केतन मर्डर केस: सिया के भाई साहिल से 10 घंटे पूछताछ, बोले- 'बहन ने मना किया होता तो शादी रद्द कर देते'
सारांश
मुख्य बातें
लोनावला हत्याकांड में मुख्य आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल से पुलिस ने 27 जून को करीब 10 घंटे तक गहन पूछताछ की। पूछताछ के दौरान साहिल ने जाँच अधिकारियों को बताया कि यदि सिया ने परिवार को समय रहते यह बता दिया होता कि वह केतन अग्रवाल से विवाह नहीं करना चाहती, तो परिवार स्वयं यह रिश्ता समाप्त कर देता।
पूछताछ का घटनाक्रम
लोनावला ग्रामीण पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, साहिल शुक्रवार सुबह पूछताछ के लिए थाने पहुँचा और देर शाम उसे जाने की अनुमति दी गई। इस दीर्घ पूछताछ में अधिकारियों ने उससे सिया और सह-आरोपी चेतन चौधरी के आपसी संबंध, उनके संपर्क-सूत्र और मामले से जुड़े कई संवेदनशील पहलुओं पर विस्तार से सवाल किए। साहिल ने स्पष्ट कहा, 'अगर सिया ने कहा होता कि उसे केतन पसंद नहीं है, तो हम शादी रुकवा देते।'
हत्याकांड की पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार, 18 जून को लोनावला के ऐतिहासिक लोहगढ़ किले पर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर केतन अग्रवाल को पहाड़ से धक्का देकर उसकी हत्या कर दी। जाँच एजेंसियों का मानना है कि दोनों ने यह साजिश इसलिए रची क्योंकि सिया नवंबर में निर्धारित विवाह से बचना चाहती थी। शुरुआत में इस मौत को ट्रैकिंग के दौरान हुई दुर्घटना बताया गया था, किंतु गहन जाँच के बाद इसे सुनियोजित हत्या की साजिश घोषित किया गया।
केतन अग्रवाल अपने परिवार की रियल एस्टेट कंपनी सक्सेस ग्रुप में निदेशक और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत था।
सरकार की प्रतिक्रिया और फास्ट ट्रैक सुनवाई
यह मामला पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में केतन के पिता से मुलाकात कर परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। परिवार की माँग पर महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का निर्णय लिया है और वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है।
मुख्यमंत्री की सामाजिक चिंता
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस घटना को अत्यंत चौंकाने वाला करार देते हुए कहा कि यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि अच्छे परिवारों और शिक्षित युवाओं में आखिर ऐसी आपराधिक मानसिकता और बदले की भावना क्यों पनप रही है। गौरतलब है कि यह मामला उस समय सामने आया जब महाराष्ट्र में युवाओं से जुड़े अपराधों पर व्यापक बहस छिड़ी हुई है।
आगे क्या होगा
फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि सरकार इस मामले में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के प्रति गंभीर है। जाँच अभी भी जारी है और पुलिस मामले से जुड़े अन्य संभावित सूत्रों की पड़ताल कर रही है।