खीर भवानी मेला 2026: गांदरबल में हजारों श्रद्धालु, उमर अब्दुल्ला ने दी शुभकामनाएं, कड़ी सुरक्षा तैनात
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुला में माता खीर भवानी मंदिर परिसर में 22 जून 2026 को वार्षिक मेला खीर भवानी के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं के उमड़ने की उम्मीद के बीच बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। ज्येष्ठ अष्टमी के इस पावन पर्व पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती सुनिश्चित की गई है, ताकि तीर्थयात्रा निर्बाध और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल की शुभकामनाएं
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मेला खीर भवानी के शुभ अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने प्रदेश की जनता की शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि यह पवित्र पर्व जम्मू-कश्मीर में सद्भाव, भाईचारे और मिली-जुली सांस्कृतिक विरासत के बंधन को और प्रगाढ़ करेगा।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'ज्येष्ठ अष्टमी के पावन अवसर पर सभी को और विशेष रूप से हमारे कश्मीरी पंडित भाई-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं। माता खीर भवानी हमें सदा सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें और सभी को शांति, खुशी, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।'
सुरक्षा की व्यापक समीक्षा
कश्मीर जोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) वीके बिरदी ने 21 जून को सेंट्रल कश्मीर रेंज के डीआईजी राजीव ओमप्रकाश पांडे और एसएसपी गांदरबल सुधांशु धामा के साथ तुलमुला स्थित मंदिर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने एक्सेस कंट्रोल, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक नियमन और पार्किंग व्यवस्था सहित सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की।
आईजीपी बिरदी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम, प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन और सभी जरूरी सेवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सतर्कता, अंतर-विभागीय तालमेल और उच्चतम तैयारी मानकों पर विशेष जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने 18 जून को की थी तैयारियों की समीक्षा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 18 जून को स्वयं माता खीर भवानी मंदिर का दौरा कर मेले की तैयारियों का जायजा लिया था। उन्होंने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए की जा रही व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। यह दौरा इस बात का संकेत था कि प्रशासन इस बार मेले को विशेष प्राथमिकता दे रहा है।
खीर भवानी मेले का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
माता खीर भवानी को कश्मीरी पंडितों की कुलदेवी माना जाता है और ज्येष्ठ अष्टमी उनके लिए अत्यंत पवित्र तिथि है। वर्षों से यह मेला कश्मीर में सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे का प्रतीक बना हुआ है — एक ऐसा अवसर जब कश्मीरी पंडित, जिनमें से अनेक विस्थापन के बाद बाहर बस गए हैं, अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए घाटी लौटते हैं। यह मेला न केवल आस्था का उत्सव है, बल्कि कश्मीर की समावेशी सांस्कृतिक पहचान का भी जीवंत प्रमाण है।
आईजीपी बिरदी ने मेले के अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को बधाई देते हुए कामना की कि यह दिन शांति, आध्यात्मिक शक्ति और एकजुटता की भावना लेकर आए। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर श्रद्धालु का अनुभव सुरक्षित और परेशानी-मुक्त रहे।