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क्या केरल हाईकोर्ट ने केआईआईएफबी मसाला बॉंड मामले में सीएम को राहत दी?

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क्या केरल हाईकोर्ट ने केआईआईएफबी मसाला बॉंड मामले में सीएम को राहत दी?

सारांश

केरल हाईकोर्ट ने केआईआईएफबी मसाला बॉंड मामले में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को अंतरिम राहत देते हुए ईडी के नोटिस पर रोक लगाई है। जानिए इस मामले की पूरी कहानी और राजनीतिक पहलुओं को।

मुख्य बातें

केरल हाईकोर्ट ने ईडी के नोटिस पर रोक लगाई।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को राहत मिली।
मसाला बॉंड से 2,672 करोड़ रुपए जुटाए गए।
ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक प्रेरणा का आरोप।
केआईआईएफबी ने नियमों का पालन करने का दावा किया।

कोच्चि, 18 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) द्वारा मसाला बॉंड के माध्यम से धन जुटाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जारी नोटिस पर रोक लगा दी। इससे मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को अंतरिम राहत मिली।

यह राहत मुख्यमंत्री के हाईकोर्ट जाने के एक दिन बाद प्राप्त हुई, जिसमें उन्होंने ईडी के उन नोटिसों को चुनौती दी थी, जिनमें विदेशी फंड जुटाने की प्रक्रिया में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।

अंतरिम आदेश न केवल मुख्यमंत्री बल्कि इसाक, अब्राहम और केआईआईएफबी को भी सुरक्षा प्रदान करता है, जिन्हें हाल ही में केंद्रीय एजेंसी द्वारा नोटिस जारी किए गए थे।

अपनी याचिका में विजयन ने एफईएमए के प्रावधानों के किसी भी उल्लंघन से स्पष्ट इनकार किया है और उन्हें तथा केआईआईएफबी को जारी किए गए नोटिस को रद्द करने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ईडी की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है।

राज्य सरकार और केआईआईएफबी ने मौजूदा कानूनों और नियामक मानदंडों का पूरी तरह से पालन करते हुए मसाला बॉंड जुटाए और उनका उपयोग किया।

यह कानूनी संघर्ष इस सप्ताह की शुरुआत में तब और तेज हो गया जब ईडी ने हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच में केआईआईएफबी के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने वाले सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी।

जस्टिस वी.जी. अरुण ने केआईआईएफबी की रिट याचिका स्वीकार करते हुए ईडी के कारण बताओ नोटिस पर तीन महीने की रोक लगा दी और कहा कि उठाए गए मुद्दे विस्तृत न्यायिक जांच के योग्य हैं।

ईडी ने तर्क दिया है कि सिंगल बेंच ने रोक लगाने में अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है और इसे रद्द करने की मांग की है। एजेंसी के अनुसार, फंड के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।

मसाला बॉंड के जरिए जुटाए गए 2,672 करोड़ रुपए में से, कथित तौर पर 467 करोड़ रुपए जमीन अधिग्रहण के लिए इस्तेमाल किए गए थे। केआईआईएफबी ने इस पर जवाब देते हुए कहा है कि जमीन अधिग्रहण इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का एक आवश्यक हिस्सा है और फंड का उपयोग पूरी तरह से विकास के उद्देश्य से किया गया था।

मुख्यमंत्री विजयन की याचिका में आगे कहा गया है कि विदेशी कर्ज से जुड़े रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सभी नियमों का पालन किया गया था और किसी भी स्तर पर विदेशी मुद्रा नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना होगा कि केरल हाईकोर्ट का यह निर्णय न केवल मुख्यमंत्री के लिए राहत का संकेत है, बल्कि यह भारतीय न्यायिक प्रणाली की मजबूती को भी दर्शाता है। यह कदम राजनीतिक बयानों और एजेंसियों की गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केआईआईएफबी मसाला बॉंड मामला क्या है?
यह मामला केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड द्वारा मसाला बॉंड के जरिए धन जुटाने से संबंधित है, जिसमें ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
केरल हाईकोर्ट ने क्या निर्णय लिया?
केरल हाईकोर्ट ने ईडी के नोटिस पर रोक लगाते हुए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को अंतरिम राहत प्रदान की।
क्या यह मामला राजनीति से प्रेरित है?
मुख्यमंत्री ने याचिका में आरोप लगाया है कि ईडी की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है।
ईडी ने क्या तर्क दिया?
ईडी ने कहा है कि सिंगल बेंच ने रोक लगाने में अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है और इसे रद्द करने की मांग की है।
क्या मसाला बॉंड का उपयोग सही तरीके से किया गया?
केआईआईएफबी ने कहा है कि मसाला बॉंड का उपयोग पूरी तरह से विकास के लिए किया गया था और सभी नियमों का पालन किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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