29 जून 2026
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खंडवा के अमाखुजरी वन में अतिक्रमण हटाओ अभियान: 600 कर्मी और 30 JCB तैनात, आठ वनरक्षक घायल होने के बाद कार्रवाई

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खंडवा के अमाखुजरी वन में अतिक्रमण हटाओ अभियान: 600 कर्मी और 30 JCB तैनात, आठ वनरक्षक घायल होने के बाद कार्रवाई

सारांश

रविवार को 400 की भीड़ द्वारा पथराव में 8 वनरक्षकों के घायल होने के ठीक एक दिन बाद खंडवा प्रशासन ने अमाखुजरी वन में 600 कर्मी और 30 JCB उतार दिए। 9 के खिलाफ FIR दर्ज, 200 एकड़ दोबारा कब्जाई भूमि खाली कराने का अभियान जारी — मानसून में वन भूमि पर अतिक्रमण की पुरानी जंग एक बार फिर सामने आई।

मुख्य बातें

खंडवा जिला प्रशासन ने 30 जून 2025 को अमाखुजरी वन में अवैध कब्जा हटाने का बड़ा अभियान शुरू किया।
अभियान में 600 से अधिक कर्मी और 30 JCB मशीनें तैनात; अब तक अतिक्रमित क्षेत्र का 30 प्रतिशत खाली कराया गया।
एक दिन पहले कथित तौर पर 400 अतिक्रमणकारियों की भीड़ ने फ्लाइंग स्क्वाड पर पथराव किया, 8 वनरक्षक घायल।
हमले के बाद FIR दर्ज कर 9 चिन्हित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू।
विभाग पहले 500 एकड़ खाली करा चुका था; आरोप है कि 200 एकड़ पर दोबारा कब्जा हो गया।
वन विभाग ने भविष्य के अभियानों के लिए स्थायी पुलिस सुरक्षा की माँग की।

मध्य प्रदेश के खंडवा जिला प्रशासन ने सोमवार, 30 जून 2025 को गुड़ी रेंज के अंतर्गत अमाखुजरी वन में अवैध वन भूमि कब्जे को खाली कराने के लिए बड़े पैमाने पर संयुक्त अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई एक दिन पहले रविवार को हुई उस हिंसक घटना के बाद की गई, जिसमें कथित तौर पर लगभग 400 अतिक्रमणकारियों की भीड़ ने वन विभाग की 40 सदस्यीय फ्लाइंग स्क्वाड पर पथराव किया था और आठ वनरक्षक घायल हो गए थे।

अभियान का विस्तार और तैनाती

इस संयुक्त अभियान में वन, पुलिस और राजस्व विभागों के मिलाकर 600 से अधिक कर्मी शामिल किए गए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र तारणेकर के अनुसार, इसमें लगभग 400 वनकर्मी और करीब 200 पुलिस कांस्टेबल के साथ पुलिस अधिकारी भी तैनात थे। अतिक्रमित भूमि को साफ करने के लिए 30 JCB मशीनें लगाई गईं। हिंसा की पुनरावृत्ति रोकने के लिए लगभग 60 महिला पुलिसकर्मियों को सुरक्षा जैकेट पहनाकर घटनास्थल पर तैनात किया गया।

तारणेकर ने बताया, 'सुबह के समय गीली जमीन के कारण काम धीमा रहा, लेकिन अतिक्रमण वाले क्षेत्र का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा पहले ही खाली करा लिया गया है। स्थिति शांतिपूर्ण है और अब तक कोई विरोध नहीं हुआ है।'

रविवार की हिंसा: क्या हुआ था

वन अधिकारियों के अनुसार, रविवार को मानसून के आगमन के बाद वन भूमि पर नई खेती रोकने पहुँची फ्लाइंग स्क्वाड पर कथित तौर पर बड़ी भीड़ ने हमला किया। आरोप है कि महिलाओं को भीड़ के आगे रखा गया जबकि अन्य लोगों ने गुलेल और लाठियों से पत्थर फेंके। इस हमले में आठ वनरक्षक घायल हुए, जिनका जिला अस्पताल में उपचार जारी है। यह फ्लाइंग स्क्वाड 2025 में वन अतिक्रमणों से निपटने के लिए विशेष रूप से गठित की गई थी।

