केरल डीजीपी का बड़ा फैसला: वर्दी में धार्मिक आयोजनों में शामिल होने पर पुलिसकर्मियों को रोक
सारांश
मुख्य बातें
केरल के पुलिस महानिदेशक रावदा ए. चंद्रशेखर ने 1 जुलाई 2026 को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी करते हुए राज्य के समस्त पुलिसकर्मियों को वर्दी पहनकर धार्मिक समारोहों, अनुष्ठानों या उत्सवों में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने से प्रतिबंधित किया है। यह आदेश केरल पुलिस के सभी रैंकों पर समान रूप से लागू होगा। हालाँकि, कानून-व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण या सुरक्षा व्यवस्था के लिए अधिकृत आधिकारिक ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
सर्कुलर जारी होने की पृष्ठभूमि
यह निर्देश उन कई शिकायतों के बाद जारी किया गया है जिनमें पुलिसकर्मी वर्दी में धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते और उनकी तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते देखे गए। इन घटनाओं ने पुलिस मुख्यालय को आधिकारिक वर्दी के उचित उपयोग को लेकर नए दिशानिर्देश जारी करने पर विवश किया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पुलिस बल की धर्मनिरपेक्ष छवि और संस्थागत तटस्थता को लेकर बहस तेज़ हो रही है।
सर्कुलर के मुख्य प्रावधान
सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि पुलिस वर्दी निष्पक्षता और तटस्थता का प्रतीक है। इसका उपयोग किसी विशेष धर्म या धार्मिक गतिविधि के समर्थन का भ्रम उत्पन्न करने वाले तरीके से नहीं किया जाना चाहिए। यह आदेश सिविल पुलिस अधिकारी से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक, केरल पुलिस के सभी रैंकों पर लागू होगा।
अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो, रील या अन्य सामग्री साझा न करें जिनमें वे वर्दी पहनकर व्यक्तिगत रूप से धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते दिखें।
पुलिस की धर्मनिरपेक्ष छवि पर ज़ोर
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह निर्देश यह सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है कि वर्दी केवल अधिकृत ड्यूटी के दौरान ही उपयोग की जाए। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल के पेशेवर मानकों को सुदृढ़ करना और उसकी धर्मनिरपेक्ष छवि तथा सार्वजनिक विश्वसनीयता को बनाए रखना है।
यह सर्कुलर पुलिसकर्मियों के लिए एक स्पष्ट संस्थागत संदेश है कि पुलिस वर्दी राज्य की सत्ता का प्रतीक है और इसे व्यक्तिगत धार्मिक आस्था या गतिविधियों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
आगे क्या
इस आदेश के पालन की निगरानी पुलिस मुख्यालय द्वारा की जाएगी। उल्लंघन की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य के विभिन्न ज़िलों में इस निर्देश का क्रियान्वयन किस प्रकार सुनिश्चित किया जाता है।