केशव मौर्य का राहुल गांधी पर प्रहार: 'मोहब्बत की दुकान से नफरत की राजनीति लेकर आ रहे प्रयागराज'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 8 अगस्त 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रयागराज दौरे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अपनी कथित 'मोहब्बत की दुकान' की आड़ में 'नफरत फैलाने' की राजनीति लेकर आ रहे हैं। मौर्य ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए की, जो तुरंत राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई।
मौर्य ने क्या कहा
मौर्य ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'बचकानी राजनीति के प्रतीक बन चुके राहुल गांधी अपनी कथित 'मोहब्बत की दुकान' से 'नफरत फैलाने' की राजनीति लेकर आज प्रयागराज आ रहे हैं।' उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि यदि अवसर मिले तो वह आनंद भवन और उसके आसपास के इलाकों का भी दौरा करें, ताकि उन्हें स्वयं यह एहसास हो सके कि उनके परिवार ने 'अपना घर होने के बावजूद प्रयागराज को सालों तक उपेक्षित छोड़ रखा था।'
विकास का दावा और BJP का पक्ष
मौर्य ने अपनी पोस्ट में आगे दावा किया कि प्रयागराज आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'डबल इंजन सरकार' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 'विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।' उन्होंने कहा कि शहर में 'अब केवल छात्रों की आवाज ही नहीं, बल्कि विकास की गूंज भी सुनाई देती है।'
धार्मिक स्थलों का दौरा करने की नसीहत
उपमुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की 'आस्था-अनास्था' पर सीधा सवाल उठाने से परहेज़ करते हुए कहा कि यदि समय मिले तो वह पवित्र संगम और श्रृंगवेरपुर के भी दर्शन करें। मौर्य के अनुसार, इससे राहुल गांधी स्वयं 'डबल इंजन सरकार' के 'विरासत के साथ विकास' के संकल्प और उसके परिणामों को स्वीकार करने पर विवश होंगे।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'मोहब्बत की दुकान' अभियान को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध तेज़ हो गया है। गौरतलब है कि प्रयागराज कांग्रेस की राजनीतिक विरासत का केंद्र रहा है — आनंद भवन नेहरू-गांधी परिवार का ऐतिहासिक आवास है। मौर्य का यह हमला उसी विरासत को निशाना बनाते हुए भाजपा के शासनकाल में हुए विकास कार्यों को रेखांकित करने की कोशिश है।
आगे की राजनीति
राहुल गांधी के प्रयागराज दौरे के बाद दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज़ होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में यह राजनीतिक नोकझोंक महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।