अतिक्रमण का इतिहास और पृष्ठभूमि

वन अधिकारियों ने बताया कि विभाग पहले अमाखुजरी वन में लगभग 500 एकड़ अतिक्रमित भूमि खाली करा चुका था और नए अतिक्रमण रोकने के लिए खाइयाँ भी खोदी गई थीं। हालाँकि, आरोप है कि करीब 200 एकड़ भूमि पर दोबारा कब्जा कर खेती शुरू कर दी गई, जिसके चलते यह नया अभियान चलाना पड़ा। गौरतलब है कि मानसून का मौसम अतिक्रमणकारियों के लिए वन भूमि पर नई बुआई का अवसर बन जाता है, जो वन विभाग के लिए बारहमासी चुनौती है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और कानूनी कार्रवाई

कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने स्वयं वन क्षेत्र का दौरा कर अभियान की निगरानी की। जिला वन अधिकारी राकेश कुमार दामोर ने बताया कि रविवार के हमले के बाद एफआईआर दर्ज कर नौ चिन्हित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और शेष संदिग्धों की पहचान के प्रयास जारी हैं। ऑपरेशन के दौरान एक पुलिस वाहन में ड्रोन-आधारित आँसू गैस प्रणाली के कनस्तर से रिसाव की घटना हुई, लेकिन उसे तत्काल सुरक्षित तरीके से निपटाया गया और अभियान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

आगे क्या होगा

वन विभाग ने भविष्य के अतिक्रमण-विरोधी अभियानों के लिए स्थायी पुलिस सुरक्षा की माँग की है। दामोर ने स्पष्ट किया कि अभियान पर्याप्त सुरक्षा बल के साथ जारी रहेगा। यह घटना मध्य प्रदेश में वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण और उसे हटाने के दौरान होने वाले टकरावों की एक बड़ी श्रृंखला की ताज़ा कड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खाइयाँ खोदी जाती हैं, और फिर अगले मानसून में वही ज़मीन दोबारा कब्जा ली जाती है। 500 एकड़ खाली कराने के बाद 200 एकड़ पर पुनः अतिक्रमण यह सवाल उठाता है कि दीर्घकालिक निगरानी और सामाजिक पुनर्वास की कोई ठोस योजना है या नहीं। फ्लाइंग स्क्वाड पर संगठित हमला — जिसमें कथित तौर पर महिलाओं को आगे रखा गया — बताता है कि यह सहज प्रतिरोध नहीं, बल्कि सुनियोजित टकराव था। स्थायी पुलिस सुरक्षा की माँग लक्षण का इलाज है, जड़ का नहीं।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खंडवा के अमाखुजरी वन में अतिक्रमण हटाओ अभियान क्यों शुरू हुआ?
रविवार को वन विभाग की फ्लाइंग स्क्वाड पर कथित तौर पर 400 अतिक्रमणकारियों की भीड़ ने पथराव किया, जिसमें 8 वनरक्षक घायल हुए। इसके अगले दिन सोमवार को जिला प्रशासन ने 200 एकड़ दोबारा कब्जाई वन भूमि को खाली कराने के लिए यह बड़ा संयुक्त अभियान शुरू किया।
अभियान में कितने कर्मी और संसाधन लगाए गए?
अभियान में वन, पुलिस और राजस्व विभागों के 600 से अधिक कर्मी तैनात किए गए, जिनमें लगभग 400 वनकर्मी और 200 पुलिस कांस्टेबल शामिल थे। अतिक्रमित भूमि साफ करने के लिए 30 JCB मशीनें और हिंसा रोकने के लिए 60 महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद थीं।
रविवार के पथराव हमले में क्या हुआ था?
वन अधिकारियों के अनुसार, मानसून के बाद वन भूमि पर नई खेती रोकने पहुँची 40 सदस्यीय फ्लाइंग स्क्वाड पर कथित तौर पर लगभग 400 लोगों की भीड़ ने गुलेल और लाठियों से पथराव किया। आरोप है कि महिलाओं को भीड़ के आगे रखा गया था। इसमें 8 वनरक्षक घायल हुए, जो जिला अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
हमले के बाद क्या कानूनी कार्रवाई हुई?
जिला वन अधिकारी राकेश कुमार दामोर के अनुसार, हमले के बाद FIR दर्ज कर 9 चिन्हित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। शेष संदिग्धों की पहचान के प्रयास जारी हैं।
अमाखुजरी वन में अतिक्रमण की स्थिति पहले कैसी थी?
वन विभाग पहले अमाखुजरी वन में लगभग 500 एकड़ अतिक्रमित भूमि खाली करा चुका था और नए कब्जे रोकने के लिए खाइयाँ भी खोदी थीं। हालाँकि, आरोप है कि करीब 200 एकड़ भूमि पर दोबारा अतिक्रमण कर खेती शुरू कर दी गई, जिसके चलते यह नया अभियान चलाना पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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