जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश-ओलावृष्टि की चेतावनी: अमरनाथ मार्ग समेत कई जिलों में अलर्ट, डल झील पर नौकायन बंद
सारांश
मुख्य बातें
मौसम विभाग के श्रीनगर केंद्र ने 16 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर के लिए व्यापक मौसम चेतावनी जारी की है, जिसमें अगले कुछ घंटों में कई जिलों में तेज बारिश, ओलावृष्टि, बिजली गिरने और आंधी की आशंका जताई गई है। अमरनाथ यात्रा मार्ग सहित कश्मीर घाटी के अनेक संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा भी बताया गया है।
किन जिलों पर है सबसे अधिक खतरा
ताज़ा चेतावनी के अनुसार कुपवाड़ा, बारामुला, बांदीपोरा, गांदरबल और बडगाम के कई हिस्सों में अगले 2 से 3 घंटों के भीतर मौसम अचानक बिगड़ सकता है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की प्रबल संभावना है।
सोनमर्ग–बालटाल–पवित्र गुफा (अमरनाथ) मार्ग और पहलगाम–पवित्र गुफा मार्ग पर भी बौछारों के साथ मौसम खराब होने की आशंका जताई गई है। दक्षिण कश्मीर और त्राल क्षेत्र में भी कई स्थानों पर बारिश और गरज-चमक का अनुमान है।
पहले जारी की गई चेतावनी का दायरा
इससे पहले विभाग ने बारामुला, बडगाम, पुंछ, राजौरी, रामबन, किश्तवाड़, रियासी, कठुआ और जम्मू सहित कई क्षेत्रों में अगले 5 घंटों तक तेज बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई थी। श्रीनगर, पुलवामा, शोपियां और कुलगाम के कुछ हिस्सों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश की चेतावनी दी गई थी।
मौसम विभाग की सलाह और सावधानियाँ
मौसम विभाग ने नागरिकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गरज-चमक और बिजली गिरने के दौरान घर के अंदर रहें और ढीली संरचनाओं, बिजली के खंभों, तारों तथा पुराने पेड़ों से दूरी बनाए रखें। अगले 3 घंटों तक डल झील सहित सभी जल निकायों पर शिकारा और नौका संचालन पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने यह भी चेताया है कि ओलावृष्टि के साथ तेज बारिश से अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और भूस्खलन की आशंका बनी हुई है, इसलिए पहाड़ी और नदी किनारे के क्षेत्रों में रहने वाले लोग विशेष सतर्कता बरतें।
आगामी दिनों का मौसम पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार 16-17 जून को जम्मू-कश्मीर में सामान्यतः बादल छाए रहेंगे और कई स्थानों पर हल्की बारिश, गरज-चमक व तेज हवाएं चलने की संभावना है। 18 से 22 जून के दौरान भी मौसम अस्थिर बना रहेगा — बीच-बीच में हल्की बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं के दौर आ सकते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब अमरनाथ यात्रा का सीज़न चल रहा है और हज़ारों श्रद्धालु संवेदनशील पर्वतीय मार्गों पर हैं। प्रशासन से अपेक्षा है कि यात्रा मार्गों पर स्थिति की लगातार निगरानी की जाए और ज़रूरत पड़ने पर आवाजाही अस्थायी रूप से रोकी जाए।