मध्य प्रदेश में अगले 24 घंटे भारी: ओलावृष्टि, गरज और 60 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं का अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 5 मई 2026 को जारी बुलेटिन में चेतावनी दी है कि मध्य प्रदेश के दर्जनों जिलों में अगले 24 घंटों के भीतर गरज, बिजली, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का सामना करना पड़ सकता है। हवा की रफ्तार कुछ क्षेत्रों में 60 किमी प्रति घंटे तक पहुँचने का अनुमान है, जिससे खड़ी फसलों, पशुओं और नाजुक संरचनाओं को नुकसान की आशंका जताई गई है।
किन जिलों में सबसे अधिक खतरा
सिवनी, बालाघाट, मंडला, कान्हा, दिंडोरी, अनूपपुर, अमरकंटक, दक्षिण उमरिया, दक्षिण शहडोल, पूर्वी ग्वालियर और भिंड में मध्यम गरज के साथ बिजली और ओलावृष्टि की संभावना है। इन क्षेत्रों में हवा की गति 60 किमी प्रति घंटे तक पहुँच सकती है।
मुरैना, पश्चिम ग्वालियर, दतिया, उत्तर उमरिया, उत्तर शहडोल, छतरपुर, दक्षिण सीधी और दक्षिण शहडोल में शाम के समय हल्की गरज के साथ बिजली गिरने की संभावना है।
तेज हवाओं की चपेट में आने वाले जिले
IMD के बुलेटिन के अनुसार, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, बड़वानी, धार, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, रीवा, सतना, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, पन्ना, सागर और अन्य जिलों के कुछ हिस्सों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएँ चल सकती हैं।
इंदौर, शाजापुर, जबलपुर, मंडला, उमरिया, डिंडोरी, कटनी और दमोह में 40-50 किमी प्रति घंटे की हवाओं का अनुमान है। खंडवा, खरगोन, दतिया, सिंगरौली, सीधी, शहडोल, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में ओलावृष्टि की विशेष संभावना बताई गई है।
किसानों और नागरिकों के लिए सलाह
IMD के बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि ओलावृष्टि से खड़ी फसलों, फलों, सब्जियों और नाजुक इमारतों को नुकसान पहुँच सकता है। किसानों को फसलों को ढकने या जहाँ संभव हो, समय से पहले कटाई करने जैसे सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने और वाहनों को ढककर रखने की भी हिदायत दी गई है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे आंधी-तूफान के दौरान घर के अंदर रहें, बिजली के उपकरणों को अनप्लग करें और पेड़ों या बिजली की तारों के नजदीक शरण लेने से बचें।
मौसमी कारण और आगे की स्थिति
IMD के अनुसार, कश्मीर और आसपास के क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में सक्रिय है, जिसके निम्न दबाव क्षेत्र हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक फैले हुए हैं। इन मौसमी प्रणालियों के कारण 9 मई तक राज्य भर में तूफानी गतिविधियाँ जारी रहने की संभावना है।
इसके अलावा, पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 10 मई से एक नए पश्चिमी विक्षोभ के आने का अनुमान है, जिसका असर उत्तरी भारत के मौसम पर भी पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के किसान रबी फसल की कटाई के अंतिम चरण में हैं, जिससे नुकसान की आशंका और बढ़ जाती है।