खूंटी हत्याकांड: राधेश्याम साहू की हत्या को सड़क हादसा बताने की साजिश नाकाम, तीन गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के खूंटी जिले के रनिया थाना क्षेत्र में 15 जून को तांबा जंगल के पास मिला एक शव, जिसे शुरुआत में सड़क दुर्घटना का मामला समझा जा रहा था, पुलिस जांच में एक सुनियोजित हत्या निकला। राधेश्याम साहू की हत्या कर आरोपियों ने पूरे मामले को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल डेटा ने उनकी साजिश उजागर कर दी। पुलिस ने 17 जून तक एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
15 जून को तांबा जंगल के समीप राधेश्याम साहू का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। शव के पास उनकी स्कूटी खड़ी थी, जिससे प्रथम दृष्टया मामला सड़क हादसे जैसा प्रतीत हुआ। हालांकि, घटनास्थल की परिस्थितियों में कई संदिग्ध तथ्य थे, जिन्होंने पुलिस को गहन जांच के लिए प्रेरित किया। इसके बाद रनिया थाना में मामला दर्ज कर एक विशेष जांच टीम गठित की गई।
हत्या की साजिश का खुलासा
पुलिस के अनुसार, राधेश्याम साहू की हत्या उनके घर के समीप ही की गई थी। आरोपियों ने पहले उन पर डंडे से हमला किया और इसके बाद गला दबाकर उनकी जान ले ली। इसके बाद शव को स्कूटी पर लादकर तांबा जंगल के पास ले जाया गया, जहाँ उसे फेंककर पत्थर से कुचला गया — ताकि मामला सड़क दुर्घटना जैसा दिखे। यह पूरी साजिश साक्ष्य मिटाने की सुनियोजित कोशिश थी।
बरामद साक्ष्य
जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल डेटा और छापेमारी के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कई अहम सबूत बरामद किए। इनमें हत्या में प्रयुक्त डंडा, घटना के समय पहना गया चप्पल, दो मोबाइल फोन और मृतक का मोबाइल शामिल हैं। इसके अलावा, आरोपियों के मोबाइल फोन से घटना से जुड़े फोटो और वीडियो भी मिले हैं, जिन्हें जांच का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने इस मामले में लक्ष्मी देवी (40), संदीप मांझी (26) और रविंद्र मांझी (18) को गिरफ्तार किया है। तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हत्या के पीछे की पृष्ठभूमि और अन्य संभावित पहलुओं की जांच अभी जारी है।
आगे की जांच
रनिया थाना पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में अन्य संभावित संलिप्तता की भी पड़ताल की जा रही है। हत्या के मकसद और किसी अन्य षड्यंत्रकारी की भूमिका का पता लगाने के लिए जांच जारी है। यह मामला इस बात की गंभीर याद दिलाता है कि अपराधी साक्ष्य मिटाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं — और तकनीकी जांच अब ऐसी साजिशों को बेनकाब करने में कितनी सक्षम हो चुकी है।