किरीट सोमैया पर क्लाइड क्रैस्टो का पलटवार: 'सिर्फ पब्लिसिटी की तलाश, कानून से कोई ऊपर नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो ने 13 अक्टूबर 2026 को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता किरीट सोमैया पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि सोमैया का एकमात्र उद्देश्य प्रचार पाना है, और संविधान के अनुसार देश में कोई भी न्याय व कानून से ऊपर नहीं है। क्रैस्टो ने स्पष्ट किया कि गलत कार्य करने पर कानून अपना काम करेगा और इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपने संवैधानिक अधिकारों की माँग कर रहे हैं।
क्रैस्टो का सोमैया पर सीधा आरोप
क्रैस्टो ने कहा, 'संविधान के हिसाब से हम देश के नागरिक के तौर पर मिले अधिकारों के आधार पर आगे बढ़ेंगे, क्योंकि कोई भी इंसाफ, नियम और कानून से ऊपर नहीं है और अगर किसी ने गलत किया है तो कानून अपना काम करेगा।' उन्होंने आरोप लगाया कि किरीट सोमैया असली जन-मुद्दों को दरकिनार कर केवल मीडिया-प्रचार के लिए काम करते हैं।
क्रैस्टो के अनुसार, BJP के नेता जहाँ कहीं भी सुर्खियाँ मिल सकती हैं, वहीं भागते हैं, जबकि जनसेवा के लिए अनेक वास्तविक मुद्दे मौजूद हैं।
एसआईआर विवाद और प्रदर्शनकारियों का पक्ष
क्रैस्टो ने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने इसके ज़रिये 13 करोड़ लोगों के अधिकार छीन लिए हैं। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारी अपने संवैधानिक हक की शांतिपूर्ण माँग कर रहे हैं और उन पर मुकदमे दर्ज करना अनुचित है। उन्होंने कहा कि जब तक नागरिकों को उनके अधिकार वापस नहीं मिल जाते, शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेंगे।
नाइकवाड़ी और इमरान खान प्रसंग
एनसीपी (एसपी) के विधान परिषद सदस्य (MLC) इदरीस नाइकवाड़ी ने इमरान खान के बारे में सोमैया के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक अलग मुद्दा है और संबंधित प्राधिकारी खुद तय करेंगे कि आगे क्या कदम उठाना है। नाइकवाड़ी ने कहा कि कुछ नेताओं की आदत बन गई है कि 'सुबह उठकर कुछ ऐसा बोल दो कि टीआरपी मिल जाए', और सरकार को अधिकार है कि वह फंडिंग के स्रोतों की जाँच अपने स्तर पर कर सकती है।
समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शनकारियों को 'अराजक तत्व' कहे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'BJP के पास सिर्फ दो मुद्दे हैं — जब मुसलमान विरोध करते हैं तो उन्हें आतंकवादी कहते हैं, और जब गैर-मुस्लिम विरोध करते हैं तो उन्हें अराजक तत्व।'
सिद्दीकी ने आगे कहा कि जिन लोगों ने देश की आज़ादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उन्हें ही 'देशद्रोही' और 'अराजक तत्व' कहना नैतिक दिवालियापन है। उनके अनुसार, सड़कों पर उतरे ये लोग संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध देशभक्त हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों के विरुद्ध मोर्चाबंदी कर रहे हैं।
आगे का राजनीतिक परिदृश्य
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी (एसपी) और BJP के बीच टकराव नया नहीं है, लेकिन एसआईआर मुद्दे पर बढ़ते विरोध प्रदर्शन ने इस संघर्ष को नई धार दी है। विपक्ष का एकजुट रुख संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।