3 अगस्त 2026
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कश्मीर में ओलावृष्टि और आंधी का कहर: सोपोर में छतें उड़ीं, सेब-धान की फसलें तबाह

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कश्मीर में ओलावृष्टि और आंधी का कहर: सोपोर में छतें उड़ीं, सेब-धान की फसलें तबाह

सारांश

कश्मीर घाटी में 16 जून को आई आंधी और ओलावृष्टि ने सोपोर में घरों की छतें उड़ा दीं और सेब के बागों व धान की नर्सरियों को भारी नुकसान पहुंचाया। मौसम विभाग ने कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है।

मुख्य बातें

16 जून 2026 को कश्मीर घाटी में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से सोपोर में कई घरों की छतें उड़ गईं।
श्रीनगर के बाहरी इलाके निशार समेत घाटी के कई हिस्सों में ओले गिरे।
घाटी के उत्तर और दक्षिण में सेब के बागों , सब्जियों और धान की नर्सरियों को भारी नुकसान।
मौसम विभाग ने कुपवाड़ा, बारामूला, बांदीपोरा, गांदरबल, बड़गाम और दक्षिण कश्मीर में अचानक बाढ़ व भूस्खलन की चेतावनी जारी की।
डल झील समेत सभी जल निकायों में नौकायन पर रोक की सलाह; पर्यटकों को सतर्क रहने का निर्देश।
श्रीनगर में तापमान रिकॉर्ड 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा; ग्लोबल वार्मिंग और शहरीकरण को ज़िम्मेदार माना जा रहा है।

कश्मीर घाटी में 16 जून 2026 को मंगलवार शाम तेज आंधी, भारी बारिश और ओलावृष्टि ने जमकर तांडव मचाया, जिसके चलते सोपोर इलाके में कई घरों की छतें उड़ गईं और घाटी के उत्तरी व दक्षिणी हिस्सों में सेब के बागों को भारी नुकसान पहुंचा। श्रीनगर के बाहरी इलाके निशार समेत घाटी के कई हिस्सों में ओले गिरे और बिजली कड़की।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार शाम घाटी में एकाएक मौसम बिगड़ा और तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान, बारिश और ओलावृष्टि का सिलसिला शुरू हुआ। सोपोर में तेज हवाओं की रफ्तार इतनी अधिक रही कि कई घरों की छतें उखड़ गईं। श्रीनगर के बाहरी इलाके निशार में भी ओलावृष्टि दर्ज की गई। पिछले एक सप्ताह से घाटी में मौसम का मिजाज अस्थिर बना हुआ है।

कृषि को नुकसान

ओलावृष्टि से घाटी के दक्षिण और उत्तर कश्मीर में सेब के बागों को भारी क्षति पहुंची है। इसके अलावा सब्जियों की फसल और धान की नर्सरियों को भी नुकसान हुआ है — वे नर्सरियाँ जिन्हें खेतों में रोपाई के लिए तैयार किया गया था। यह नुकसान ऐसे समय में हुआ है जब घाटी के किसान पहले से ही अस्थिर मौसम की मार झेल रहे हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी

स्थानीय मौसम विभाग ने कुपवाड़ा, बारामूला, बांदीपोरा, गांदरबल, बड़गाम के कई हिस्सों, सोनमर्ग-बालटाल और पहलगाम रूट तथा दक्षिण कश्मीर के कुछ इलाकों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का पूर्वानुमान पहले ही जारी किया था। विभाग ने यह भी आगाह किया था कि कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ बिजली कड़कने और तेज हवाओं की संभावना है।

मौसम विभाग ने एक एडवाइजरी जारी कर लोगों से कहा है कि वे आंधी-तूफान और बिजली कड़कने के दौरान घर के अंदर रहें और ढीले-ढाले ढाँचों, बिजली के तारों व खंभों तथा पुराने पेड़ों से दूर रहें। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को डल झील समेत सभी जल निकायों में नौकायन और शिकारा सवारी से बचने की सलाह दी गई है।

आम जनता पर असर

एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि कुपवाड़ा, बारामूला, बांदीपोरा और दक्षिण कश्मीर के कुछ इलाकों में भारी ओलावृष्टि के साथ अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। यह चेतावनी उन पर्यटकों के लिए विशेष रूप से अहम है जो इस मौसम में घाटी में बड़ी संख्या में आते हैं।

बदलता मौसम: गहरी चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार, कश्मीर घाटी की पारंपरिक समशीतोष्ण जलवायु में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव आया है। श्रीनगर में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ग्लोबल वार्मिंग, वनों की कटाई और तेज़ी से हो रहे शहरीकरण के संयुक्त प्रभाव से वातावरण में नमी और अस्थिरता बढ़ी है, जिसके परिणामस्वरूप अचानक ओलावृष्टि और आंधी-तूफान की घटनाएँ अधिक बार और अधिक तीव्रता से हो रही हैं। यह प्रवृत्ति घाटी के कृषि क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक खतरे का संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कश्मीर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, हर साल इस तरह के नुकसान झेल रहा है — लेकिन किसानों के लिए कोई दीर्घकालिक मुआवज़ा या जलवायु-अनुकूल कृषि नीति अभी तक ज़मीन पर नहीं उतरी है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कश्मीर के सोपोर में 16 जून को क्या हुआ?
16 जून 2026 को मंगलवार शाम कश्मीर घाटी में आई तेज आंधी और ओलावृष्टि के कारण सोपोर इलाके में कई घरों की छतें उड़ गईं। श्रीनगर के बाहरी इलाके निशार में भी ओलावृष्टि दर्ज की गई।
ओलावृष्टि से कश्मीर की किन फसलों को नुकसान हुआ?
ओलावृष्टि से घाटी के उत्तर और दक्षिण कश्मीर में सेब के बागों को भारी क्षति पहुंची है। इसके अलावा सब्जियों की फसल और खेतों में रोपाई के लिए तैयार धान की नर्सरियाँ भी बर्बाद हुई हैं।
मौसम विभाग ने कश्मीर में कौन-सी चेतावनियाँ जारी की हैं?
स्थानीय मौसम विभाग ने कुपवाड़ा, बारामूला, बांदीपोरा, गांदरबल और बड़गाम समेत दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में भारी बारिश, ओलावृष्टि और अचानक बाढ़ व भूस्खलन की चेतावनी जारी की है। डल झील समेत सभी जल निकायों में नौकायन से बचने की सलाह भी दी गई है।
कश्मीर में मौसम इतना अस्थिर क्यों हो गया है?
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग, वनों की कटाई और तेज़ी से हो रहे शहरीकरण के कारण घाटी की पारंपरिक समशीतोष्ण जलवायु बदल रही है। श्रीनगर में तापमान रिकॉर्ड 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, और गर्म हवा में अधिक नमी के कारण वातावरण में भारी अस्थिरता पैदा होती है जो अचानक ओलावृष्टि और आंधी के रूप में सामने आती है।
आंधी-तूफान के दौरान कश्मीर में लोगों को क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
मौसम विभाग की एडवाइजरी के अनुसार, आंधी-तूफान और बिजली कड़कने के दौरान घर के अंदर रहें और ढीले-ढाले ढाँचों, बिजली के तारों व पुराने पेड़ों से दूर रहें। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को किसी भी जल निकाय में नौकायन या शिकारा सवारी से बचने की सलाह दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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