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24वीं कैग रिपोर्ट में ₹3,500 करोड़ की अनियमितता, केजरीवाल सरकार पर जीएसटी चोरी में मिलीभगत का आरोप

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24वीं कैग रिपोर्ट में ₹3,500 करोड़ की अनियमितता, केजरीवाल सरकार पर जीएसटी चोरी में मिलीभगत का आरोप

सारांश

दिल्ली की भाजपा सरकार ने 24वीं कैग रिपोर्ट के जरिए AAP पर सबसे बड़ा वित्तीय हमला बोला है। ₹3,500 करोड़ की अनियमितता, ₹70,410 करोड़ का बकाया जीएसटी और 6.10 करोड़ ई-वे बिल में से सिर्फ 70 पर कार्रवाई — ये आँकड़े केजरीवाल सरकार के कथित कुशासन की तस्वीर खींचते हैं।

मुख्य बातें

24वीं कैग रिपोर्ट ( 31 मार्च 2023 तक) में ₹3,500 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताएँ दर्ज।
दिल्ली का ₹70,410 करोड़ जीएसटी बकाया था; 65% राशि पाँच साल से अधिक समय से वसूल नहीं हुई।
8,334 रद्द-पंजीकरण वाले करदाताओं ने ₹68,680 करोड़ के ई-वे बिल जनरेट किए।
4,076 गैर-फाइलर्स ने ₹11,635 करोड़ के ई-वे बिल बनाए।
6.10 करोड़ ई-वे बिल में से केवल 70 मामलों (~0.10%) में कार्रवाई हुई।
मंत्री प्रवेश वर्मा का आरोप — रिश्वत और वसूली के लिए जानबूझकर कार्रवाई नहीं की गई।

दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने 9 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस में 24वीं कैग रिपोर्ट के हवाले से पिछली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, 31 मार्च 2023 तक की इस रिपोर्ट में ₹3,500 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताएँ दर्ज हैं। वर्मा ने इसे पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार का लिखित प्रमाण बताया।

कैग रिपोर्ट में क्या सामने आया

प्रवेश वर्मा ने बताया कि कैग के अनुसार दिल्ली की जनता का ₹70,410 करोड़ का जीएसटी बकाया था, जिसमें से 65 प्रतिशत राशि पाँच वर्षों से अधिक समय से वसूल नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जीएसटी विभाग ने बकायेदार उद्योगपतियों के साथ सांठगांठ की और उनकी देनदारियाँ वर्षों तक लंबित रहने दी।

रिपोर्ट के अनुसार, 8,334 करदाताओं का जीएसटी पंजीकरण रद्द हो चुका था, फिर भी उन्होंने ₹68,680 करोड़ के ई-वे बिल जनरेट किए। इसके अलावा, 4,076 ऐसे लोग थे जो टैक्स रिटर्न नहीं भरते थे, लेकिन उन्होंने ₹11,635 करोड़ के ई-वे बिल बनाए।

कार्रवाई में भारी लापरवाही का आरोप

मंत्री वर्मा ने कहा कि कुल 6.10 करोड़ ई-वे बिल जनरेट हुए, जिनमें से केवल 70 मामलों में — यानी लगभग 0.10 प्रतिशत में — ही कार्रवाई की गई। उनका आरोप है कि सरकार के पास पूरे आँकड़े उपलब्ध थे, फिर भी जानबूझकर कार्रवाई से परहेज किया गया। वर्मा के अनुसार, यह निष्क्रियता कथित तौर पर रिश्वत वसूलने और कारोबारियों को डरा-धमकाकर उगाही करने के लिए अपनाई गई नीति थी।

भाजपा सरकार का ऑडिट अभियान

प्रवेश वर्मा ने यह भी दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार बनने के बाद डेढ़ वर्ष में 24 कैग रिपोर्टें प्रस्तुत की जा चुकी हैं, जबकि AAP के कार्यकाल में ऑडिट प्रक्रिया को ठप रखा गया था। उनके अनुसार, हर रिपोर्ट में सैकड़ों से हजारों करोड़ रुपये की अनियमितताएँ उजागर हुई हैं। यह 24वीं रिपोर्ट विधानसभा के मानसून सत्र में पेश की गई।

AAP पर सीधा निशाना

वर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके मंत्री और जीएसटी विभाग के अधिकारी — सभी को इन अनियमितताओं की जानकारी थी। उनके अनुसार, टैक्स चोरी की जानकारी होने के बावजूद जानबूझकर आँखें मूँद ली गईं। गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब AAP पहले से ही कई विवादों में घिरी है और दिल्ली में विपक्ष की भूमिका में है।

आगे क्या

कैग रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी या विभागीय कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। AAP की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिल्ली की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोष नहीं तय करता। ₹70,410 करोड़ का बकाया जीएसटी और 0.10% मामलों में कार्रवाई — ये आँकड़े प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करते हैं, पर 'रिश्वत के लिए जानबूझकर छोड़ा' — यह दावा अभी भी केवल भाजपा मंत्री का बयान है, जिसे न्यायिक या जाँच एजेंसी की पुष्टि मिलनी बाकी है। AAP की चुप्पी इस समय उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

24वीं कैग रिपोर्ट में दिल्ली को लेकर क्या सामने आया?
31 मार्च 2023 तक की इस रिपोर्ट में ₹3,500 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताएँ दर्ज हैं। इसमें जीएसटी वसूली में भारी चूक, रद्द पंजीकरण वाले करदाताओं द्वारा ई-वे बिल जनरेशन और कार्रवाई में घोर लापरवाही के मामले शामिल हैं।
दिल्ली में जीएसटी बकाया कितना था और वसूली क्यों नहीं हुई?
कैग रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली का ₹70,410 करोड़ का जीएसटी बकाया था, जिसमें से 65% राशि पाँच वर्षों से अधिक समय से लंबित थी। मंत्री प्रवेश वर्मा का आरोप है कि जीएसटी विभाग ने बकायेदार उद्योगपतियों से कथित सांठगांठ की, जिससे वसूली जानबूझकर टाली जाती रही।
रद्द जीएसटी पंजीकरण के बावजूद ई-वे बिल कैसे बने?
रिपोर्ट के अनुसार 8,334 ऐसे करदाता जिनका जीएसटी पंजीकरण रद्द हो चुका था, उन्होंने ₹68,680 करोड़ के ई-वे बिल जनरेट किए। इसके अलावा 4,076 गैर-फाइलर्स ने ₹11,635 करोड़ के ई-वे बिल बनाए, जो प्रणालीगत निगरानी की विफलता को दर्शाता है।
6.10 करोड़ ई-वे बिल में से कितने पर कार्रवाई हुई?
मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार 6.10 करोड़ ई-वे बिल में से केवल 70 मामलों — यानी लगभग 0.10% — में ही कार्रवाई की गई। उनका आरोप है कि सरकार के पास पूरे आँकड़े होने के बावजूद जानबूझकर निष्क्रियता बरती गई।
भाजपा सरकार ने AAP के कार्यकाल में कितनी कैग रिपोर्टें पेश की हैं?
मंत्री वर्मा के अनुसार भाजपा सरकार बनने के बाद डेढ़ वर्ष में 24 कैग रिपोर्टें विधानसभा में पेश की जा चुकी हैं। उनका दावा है कि AAP शासन में ऑडिट प्रक्रिया को ठप रखा गया था और अब हर रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएँ सामने आ रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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