केवल सिंह ढिल्लों ने संभाली पंजाब BJP की कमान, 2027 विधानसभा चुनाव पर टिकीं निगाहें
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पंजाब इकाई के नवनियुक्त अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 3 जून को चंडीगढ़ में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। मालवा क्षेत्र और सिख समुदाय से आने वाले ढिल्लों को 28 मई को पार्टी ने पंजाब BJP की कमान सौंपी थी, और उनकी नियुक्ति को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
पदभार ग्रहण समारोह में जुटा नेतृत्व
पदभार ग्रहण समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, सांसद सतनाम संधू और विक्रमजीत साहनी, तथा पंजाबी अभिनेता-नेता हॉबी धालीवाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कार्यकाल पूरा होने के बाद यह बदलाव किया गया है।
बिट्टू ने कहा, ‘आज BJP और पंजाब के लिए बहुत खुशी का मौका है। जाखड़ साहब का कार्यकाल पूरा हो चुका है, इसलिए मालवा क्षेत्र से आने वाले सरदार केवल सिंह ढिल्लों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।’ उन्होंने जोड़ा कि चुनाव की तैयारी पूरी है और पार्टी का लक्ष्य पंजाब में ‘डबल इंजन की सरकार’ लाना है।
‘2027 होगा गेम-चेंजर’: तरुण चुघ
राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने दावा किया कि पंजाब के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्थन दिया है और 2027 राज्य की राजनीति के लिए ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए कथित तौर पर कहा, ‘पंजाब के हर गांव से आवाजें उठ रही हैं — बाय-बाय भगवंत मान। अब बस छह महीने ही बाकी हैं।’
क्यों मायने रखती है यह नियुक्ति
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब BJP पंजाब में अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद अपने दम पर ज़मीन तलाश रही है। सिख चेहरे और मालवा क्षेत्र — जो राज्य की 117 में से सबसे अधिक विधानसभा सीटें रखता है — से आने वाले ढिल्लों की नियुक्ति को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP केवल 2 सीटें ही जीत सकी थी।
सहयोगियों का समर्थन और एजेंडा
सांसद सतनाम संधू ने कहा कि पदभार ग्रहण से प्रदेश संगठन में ‘नई ऊर्जा’ दिख रही है और प्रदेशभर से कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय पहुंचे हैं। सांसद विक्रमजीत साहनी ने राज्य में नशे की समस्या को रेखांकित करते हुए कहा, ‘पंजाब की पहचान शूरवीरों, गुरुओं और संतों से होती थी, लेकिन आज पंजाब नशे की धरती बन चुका है। ‘रंगला पंजाब’ बनाने के लिए डबल इंजन की सरकार बहुत जरूरी है।’
आगे की राह
नए अध्यक्ष के सामने संगठनात्मक विस्तार, ग्रामीण और किसान वर्ग में पकड़ मजबूत करना, तथा शहरी हिंदू मतदाताओं से परे सिख वोट बैंक तक पहुंच बनाना प्रमुख चुनौतियाँ होंगी। आने वाले महीनों में पार्टी की ज़िला-स्तरीय कार्यकारिणी की घोषणा अपेक्षित है।