कोलकाता के तिलजला में बुलडोजर कार्रवाई पर विपक्ष का हमला, कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के तिलजला इलाके में 15 मई 2026 को कोलकाता पुलिस द्वारा अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाई गई बुलडोजर कार्रवाई ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को बिना नोटिस, सुनवाई या अदालती आदेश के अंजाम दिया गया बताते हुए इसे संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन करार दिया है।
विपक्षी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — के नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने कहा, 'यह पूरी कार्रवाई बिना किसी कानूनी अधिकार के की गई थी। अधिकारियों ने अपने वैधानिक दायित्वों के बजाय मुख्यमंत्री के आदेशों पर काम किया। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।'
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने तिलजला का दौरा करने के बाद कहा, 'अगर कोई निर्माण अवैध है तो उसके लिए स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया मौजूद है। बुलडोजर कार्रवाई से पहले नोटिस, सुनवाई और अदालती आदेश का पालन जरूरी है।' अधिवक्ता शमीम अहमद ने भी कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया के पूरी इमारतें गिराना 'लोकतंत्र और कानून व्यवस्था दोनों के लिए खतरा' है।
तृणमूल कांग्रेस का पलटवार
सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि अवैध अतिक्रमणों के विरुद्ध की गई यह कार्रवाई न्यायसंगत और आवश्यक थी। हालाँकि, पार्टी ने कार्रवाई से पहले की गई कानूनी प्रक्रिया का कोई विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है।
स्थानीय जनता में मिली-जुली राय
तिलजला के निवासियों की प्रतिक्रियाएँ एकसमान नहीं हैं। एक वर्ग अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई को सही मानता है, जबकि दूसरे वर्ग की माँग है कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए और किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि बुलडोजर कार्रवाई के मामले देश के कई राज्यों में न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ चुके हैं, और सर्वोच्च न्यायालय पहले भी ऐसी कार्रवाइयों पर दिशानिर्देश जारी कर चुका है।
भाजपा का राजनीतिक रुख
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद खगेन मुर्मु ने इस विवाद के बीच 'इंडिया' गठबंधन के भविष्य पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से देश को मजबूत बना रहे हैं और केंद्र सरकार हर वर्ग को सहयोग दे रही है।' हालाँकि, मुर्मु की यह टिप्पणी सीधे तिलजला कार्रवाई से इतर एक व्यापक राजनीतिक बयान थी।
आगे क्या होगा
विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया है कि वे इस मामले को न्यायालय में ले जाएंगे। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश भर में बुलडोजर कार्रवाइयों की संवैधानिकता पर बहस तेज है। न्यायिक हस्तक्षेप की स्थिति में तिलजला कार्रवाई की वैधता की जाँच अदालत में हो सकती है।