9 जुलाई 2026
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कोलकाता में अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण अभियान शुरू, तृणमूल नेताओं से जुड़े तीन ढाँचे गिराए

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कोलकाता में अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण अभियान शुरू, तृणमूल नेताओं से जुड़े तीन ढाँचे गिराए

सारांश

कोलकाता में 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत KMC ने तिलजला, कस्बा और बेलियाघाटा में तृणमूल नेताओं से जुड़े तीन अवैध ढाँचे गिराए। अब KMC अधिकारियों और पूर्व मंत्री की भूमिका की जाँच होगी — सवाल यह है कि दिसंबर में अवैध घोषित होने के बावजूद निर्माण क्यों नहीं रुका।

मुख्य बातें

KMC ने 24 मई 2026 को कोलकाता के छह इलाकों में अवैध निर्माणों के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया।
तिलजला , कस्बा और बेलियाघाटा में तीन अवैध इमारतें गिराई गईं, जिनमें से प्रत्येक का संबंध स्थानीय TMC नेता से बताया जा रहा है।
बेलियाघाटा के अवैध निर्माण से तृणमूल नेता राजू नास्कर का नाम जुड़ा है; एक पार्षद और एक बोरो चेयरमैन भी कथित तौर पर शामिल हैं।
KMC अधिनियम 1980 की धारा 400(1) के तहत नोटिस भेजे गए थे; दिसंबर में ही निरीक्षण में निर्माण अवैध पाए गए थे।
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि KMC अधिकारियों और पूर्व मंत्री की भूमिका की भी जाँच होगी।

कोलकाता नगर निगम (KMC) ने 24 मई 2026 को शहर के छह इलाकों में अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़े ध्वस्तीकरण अभियान की शुरुआत की, जिसमें तिलजला, कस्बा और बेलियाघाटा में तीन अनधिकृत इमारतें गिराई गईं। यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा अवैध निर्माणों के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' नीति की घोषणा के बाद की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

रविवार को KMC के कर्मचारियों ने कड़ी पुलिस और केंद्रीय बलों की सुरक्षा के बीच कार्रवाई की। KMC अधिकारियों के अनुसार, गिराए गए तीनों अवैध ढाँचों में से प्रत्येक का संबंध किसी स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता से बताया जा रहा है। बेलियाघाटा में ध्वस्त किए गए निर्माण से तृणमूल नेता राजू नास्कर का नाम जुड़ा है, जबकि शेष दो स्थलों पर एक स्थानीय पार्षद और एक बोरो चेयरमैन की संलिप्तता की खबरें हैं। हालाँकि तीनों ने ही किसी भी अवैध निर्माण से संबंध होने से इनकार किया है।

आरोप है कि KMC द्वारा स्वीकृत नक्शे को दरकिनार करते हुए बहुमंजिला इमारतें खड़ी की गईं और दो ब्लॉकों में तो निर्माण कार्य ध्वस्तीकरण के समय भी जारी था।

कानूनी आधार और नोटिस प्रक्रिया

KMC ने कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 की धारा 400(1) के तहत संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस भेजे थे। इस धारा के अंतर्गत नगर आयुक्त किसी भी अनधिकृत निर्माण को गिराने या उस पर काम रोकने का आदेश दे सकते हैं, बशर्ते पहले मालिक को सूचित किया जाए। अधिकारियों के अनुसार, मालिकों को नियमों के उल्लंघन की जानकारी दी जा चुकी थी और यह स्पष्ट किया गया था कि स्व-ध्वस्तीकरण न करने पर KMC स्वयं कार्रवाई करेगी।

गौरतलब है कि निर्माण स्थलों पर लगाए गए नोटिस के अनुसार, दिसंबर में ही KMC अधिकारियों ने स्थलों का निरीक्षण कर उन्हें अवैध घोषित कर दिया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य न रोके जाने का सवाल अब जाँच के दायरे में है।

KMC आयुक्त का बयान

KMC आयुक्त स्मिता पांडे ने कहा, 'आज छह स्थानों पर अवैध निर्माणों को गिराने का अभियान चलाया जा रहा है। कई मामलों में हम पहले ही नोटिस जारी कर चुके हैं, जबकि कुछ मामले अदालत में लंबित हैं। जहाँ भी कोई कानूनी बाधा नहीं है, हम वहाँ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ा रहे हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है।

मंत्री की चेतावनी और जाँच का दायरा

मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट किया कि अवैध इमारतें बनाने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि KMC के वे अधिकारी और कर्मचारी भी जवाबदेही से नहीं बचेंगे जिनकी जिम्मेदारी इन निर्माणों को रोकने की थी। पॉल ने सवाल उठाया कि ये इमारतें कैसे बन गईं और क्या पूर्व मंत्री या नगर निगम ने इन्हें नजरअंदाज किया — 'हर किसी की भूमिका की जाँच की जाएगी।'

आगे क्या होगा

शेष तीन स्थलों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कानूनी बाधाओं के समाधान के बाद आगे बढ़ाई जाएगी। KMC अधिकारियों और पूर्व मंत्री की भूमिका की जाँच की घोषणा से यह मामला राजनीतिक रूप से और संवेदनशील हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में नई सरकार अपनी प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि दिसंबर में ही अवैध घोषित हो चुके निर्माण महीनों तक क्यों जारी रहे। जब तक KMC के उन अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती जिन्होंने आँखें मूँद लीं, तब तक यह अभियान राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का औज़ार ज़्यादा और प्रशासनिक सुधार कम लगेगा। तृणमूल नेताओं का नाम सामने आना और फिर भी तीनों का खंडन — यह पैटर्न बताता है कि जवाबदेही की संस्कृति अभी बनी नहीं है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण अभियान क्यों शुरू किया गया?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की 'जीरो टॉलरेंस' नीति की घोषणा के बाद KMC ने यह अभियान शुरू किया। KMC अधिनियम 1980 की धारा 400(1) के तहत नोटिस भेजने के बाद 24 मई 2026 को छह स्थानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
किन इलाकों में अवैध निर्माण गिराए गए?
तिलजला, कस्बा और बेलियाघाटा में तीन अवैध इमारतें गिराई गईं। शेष तीन स्थलों पर कानूनी बाधाओं के चलते कार्रवाई अभी लंबित है।
क्या इन अवैध निर्माणों में राजनीतिक संलिप्तता है?
KMC अधिकारियों के अनुसार, तीनों गिराए गए ढाँचों में से प्रत्येक का संबंध किसी स्थानीय TMC नेता से बताया जा रहा है। बेलियाघाटा के निर्माण से तृणमूल नेता राजू नास्कर का नाम जुड़ा है, हालाँकि तीनों ने संलिप्तता से इनकार किया है।
KMC अधिकारियों की जाँच क्यों होगी?
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि दिसंबर में ही इन निर्माणों को अवैध पाए जाने के बावजूद काम न रोके जाने की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। KMC अधिकारियों और पूर्व मंत्री — दोनों की भूमिका की जाँच की जाएगी।
आगे क्या कार्रवाई होगी?
शेष तीन स्थलों पर कानूनी बाधाएँ दूर होने के बाद ध्वस्तीकरण जारी रहेगा। KMC अधिकारियों और पूर्व मंत्री की भूमिका की जाँच प्रक्रिया भी शुरू होने की बात कही गई है।
राष्ट्र प्रेस
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