मुंबई एसआईआर: किरीट सोमैया की माँग — 87,800 फर्जी जन्म प्रमाण-पत्रों की जाँच हो, 85,000 अवैध नाम मतदाता सूची से हटें
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता किरीट सोमैया ने 13 जुलाई 2026 को मुंबई में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेजों की कड़ी जाँच की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा जारी 87,800 कथित फर्जी जन्म प्रमाण-पत्रों के आधार पर करीब 85,000 लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं। सोमैया ने माँग की कि ऐसे सभी संदिग्ध नामों की गहन जाँच कर उन्हें मतदाता सूची से हटाया जाए।
मुख्य आरोप और दौरा
सोमैया ने बांद्रा ईस्ट, मानखुर्द और वडाला सहित करीब आधा दर्जन विधानसभा क्षेत्रों के अधिकारियों से मुलाकात कर एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बीएमसी द्वारा 87,800 कथित गैरकानूनी जन्म प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं और इनमें से लगभग 85,000 लोगों के नाम मतदाता सूची में मौजूद हैं। उनकी माँग है कि एसआईआर के दौरान इन सभी प्रमाण-पत्रों की जाँच हो और अवैध पाए जाने पर संबंधित नाम तत्काल हटाए जाएँ।
अनधिकृत स्कूलों और फर्जी प्रमाण-पत्रों का मामला
सोमैया ने आरोप लगाया कि बीएमसी पिछले छह वर्षों में 949 स्कूलों को अनधिकृत घोषित कर चुकी है। उनका दावा है कि इन कथित अवैध स्कूलों के प्रमाण-पत्रों के आधार पर हजारों लोगों ने जन्म प्रमाण-पत्र हासिल किए और बाद में मतदाता सूची में नाम दर्ज कराए। उन्होंने चुनाव आयोग से ऐसे सभी मामलों की विस्तृत जाँच कराने की अपील की। गौरतलब है कि यह मुद्दा ऐसे समय उठाया जा रहा है जब महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया सक्रिय रूप से चल रही है।
ओबीसी जाति प्रमाण-पत्र विवाद और एफआईआर की माँग
ओबीसी जाति प्रमाण-पत्र अमान्य पाए जाने के बाद बीएमसी द्वारा चार नगरसेवकों को अयोग्य घोषित किए जाने के मामले पर सोमैया ने कहा कि यह कार्रवाई केवल पद से हटाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी जाति प्रमाण-पत्रों के जरिए हिंदू ओबीसी समुदाय के अधिकारों का हनन किया गया है। इस संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से आग्रह किया है कि संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाए। सोमैया ने दावा किया कि उन्होंने महाराष्ट्र चुनाव आयोग को इस संबंध में दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध कराए हैं।
घुसपैठ और दोहरे नामांकन पर निशाना
सोमैया ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी मुहिम का उद्देश्य कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वाले लोगों और एक से अधिक स्थानों पर मतदाता सूची में नाम रखने वालों की पहचान करना है। उन्होंने चुनाव आयोग पर भरोसा जताते हुए कहा कि महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। आलोचकों का कहना है कि ये आरोप राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं और इनकी स्वतंत्र जाँच आवश्यक है।
आगे की राह
चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के तहत मुंबई के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची की समीक्षा जारी है। सोमैया के आरोपों और माँगों के बाद यह देखना होगा कि चुनाव आयोग और राज्य सरकार इन दावों पर क्या कदम उठाती हैं। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर एक बड़े विमर्श को जन्म दे सकता है।