खान सर विवाद पर सियासत गरमाई: शिवसेना, राजद और बिहार सरकार ने निष्पक्ष जांच की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
पटना में कोचिंग सेंटर संचालक फैजल खान उर्फ खान सर से जुड़े विवाद ने 6 जून 2026 को राजनीतिक रंग ले लिया, जब कई दलों के नेताओं ने मामले में निष्पक्ष जांच और कानून-सम्मत कार्रवाई की माँग की। बिहार की राजधानी पटना से उठे इस मामले पर शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और राज्य सरकार — तीनों की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग कोणों से सामने आई हैं।
शिवसेना (यूबीटी) की माँग: पारदर्शी जांच
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार है और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कंधों पर प्रशासन व कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
दुबे ने कहा, 'यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यदि कोई निर्दोष है तो उसे किसी भी प्रकार से प्रताड़ित या निशाना नहीं बनाना चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खान सर को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, लेकिन सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन्हें एक प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षक के रूप में जानते हैं।
छात्रों की भूमिका पर ज़ोर
दुबे के अनुसार, खान सर की शिक्षण शैली, फीस संरचना और संस्थान की कार्यप्रणाली का सबसे सटीक मूल्यांकन उनके छात्र और उनसे जुड़े लोग ही कर सकते हैं। UPSC, SSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी इस संदर्भ में सबसे विश्वसनीय गवाह हैं।
राजद सांसद का कोचिंग उद्योग पर सवाल
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि खान सर को किसी असाधारण या महान शिक्षक के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है, क्योंकि वह एक कोचिंग संस्थान का संचालन करते हैं और यह एक व्यावसायिक गतिविधि है। उन्होंने कहा कि यह मामला शिक्षा व्यवस्था की उन खामियों को भी उजागर करता है, जिनके कारण कोचिंग उद्योग तेज़ी से बढ़ा है। गौरतलब है कि पटना, कोटा के बाद देश के सबसे बड़े कोचिंग हब में से एक है।
राज्य सरकार का रुख: कानून के अनुसार कार्रवाई
बिहार सरकार की ओर से मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रशासन और पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है और सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। प्रकाश ने आश्वासन दिया कि जो भी कानूनी प्रक्रिया आवश्यक होगी, उसे पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज़ है। जांच के नतीजे न केवल खान सर के मामले में बल्कि बिहार में कोचिंग उद्योग की नियामक व्यवस्था पर भी असर डाल सकते हैं। राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियाँ किस गति से और किस निष्कर्ष पर पहुँचती हैं।