सिद्धारमैया का ऐलान: 2028 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, 'राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 26 जुलाई 2025 को स्पष्ट कर दिया कि वह 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि मौजूदा चुनावी राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है और ईमानदार राजनेताओं के लिए अब कोई जगह नहीं बची है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह सार्वजनिक जीवन से संन्यास नहीं ले रहे और जनता की आवाज बनकर सक्रिय बने रहेंगे।
मंड्या में कार्यक्रम के बाद एक्स पर साझा किया संबोधन
सिद्धारमैया ने यह बातें मंड्या जिले के के.आर. पेट में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में कही थीं, जिसके बाद उन्होंने अपने संबोधन का विवरण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने लिखा कि वरुणा विधानसभा क्षेत्र के लोग एक बार फिर उनसे चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं, लेकिन उनका फैसला अटल है।
भ्रष्ट चुनावी व्यवस्था पर तीखा प्रहार
पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनावी राजनीति में आए बदलाव पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "पहले जब मैं चुनाव लड़ता था, तब क्षेत्र के लोग ही हमें आर्थिक सहयोग देते थे और हमारी जीत सुनिश्चित करते थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। अब चुनाव लड़ना हो तो नेताओं को ही लोगों को पैसा देना पड़ता है। राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है और ईमानदार राजनीति के लिए कोई जगह नहीं बची है।" यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में मुडा घोटाले सहित कई विवादों के बीच राजनीतिक माहौल पहले से गरमाया हुआ है।
उम्र और स्वास्थ्य भी बड़ा कारण
सिद्धारमैया ने अपनी 79 वर्ष की आयु और स्वास्थ्य को भी इस फैसले का एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि 2028 तक वह 82 वर्ष के हो जाएंगे और मौजूदा सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक पहले जैसी ऊर्जा और क्षमता के साथ काम करना संभव नहीं होगा।
पाँच दशकों की राजनीतिक यात्रा
सिद्धारमैया ने 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा, "2028 तक मेरे राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष पूरे हो जाएंगे। इस दौरान मैंने जीत और हार दोनों देखीं, लेकिन हमेशा अपने सिद्धांतों और अंतरात्मा के अनुसार राजनीति की।" उन्होंने कहा कि पिछले पाँच दशकों में कर्नाटक की जनता ने उन्हें परिवार के सदस्य की तरह स्नेह और समर्थन दिया है, यह ऋण वह कभी नहीं चुका सकते।
जनसेवा जारी रहेगी
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चुनावी राजनीति से दूरी का अर्थ सार्वजनिक जीवन से विदाई नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनका शेष जीवन जनसेवा के लिए समर्पित रहेगा और वह जनता की समस्याओं, अधिकारों तथा मुद्दों को पहले की तरह मजबूती से उठाते रहेंगे। गौरतलब है कि सिद्धारमैया कर्नाटक में कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक माने जाते हैं और उनके इस फैसले का राज्य की राजनीति पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।