है।
क्या विपक्षी दलों ने गलत जानकारी फैलाई है?
हाँ, कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया है कि विपक्षी दलों ने उनके योजनाओं के बारे में गलत जानकारी फैलाई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने क्या कहा?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि पार्टी की संभावनाओं को कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय का समर्थन मजबूत है।
क्या अल्पसंख्यक नेताओं का टिकट वितरण पर प्रभाव पड़ा?
हाँ, अल्पसंख्यक नेताओं ने टिकट वितरण पर प्रभाव डाला है, लेकिन अंतिम निर्णय पर सहमति नहीं बन पाई।
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