कश्मीर में ओलावृष्टि और आंधी का कहर: सोपोर में छतें उड़ीं, सेब-धान की फसलें तबाह
सारांश
मुख्य बातें
कश्मीर घाटी में 16 जून 2026 को मंगलवार शाम तेज आंधी, भारी बारिश और ओलावृष्टि ने जमकर तांडव मचाया, जिसके चलते सोपोर इलाके में कई घरों की छतें उड़ गईं और घाटी के उत्तरी व दक्षिणी हिस्सों में सेब के बागों को भारी नुकसान पहुंचा। श्रीनगर के बाहरी इलाके निशार समेत घाटी के कई हिस्सों में ओले गिरे और बिजली कड़की।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार शाम घाटी में एकाएक मौसम बिगड़ा और तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान, बारिश और ओलावृष्टि का सिलसिला शुरू हुआ। सोपोर में तेज हवाओं की रफ्तार इतनी अधिक रही कि कई घरों की छतें उखड़ गईं। श्रीनगर के बाहरी इलाके निशार में भी ओलावृष्टि दर्ज की गई। पिछले एक सप्ताह से घाटी में मौसम का मिजाज अस्थिर बना हुआ है।
कृषि को नुकसान
ओलावृष्टि से घाटी के दक्षिण और उत्तर कश्मीर में सेब के बागों को भारी क्षति पहुंची है। इसके अलावा सब्जियों की फसल और धान की नर्सरियों को भी नुकसान हुआ है — वे नर्सरियाँ जिन्हें खेतों में रोपाई के लिए तैयार किया गया था। यह नुकसान ऐसे समय में हुआ है जब घाटी के किसान पहले से ही अस्थिर मौसम की मार झेल रहे हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी
स्थानीय मौसम विभाग ने कुपवाड़ा, बारामूला, बांदीपोरा, गांदरबल, बड़गाम के कई हिस्सों, सोनमर्ग-बालटाल और पहलगाम रूट तथा दक्षिण कश्मीर के कुछ इलाकों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का पूर्वानुमान पहले ही जारी किया था। विभाग ने यह भी आगाह किया था कि कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ बिजली कड़कने और तेज हवाओं की संभावना है।
मौसम विभाग ने एक एडवाइजरी जारी कर लोगों से कहा है कि वे आंधी-तूफान और बिजली कड़कने के दौरान घर के अंदर रहें और ढीले-ढाले ढाँचों, बिजली के तारों व खंभों तथा पुराने पेड़ों से दूर रहें। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को डल झील समेत सभी जल निकायों में नौकायन और शिकारा सवारी से बचने की सलाह दी गई है।
आम जनता पर असर
एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि कुपवाड़ा, बारामूला, बांदीपोरा और दक्षिण कश्मीर के कुछ इलाकों में भारी ओलावृष्टि के साथ अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। यह चेतावनी उन पर्यटकों के लिए विशेष रूप से अहम है जो इस मौसम में घाटी में बड़ी संख्या में आते हैं।
बदलता मौसम: गहरी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, कश्मीर घाटी की पारंपरिक समशीतोष्ण जलवायु में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव आया है। श्रीनगर में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ग्लोबल वार्मिंग, वनों की कटाई और तेज़ी से हो रहे शहरीकरण के संयुक्त प्रभाव से वातावरण में नमी और अस्थिरता बढ़ी है, जिसके परिणामस्वरूप अचानक ओलावृष्टि और आंधी-तूफान की घटनाएँ अधिक बार और अधिक तीव्रता से हो रही हैं। यह प्रवृत्ति घाटी के कृषि क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक खतरे का संकेत है।