खेत बचाओ अभियान-रबी 2026: शिवराज सिंह चौहान करनाल से करेंगे शुभारंभ, 30 नवंबर तक चलेगा राष्ट्रव्यापी मिशन
सारांश
मुख्य बातें
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय 22 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक राष्ट्रव्यापी 'खेत बचाओ अभियान-रबी 2026' शुरू कर रहा है, जिसका उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य में सुधार और सतत कृषि पद्धतियों को देशभर के किसानों तक पहुँचाना है। मंत्रालय द्वारा बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान इस अभियान का शुभारंभ हरियाणा के करनाल से करेंगे।
अभियान के प्रमुख उद्देश्य
इस अभियान का केंद्रीय लक्ष्य किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों और अन्य कृषि इनपुट के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक करना है। साथ ही, तिलहन, दलहन और बागवानी अभियानों के माध्यम से फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जाएगा। धान की कटाई के बाद परती पड़े खेतों के प्रभावी उपयोग और फसल अवशेष प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाएगा।
जैविक और जैव-आधारित कृषि उत्पादों के उचित उपयोग में प्रशिक्षण, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण भी इस अभियान के महत्त्वपूर्ण घटक हैं। अभियान जलवायु-अनुकूल और संसाधन-कुशल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर भी बल देगा।
किसानों के लिए विशेष सेवाएँ
अभियान के अंतर्गत किसान पहचान पत्र बनाने में सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के तहत कवरेज विस्तार के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाएगी। व्यापार समझौतों से किसानों को होने वाले लाभ और उपलब्ध अवसरों की जानकारी का प्रसार भी इस अभियान का हिस्सा होगा।
कृषि मशीनीकरण और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र प्रदर्शन, उर्वरकों के उचित उपयोग, उपयुक्त फसलों के साथ अंतर्फसल खेती और जल उपयोग दक्षता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
क्रियान्वयन ढाँचा
अभियान को राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर लागू किया जाएगा। इसके लिए राज्य कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थान, राज्य कृषि विश्वविद्यालय और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसियाँ (ATMA) परस्पर सहयोग करेंगी।
कृषि वैज्ञानिकों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों (SHG) और प्रगतिशील किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। किसान सम्मेलन, किसान चौपाल, प्रशिक्षण सत्र और क्षेत्र प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
संचार और प्रचार रणनीति
स्थानीय भाषाओं में सामग्री तैयार कर रेडियो, दूरदर्शन, सोशल मीडिया और अन्य सूचना एवं संचार माध्यमों के ज़रिए किसानों तक पहुँच सुनिश्चित की जाएगी। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देश में रबी फसल की बुवाई का मौसम शुरू होने वाला है और मृदा क्षरण तथा अत्यधिक रासायनिक उर्वरक उपयोग की समस्याएँ कृषि क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक चुनौती बनी हुई हैं। आगामी हफ्तों में जिला एवं ब्लॉक स्तर पर इस अभियान की व्यापक पहुँच और असर देखने को मिलेगा।