काशी में स्थित मां महिषासुर मर्दिनी का अद्वितीय मंदिर: स्वप्नेश्वरी का रूप बदलता है तीन बार

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काशी में स्थित मां महिषासुर मर्दिनी का अद्वितीय मंदिर: स्वप्नेश्वरी का रूप बदलता है तीन बार

सारांश

काशी के मां महिषासुर मर्दिनी के मंदिर में स्वप्नेश्वरी का रूप दिन में तीन बार बदलता है। यह अद्भुत मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है और यहाँ आकर मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। जानिए इस मंदिर की खासियतें और श्रद्धालुओं की कहानी।

Key Takeaways

  • मां महिषासुर मर्दिनी का मंदिर काशी में स्थित है।
  • यहाँ माता का स्वरूप दिन में तीन बार बदलता है।
  • मंदिर की पूजा विधि में 41 दिन तक आरती शामिल है।
  • नवरात्रि में यहाँ विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
  • मंदिर परिसर में अन्य देवताओं के मंदिर भी हैं।

नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में अनेकों प्राचीन मंदिर हैं। इन मंदिरों की महिमा अद्वितीय और चमत्कारी है। काशी के हर कोने में भक्ति और चमत्कार की कहानियाँ बसी हुई हैं। यहाँ अनेकों देवी-देवताओं के मंदिर हैं, जो यहाँ की आस्था को और अधिक गहरा बनाते हैं। इनमें से एक अत्यंत प्राचीन और अद्भुत मंदिर है मां महिषासुर मर्दिनी का, जहाँ माता स्वप्नेश्वरी का स्वरूप दिन में तीन बार परिवर्तित होता है।

यह माता का मंदिर भद्र वन, वर्तमान में भदैनी क्षेत्र में स्थित है। यहाँ की माता को स्वप्नेश्वरी के नाम से भी पूजा जाता है। मंदिर के पुजारी धनंजय पाण्डेय के अनुसार, माता का यह रूप दुर्गा सप्तशती के चौथे अध्याय में वर्णित है, जब उन्होंने महिषासुर का वध किया था। मंदिर की मूर्ति स्वयंभू है और भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करने के लिए जानी जाती है।

पुजारी बताते हैं कि माता का रूप दिन में तीन बार बदलता है। सुबह के समय वे सौम्य और बाल रूप में दिखाई देती हैं, दोपहर में यौवन रूप में और शाम होते ही उनका रौद्र रूप प्रकट हो जाता है। भक्त इस अद्भुत परिवर्तन को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। मां स्वप्नेश्वरी को मालपुआ, दही-बर्फी और नारियल का भोग लगाया जाता है। लाल गुड़हल की माला और श्रृंगार की सामग्री चढ़ाने का विशेष महत्व है।

मान्यता है कि जो भक्त लगातार 41 दिन तक माता की आरती में शामिल होता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। एक और खास मान्यता इस मंदिर से जुड़ी है। जो भक्त रात भर मंदिर में रहकर माता की आराधना करता है और वहीं सोता है, माता उसके सपनों में आकर मनोकामना पूरी होने का संकेत देती हैं। इसी वजह से उन्हें स्वप्नेश्वरी कहा जाता है।

काशी के इस अनोखे मंदिर में मां महिषासुर मर्दिनी न केवल महिषासुर का संहार करने वाली शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं, बल्कि भक्तों के सपनों में आकर उनका मार्गदर्शन करने वाली मां के रूप में भी जानी जाती हैं। भक्तों का मानना है कि यहाँ आने से मन की सारी मुरादें पूरी होती हैं।

मंदिर परिसर में भैरव बाबा, भोलेनाथ, हनुमान जी और गणेश भगवान के भी छोटे मंदिर हैं। नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष भीड़ देखने को मिलती है। महिलाएं कीर्तन-भजन करती हैं और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। नवमी के दिन भंडारा आयोजित होता है और भक्तों को प्रसाद बांटा जाता है।

श्रद्धालु प्रभुनाथ त्रिपाठी बताते हैं कि मां महिषासुर मर्दिनी कृपालु हैं। उनके दर्शन मात्र से भक्तों को शांति और बल मिलता है। महिषासुर नामक राक्षस का वध करने वाली माता का एक और नाम 'स्वप्नेश्वरी' देवी है। इसके पीछे की मान्यता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, "महिषासुर मर्दिनी का दर्शन करने का सौभाग्य भक्तों को मिलता आया है। माता बहुत कृपालु हैं। शक्ति के इस रूप का एक और नाम 'स्वप्नेश्वरी' भी है। मान्यता है कि जो भी भक्त दिन-रात मंदिर में रहकर माता की आराधना करता है और रात्रि में वहीं पर शयन करता है, माता उसके स्वप्न में आती हैं और मांगी गई मनोकामना के बारे में बताती हैं।"

मंदिर सेवा समिति के उपाध्यक्ष राकेश त्रिपाठी कहते हैं कि पूरे वर्ष भक्तों की अच्छी खासी भीड़ रहती है, लेकिन नवरात्रि में मंदिर में अलग ही ऊर्जा और भक्ति का माहौल छा जाता है। यह प्राचीन मंदिर वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर दूर लोलार्क कुंड क्षेत्र में स्थित है। यहाँ पहुंचने के लिए ऑटो, रिक्शा या कैब आसानी से उपलब्ध हैं।

Point of View

NationPress
09/04/2026

Frequently Asked Questions

मां महिषासुर मर्दिनी का मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर काशी के भदैनी क्षेत्र में स्थित है।
मंदिर में माता का स्वरूप कितनी बार बदलता है?
माता का स्वरूप दिन में तीन बार बदलता है।
क्या विशेष पूजा विधि है इस मंदिर में?
यहां भक्त 41 दिन तक माता की आरती में शामिल होकर मनोकामना पूरी करने की मान्यता रखते हैं।
मंदिर में कौन-कौन से अन्य देवताओं के मंदिर हैं?
मंदिर परिसर में भैरव बाबा, भोलेनाथ, हनुमान जी और गणेश भगवान के छोटे मंदिर भी हैं।
नवरात्रि के दौरान यहाँ क्या विशेष होता है?
नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष भीड़ होती है और भंडारे का आयोजन किया जाता है।
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