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सिद्धारमैया का ऐलान: 2028 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, 'राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है'

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सिद्धारमैया का ऐलान: 2028 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, 'राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है'

सारांश

79 वर्षीय सिद्धारमैया ने 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान किया — वजह: भ्रष्ट चुनावी व्यवस्था और बढ़ती उम्र। 1978 से शुरू हुई पाँच दशक की राजनीतिक यात्रा का यह बड़ा मोड़ कर्नाटक कांग्रेस के भविष्य पर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 26 जुलाई 2025 को 2028 विधानसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा की।
उन्होंने चुनावी राजनीति को 'पूरी तरह भ्रष्ट' बताया और कहा कि अब नेताओं को ही मतदाताओं को पैसा देना पड़ता है।
वर्तमान आयु 79 वर्ष ; 2028 तक 82 वर्ष होने पर पहले जैसी ऊर्जा संभव नहीं — यह भी प्रमुख कारण।
सिद्धारमैया ने 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में राजनीति शुरू की थी — 2028 तक 50 वर्ष पूरे होंगे।
वरुणा विधानसभा क्षेत्र के लोगों के आग्रह के बावजूद उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला अटल बताया।
चुनावी राजनीति से दूरी के बावजूद सार्वजनिक जीवन और जनसेवा में सक्रिय रहने का संकल्प।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 26 जुलाई 2025 को स्पष्ट कर दिया कि वह 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि मौजूदा चुनावी राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है और ईमानदार राजनेताओं के लिए अब कोई जगह नहीं बची है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह सार्वजनिक जीवन से संन्यास नहीं ले रहे और जनता की आवाज बनकर सक्रिय बने रहेंगे।

मंड्या में कार्यक्रम के बाद एक्स पर साझा किया संबोधन

सिद्धारमैया ने यह बातें मंड्या जिले के के.आर. पेट में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में कही थीं, जिसके बाद उन्होंने अपने संबोधन का विवरण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने लिखा कि वरुणा विधानसभा क्षेत्र के लोग एक बार फिर उनसे चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं, लेकिन उनका फैसला अटल है।

भ्रष्ट चुनावी व्यवस्था पर तीखा प्रहार

पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनावी राजनीति में आए बदलाव पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "पहले जब मैं चुनाव लड़ता था, तब क्षेत्र के लोग ही हमें आर्थिक सहयोग देते थे और हमारी जीत सुनिश्चित करते थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। अब चुनाव लड़ना हो तो नेताओं को ही लोगों को पैसा देना पड़ता है। राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है और ईमानदार राजनीति के लिए कोई जगह नहीं बची है।" यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में मुडा घोटाले सहित कई विवादों के बीच राजनीतिक माहौल पहले से गरमाया हुआ है।

उम्र और स्वास्थ्य भी बड़ा कारण

सिद्धारमैया ने अपनी 79 वर्ष की आयु और स्वास्थ्य को भी इस फैसले का एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि 2028 तक वह 82 वर्ष के हो जाएंगे और मौजूदा सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक पहले जैसी ऊर्जा और क्षमता के साथ काम करना संभव नहीं होगा।

पाँच दशकों की राजनीतिक यात्रा

सिद्धारमैया ने 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा, "2028 तक मेरे राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष पूरे हो जाएंगे। इस दौरान मैंने जीत और हार दोनों देखीं, लेकिन हमेशा अपने सिद्धांतों और अंतरात्मा के अनुसार राजनीति की।" उन्होंने कहा कि पिछले पाँच दशकों में कर्नाटक की जनता ने उन्हें परिवार के सदस्य की तरह स्नेह और समर्थन दिया है, यह ऋण वह कभी नहीं चुका सकते।

जनसेवा जारी रहेगी

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चुनावी राजनीति से दूरी का अर्थ सार्वजनिक जीवन से विदाई नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनका शेष जीवन जनसेवा के लिए समर्पित रहेगा और वह जनता की समस्याओं, अधिकारों तथा मुद्दों को पहले की तरह मजबूती से उठाते रहेंगे। गौरतलब है कि सिद्धारमैया कर्नाटक में कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक माने जाते हैं और उनके इस फैसले का राज्य की राजनीति पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय चुनावी राजनीति की उस बीमारी की स्वीकारोक्ति है जिसे अक्सर नेता सत्ता में रहते हुए नजरअंदाज करते हैं। पाँच दशक की राजनीतिक यात्रा के बाद एक वरिष्ठ नेता का यह कहना कि 'अब नेताओं को ही लोगों को पैसा देना पड़ता है', चुनाव सुधार की बहस को नई धार देता है। कर्नाटक कांग्रेस के लिए यह संकेत भी है कि 2028 में उन्हें एक ऐसे चेहरे की तलाश करनी होगी जो सिद्धारमैया की विरासत और पिछड़े वर्गों में उनके जनाधार को संभाल सके — जो आसान नहीं होगा।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धारमैया ने 2028 विधानसभा चुनाव न लड़ने का फैसला क्यों किया?
सिद्धारमैया ने दो प्रमुख कारण बताए — पहला, चुनावी राजनीति का भ्रष्ट होना जहाँ अब नेताओं को ही मतदाताओं को पैसा देना पड़ता है; दूसरा, उनकी बढ़ती उम्र — 2028 तक वह 82 वर्ष के हो जाएंगे और पहले जैसी ऊर्जा से काम करना संभव नहीं होगा।
क्या सिद्धारमैया पूरी तरह राजनीति छोड़ रहे हैं?
नहीं, सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि वह केवल चुनावी राजनीति से दूर रहेंगे। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे और जनता की समस्याओं, अधिकारों तथा मुद्दों को पहले की तरह उठाते रहेंगे।
सिद्धारमैया ने यह घोषणा कहाँ और कब की?
यह घोषणा 26 जुलाई 2025 को मंड्या जिले के के.आर. पेट में एक निजी कार्यक्रम में की गई, जिसके बाद उन्होंने अपने संबोधन का विवरण एक्स पर साझा किया।
सिद्धारमैया का राजनीतिक करियर कितने वर्षों का रहा है?
सिद्धारमैया ने 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में राजनीति शुरू की थी। 2028 तक उनके राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष पूरे हो जाएंगे, जिसमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में कई कार्यकाल शामिल हैं।
वरुणा विधानसभा क्षेत्र का इस फैसले से क्या संबंध है?
वरुणा विधानसभा क्षेत्र सिद्धारमैया की परंपरागत सीट रही है। स्थानीय लोग उनसे एक बार फिर चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे थे, लेकिन सिद्धारमैया ने स्पष्ट कर दिया कि उनका फैसला अटल है और वह भविष्य में कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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