खंडवा के अमाखुजरी वन में अतिक्रमण हटाओ अभियान: 600 कर्मी और 30 JCB तैनात, आठ वनरक्षक घायल होने के बाद कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के खंडवा जिला प्रशासन ने सोमवार, 30 जून 2025 को गुड़ी रेंज के अंतर्गत अमाखुजरी वन में अवैध वन भूमि कब्जे को खाली कराने के लिए बड़े पैमाने पर संयुक्त अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई एक दिन पहले रविवार को हुई उस हिंसक घटना के बाद की गई, जिसमें कथित तौर पर लगभग 400 अतिक्रमणकारियों की भीड़ ने वन विभाग की 40 सदस्यीय फ्लाइंग स्क्वाड पर पथराव किया था और आठ वनरक्षक घायल हो गए थे।
अभियान का विस्तार और तैनाती
इस संयुक्त अभियान में वन, पुलिस और राजस्व विभागों के मिलाकर 600 से अधिक कर्मी शामिल किए गए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र तारणेकर के अनुसार, इसमें लगभग 400 वनकर्मी और करीब 200 पुलिस कांस्टेबल के साथ पुलिस अधिकारी भी तैनात थे। अतिक्रमित भूमि को साफ करने के लिए 30 JCB मशीनें लगाई गईं। हिंसा की पुनरावृत्ति रोकने के लिए लगभग 60 महिला पुलिसकर्मियों को सुरक्षा जैकेट पहनाकर घटनास्थल पर तैनात किया गया।
तारणेकर ने बताया, 'सुबह के समय गीली जमीन के कारण काम धीमा रहा, लेकिन अतिक्रमण वाले क्षेत्र का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा पहले ही खाली करा लिया गया है। स्थिति शांतिपूर्ण है और अब तक कोई विरोध नहीं हुआ है।'
रविवार की हिंसा: क्या हुआ था
वन अधिकारियों के अनुसार, रविवार को मानसून के आगमन के बाद वन भूमि पर नई खेती रोकने पहुँची फ्लाइंग स्क्वाड पर कथित तौर पर बड़ी भीड़ ने हमला किया। आरोप है कि महिलाओं को भीड़ के आगे रखा गया जबकि अन्य लोगों ने गुलेल और लाठियों से पत्थर फेंके। इस हमले में आठ वनरक्षक घायल हुए, जिनका जिला अस्पताल में उपचार जारी है। यह फ्लाइंग स्क्वाड 2025 में वन अतिक्रमणों से निपटने के लिए विशेष रूप से गठित की गई थी।
अतिक्रमण का इतिहास और पृष्ठभूमि
वन अधिकारियों ने बताया कि विभाग पहले अमाखुजरी वन में लगभग 500 एकड़ अतिक्रमित भूमि खाली करा चुका था और नए अतिक्रमण रोकने के लिए खाइयाँ भी खोदी गई थीं। हालाँकि, आरोप है कि करीब 200 एकड़ भूमि पर दोबारा कब्जा कर खेती शुरू कर दी गई, जिसके चलते यह नया अभियान चलाना पड़ा। गौरतलब है कि मानसून का मौसम अतिक्रमणकारियों के लिए वन भूमि पर नई बुआई का अवसर बन जाता है, जो वन विभाग के लिए बारहमासी चुनौती है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और कानूनी कार्रवाई
कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने स्वयं वन क्षेत्र का दौरा कर अभियान की निगरानी की। जिला वन अधिकारी राकेश कुमार दामोर ने बताया कि रविवार के हमले के बाद एफआईआर दर्ज कर नौ चिन्हित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और शेष संदिग्धों की पहचान के प्रयास जारी हैं। ऑपरेशन के दौरान एक पुलिस वाहन में ड्रोन-आधारित आँसू गैस प्रणाली के कनस्तर से रिसाव की घटना हुई, लेकिन उसे तत्काल सुरक्षित तरीके से निपटाया गया और अभियान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
आगे क्या होगा
वन विभाग ने भविष्य के अतिक्रमण-विरोधी अभियानों के लिए स्थायी पुलिस सुरक्षा की माँग की है। दामोर ने स्पष्ट किया कि अभियान पर्याप्त सुरक्षा बल के साथ जारी रहेगा। यह घटना मध्य प्रदेश में वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण और उसे हटाने के दौरान होने वाले टकरावों की एक बड़ी श्रृंखला की ताज़ा कड़ी है।