16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोलकाता नगर निगम ने 3,000 अवैध निर्माणों की पहचान की, TMC नेताओं के नाम भी सामने

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोलकाता नगर निगम ने 3,000 अवैध निर्माणों की पहचान की, TMC नेताओं के नाम भी सामने

सारांश

कोलकाता नगर निगम ने 3,000 अवैध निर्माणों की पहचान की है — जिनमें TMC नेताओं के कथित संरक्षण में बने ढाँचे भी शामिल हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद शुरू हुए इस अभियान में बेलियाघाटा, तिलजाला और कस्बा समेत दर्जनों इलाकों में बुलडोजर चल रहे हैं।

मुख्य बातें

कोलकाता नगर निगम (KMC) के भवन विभाग ने शहर में लगभग 3,000 अवैध निर्माणों की पहचान की है।
बेलियाघाटा, तिलजाला, कस्बा, गार्डन रीच, मेतियाब्रुज सहित कई इलाकों को 'रेड ज़ोन' घोषित किया गया है।
अवैध निर्माणों को स्थानीय प्रमोटरों और गिरोहों ने सुगम बनाया; तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं।
प्रमोटर 'जी प्लस फोर' की मंजूरी लेकर 'जी प्लस फाइव' इमारत बनाते थे — अतिरिक्त मुनाफा गिरोहों में बाँटा जाता था।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार के आदेश पर यह अभियान शुरू हुआ है; बुलडोजर कार्रवाई जारी है।

कोलकाता नगर निगम (KMC) के भवन विभाग ने शहर भर में लगभग 3,000 अवैध निर्माणों की पहचान की है। एक वरिष्ठ नगर निगम अधिकारी ने रविवार, 31 मई को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, इन हज़ारों आवासीय और व्यावसायिक ढाँचों में किए गए निर्माण एवं विस्तार पूरी तरह गैरकानूनी हैं और इन्हें किसी भी समय ध्वस्त किया जा सकता है।

रेड ज़ोन और प्रभावित इलाके

KMC के भवन विभाग ने कई इलाकों को औपचारिक रूप से 'रेड ज़ोन' घोषित किया है — ऐसे क्षेत्र जहाँ अवैध निर्माणों की संख्या सर्वाधिक है। पूर्वी कोलकाता में ईएम बाईपास के आसपास बड़ी संख्या में ऐसे अनधिकृत ढाँचे खड़े हो गए हैं। KMC के छह नगर क्षेत्रों में से बेलियाघाटा, तंगरा, तिलजाला, बुर्राबाज़ार, टॉपसिया, कस्बा, गार्डन रीच, मेतियाब्रुज, कोसीपोर और चितपुर जैसे इलाकों में सबसे अधिक उल्लंघन दर्ज किए गए हैं।

कैसे काम करता था यह नेटवर्क

जाँच के दौरान KMC अधिकारियों ने पाया कि इन अवैध निर्माणों को स्थानीय प्रमोटरों और संगठित गिरोहों द्वारा सुगम बनाया गया था। KMC सूत्रों के अनुसार, एक आम तरीका यह रहा कि कोई प्रमोटर या निर्माण कंपनी नगर निगम से 'जी प्लस फोर' इमारत की मंजूरी लेती थी, लेकिन वास्तव में 'जी प्लस फाइव' इमारत खड़ी कर देती थी।

इस तरकीब से न केवल अतिरिक्त अवैध मंजिल से मुनाफा कमाया जाता था, बल्कि भवन निर्माण सामग्री की खरीद में भी भारी वित्तीय हेराफेरी होती थी। सूत्रों के अनुसार, यह मुनाफा गिरोहों के बीच बाँट दिया जाता था।

TMC नेताओं के नाम और राजनीतिक कनेक्शन

सूत्रों के अनुसार, इन अवैध निर्माणों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं। तिलजाला, बेलियाघाटा और कस्बा क्षेत्रों में TMC नेताओं के कथित समर्थन से बने अवैध ढाँचों के विरुद्ध बुलडोजर कार्रवाई जारी है। गौरतलब है कि यह अभियान राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार के आदेश पर शुरू किया गया है।

ध्वस्तीकरण की नीति

एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिन इमारतों में केवल एक अतिरिक्त अवैध मंजिल है, वहाँ पूरी संरचना को नहीं गिराया जाएगा — केवल उस अनधिकृत मंजिल की जाँच और कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि, रेड ज़ोन में स्थित उन इलाकों में जहाँ गिरोहों द्वारा पुराने मकान या झुग्गियाँ तोड़कर नए अवैध निर्माण किए गए हैं, वहाँ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आगे की कार्रवाई

KMC प्रशासक पूरे शहर की निगरानी जारी रखे हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में नई सरकार ने शहरी शासन को दुरुस्त करने को प्राथमिकता दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि 3,000 से अधिक अवैध निर्माणों की पहचान महज़ शुरुआत है — वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 अवैध निर्माणों की यह पहचान केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है — यह उस व्यापक संरचना की स्वीकृति है जिसमें राजनीतिक संरक्षण, संगठित गिरोह और नगर निगम की निष्क्रियता मिलकर काम करते रहे। सवाल यह है कि दशकों तक यह सब नगर निगम की नज़र से कैसे ओझल रहा। सत्ता परिवर्तन के बाद शुरू हुई यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से सुविधाजनक समय पर आई है, जो इसकी निरंतरता और निष्पक्षता पर सवाल उठाती है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह अभियान केवल विपक्षी नेताओं तक सीमित रहता है, या सभी दलों के संरक्षण में बने ढाँचों पर समान रूप से लागू होता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में कितने अवैध निर्माणों की पहचान की गई है?
KMC के भवन विभाग ने शहर भर में लगभग 3,000 अवैध निर्माणों की पहचान की है। इनमें आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह के ढाँचे शामिल हैं जिन्हें बिना वैध अनुमति के बनाया या विस्तारित किया गया था।
कोलकाता में कौन-से इलाके 'रेड ज़ोन' घोषित किए गए हैं?
KMC ने बेलियाघाटा, तंगरा, तिलजाला, बुर्राबाज़ार, टॉपसिया, कस्बा, गार्डन रीच, मेतियाब्रुज, कोसीपोर और चितपुर जैसे इलाकों को रेड ज़ोन घोषित किया है। ये वे क्षेत्र हैं जहाँ अवैध निर्माणों की संख्या सर्वाधिक पाई गई है।
KMC के अवैध निर्माण अभियान में TMC का क्या कनेक्शन है?
सूत्रों के अनुसार, इन अवैध निर्माणों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। तिलजाला, बेलियाघाटा और कस्बा में TMC नेताओं के कथित समर्थन से बने ढाँचों के विरुद्ध बुलडोजर कार्रवाई जारी है।
क्या अवैध मंजिल होने पर पूरी इमारत गिराई जाएगी?
नहीं। KMC अधिकारियों के अनुसार, जिन इमारतों में केवल एक अतिरिक्त अवैध मंजिल है, वहाँ पूरी संरचना नहीं गिराई जाएगी — केवल उस अनधिकृत मंजिल की जाँच और कार्रवाई होगी। हालाँकि, रेड ज़ोन में पूरी तरह अवैध ढाँचों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
यह अभियान अभी क्यों शुरू हुआ?
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार के आदेश पर KMC प्रशासक यह अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, शहरी शासन को दुरुस्त करना नई सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले