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पंजाब BJP अध्यक्ष बने केवल सिंह ढिल्लों, बिट्टू बोले- ‘अब पंजाब में भी खिलेगा कमल’

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पंजाब BJP अध्यक्ष बने केवल सिंह ढिल्लों, बिट्टू बोले- ‘अब पंजाब में भी खिलेगा कमल’

सारांश

पंजाब भाजपा को मिला नया चेहरा- मालवा से आने वाले केवल सिंह ढिल्लों। केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने इसे ‘कमल खिलने’ का संकेत बताया। मौजूदा संगठनात्मक ढाँचे में पहले जाट सिख प्रदेश अध्यक्ष बनकर ढिल्लों, चुनाव से पहले भाजपा की सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति का चेहरा बन गए हैं।

मुख्य बातें

केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा- ‘कमल अब पंजाब में भी खिलेगा’।
ढिल्लों मौजूदा संगठनात्मक संरचना में इस पद पर पहुँचने वाले पहले जाट सिख चेहरा हैं।
निवर्तमान अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कार्यकाल पूरा होने पर यह बदलाव हुआ।
दौड़ में पूर्व अध्यक्ष व विधायक अश्विनी शर्मा समेत तीन प्रमुख दावेदार थे।
नियुक्ति को आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 3 जून को केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि यह पार्टी के लिए ‘बहुत खुशी का मौका’ है और अब ‘कमल पंजाब में भी खिलेगा’। आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले हुई इस नियुक्ति को भाजपा की राज्य रणनीति में एक अहम बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ढिल्लों मौजूदा संगठनात्मक ढाँचे में इस पद पर पहुँचने वाले पहले जाट सिख चेहरा हैं।

बिट्टू का बयान

बिट्टू ने कहा, ‘आज भाजपा और पंजाब के लिए बहुत खुशी का मौका है। पार्टी ने यह जिम्मेदारी दी है और चूंकि प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर सेवा दे रहे जाखड़ साहब का कार्यकाल पूरा हो गया है, इसलिए मालवा क्षेत्र से आने वाले सरदार केवल सिंह ढिल्लों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।’ राज्य में पार्टी की चुनावी महत्वाकांक्षाओं पर ज़ोर देते हुए उन्होंने जोड़ा, ‘कमल हमारा निशान है। कमल पहले से ही खिला हुआ है; अब इसे पंजाब में भी खिलना है।’

क्यों अहम है यह नियुक्ति

पार्टी सूत्रों के अनुसार, ढिल्लों का चयन गहन आंतरिक विचार-विमर्श के बाद किया गया, जिसमें तीन प्रमुख दावेदार दौड़ में थे। इनमें पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और विधायक अश्विनी शर्मा भी शामिल बताए गए, जिन्हें राज्य में पार्टी का एक प्रमुख हिंदू चेहरा माना जाता है। कई वरिष्ठ नेताओं के नाम भी विचाराधीन थे, लेकिन आलाकमान ने अंततः ढिल्लों के नाम पर मुहर लगाई।

जाट सिख चेहरे पर दांव

पंजाब में लंबे समय तक भाजपा की कमान हिंदू नेताओं के हाथ में रही है। चुनावों से पहले एक जाट सिख चेहरे को आगे करना पार्टी की अपील का दायरा बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि दया सिंह सोढ़ी 1997 में पंजाब भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं, परन्तु आलोचकों का कहना है कि मौजूदा संगठनात्मक संरचना में ढिल्लों इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले जाट सिख हैं।

आगे की राह

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भाजपा पंजाब में शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद अपने ज़मीनी संगठन को नए सिरे से खड़ा करने में जुटी है। ढिल्लों के सामने ग्रामीण मालवा बेल्ट में पकड़ मज़बूत करने और किसान-केंद्रित मुद्दों पर पार्टी की छवि सुधारने की दोहरी चुनौती होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भाजपा की पंजाब रणनीति में जातीय-धार्मिक पुनर्संतुलन का स्पष्ट संकेत है। अकाली दल से अलगाव के बाद पार्टी को ग्रामीण सिख जनाधार में जगह बनाने का संकट लंबे समय से रहा है, और एक जाट सिख प्रदेश अध्यक्ष इसी खाली जगह को भरने की कोशिश है। हालाँकि, चेहरा बदलने से वोट तभी बदलते हैं जब किसान आंदोलन की कड़वाहट और MSP जैसे ज़मीनी मुद्दों पर पार्टी का रुख भी विश्वसनीय हो- और यहीं असली परीक्षा है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष कौन हैं?
मालवा क्षेत्र से आने वाले केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह मौजूदा संगठनात्मक संरचना में इस पद पर पहुँचने वाले पहले जाट सिख चेहरा हैं।
रवनीत सिंह बिट्टू ने नियुक्ति पर क्या कहा?
केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इसे ‘भाजपा और पंजाब के लिए बहुत खुशी का मौका’ बताया। उन्होंने कहा कि ‘कमल पहले से खिला हुआ है; अब इसे पंजाब में भी खिलना है’, यानी पार्टी का लक्ष्य राज्य में जनाधार बढ़ाना है।
ढिल्लों की नियुक्ति को रणनीतिक क्यों माना जा रहा है?
आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले एक जाट सिख चेहरे को कमान सौंपकर भाजपा अपनी सामाजिक अपील का दायरा बढ़ाना चाहती है। लंबे समय तक राज्य में पार्टी की कमान हिंदू नेताओं के हाथ में रही है, और यह बदलाव उसी संतुलन को साधने की कोशिश है।
इस पद के लिए और कौन दावेदार थे?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, तीन प्रमुख दावेदार दौड़ में थे, जिनमें पूर्व पंजाब भाजपा अध्यक्ष और विधायक अश्विनी शर्मा भी शामिल थे। कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के नामों पर भी विचार हुआ, परन्तु आलाकमान ने अंततः ढिल्लों के नाम पर मुहर लगाई।
क्या ढिल्लों पंजाब भाजपा के पहले सिख अध्यक्ष हैं?
नहीं, दया सिंह सोढ़ी 1997 में पंजाब भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं। हालाँकि, पार्टी की मौजूदा संगठनात्मक संरचना में ढिल्लों इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले जाट सिख नेता बताए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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