3 अगस्त 2026
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कोलकाता के सेंट्रल लॉक अप में लगेंगे 59 सीसीटीवी कैमरे, ₹35 लाख की निगरानी परियोजना को मंजूरी

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कोलकाता के सेंट्रल लॉक अप में लगेंगे 59 सीसीटीवी कैमरे, ₹35 लाख की निगरानी परियोजना को मंजूरी

सारांश

कोलकाता पुलिस ने लाल बाजार के सेंट्रल लॉक अप में ₹35 लाख की लागत से 59 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बनाई है। रात के अंधेरे में भी रिकॉर्डिंग में सक्षम ये कैमरे कैदियों की निगरानी को तकनीक-आधारित बनाएंगे।

मुख्य बातें

कोलकाता पुलिस लाल बाजार के सेंट्रल लॉक अप में 59 सीसीटीवी कैमरे लगाएगी।
कुल लागत ₹35 लाख तक अनुमानित; कैमरों की खरीद-स्थापना पर ₹8 लाख निर्धारित।
इनमें 54 डोम कैमरे (50 मीटर रेंज) और 5 बुलेट कैमरे (60 मीटर रेंज) शामिल हैं।
कैमरे रात के अंधेरे में ब्लैक एंड व्हाइट फुटेज और आसपास की आवाजें भी रिकॉर्ड करेंगे।
लक्ष्य: कैदियों की झड़प, भागने की कोशिश और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश।

कोलकाता पुलिस ने 3 अगस्त 2026 को घोषणा की कि लाल बाजार स्थित सेंट्रल लॉक अप में 59 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिन पर कुल ₹35 लाख तक का खर्च आने का अनुमान है। यह कदम कैदियों पर सघन निगरानी सुनिश्चित करने और लॉक अप की समग्र सुरक्षा-व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को इस योजना की विस्तृत जानकारी साझा की।

कैमरों की संरचना और तकनीकी क्षमता

अधिकारियों के अनुसार, इस निगरानी तंत्र में 54 डोम कैमरे और 5 बुलेट कैमरे शामिल होंगे, जिन्हें रणनीतिक रूप से लॉक अप के विभिन्न हिस्सों में स्थापित किया जाएगा। डोम कैमरे 50 मीटर तक की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने में सक्षम होंगे, जबकि बुलेट कैमरे 60 मीटर तक की दूरी तक के दृश्यों को कैद कर सकेंगे।

इन कैमरों की एक विशेष खूबी यह है कि ये न केवल वीडियो, बल्कि आसपास की बातचीत और परिवेश की आवाजें भी रिकॉर्ड कर सकेंगे। इसके अलावा, गहरे अंधेरे में भी ये कैमरे ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें लेने में सक्षम होंगे, जिससे रात की निगरानी में आने वाली चुनौतियाँ काफी हद तक कम हो जाएंगी।

बजट का विभाजन

पुलिस ने कैमरों की खरीद और स्थापना के लिए ₹8 लाख की राशि निर्धारित की है। शेष धनराशि निगरानी तंत्र को मज़बूत करने और लॉक अप के बुनियादी ढाँचे को उन्नत करने में लगाई जाएगी। अधिकारियों ने पहले ही लॉक अप का निरीक्षण कर उन स्थानों को चिन्हित कर लिया है जहाँ कैमरे तत्काल लगाने की आवश्यकता है।

सेंट्रल लॉक अप की भूमिका और मौजूदा स्थिति

लाल बाजार का सेंट्रल लॉक अप कोलकाता पुलिस की विभिन्न इकाइयों द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों को अस्थायी रूप से रखने का केंद्रीय स्थान है। इसमें खुफिया विभाग और प्रवर्तन विभाग द्वारा नजरबंद किए गए अभियुक्त भी शामिल होते हैं। वर्तमान में यह सुविधा पुलिस की निगरानी में है, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक रात के समय दृश्यता कम होने पर कैदियों पर पर्याप्त नज़र रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

गौरतलब है कि कॉरिडोर के साथ-साथ उन कमरों में भी कैमरे लगाए जाएंगे जहाँ कैदियों को रखा जाता है, जिससे पूरे परिसर की व्यापक निगरानी संभव हो सकेगी।

निगरानी से क्या बदलेगा

अधिकारियों के अनुसार, यह उन्नत सर्विलांस सिस्टम कैदियों के बीच होने वाली झड़पों, भागने की कोशिशों और अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने में सहायक होगा। विशेष रूप से रात के समय होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी अब कहीं अधिक सटीक और विश्वसनीय हो सकेगी।

आगे की राह

यह परियोजना कोलकाता पुलिस के व्यापक सुरक्षा-आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। कैमरों की स्थापना के बाद लॉक अप की निगरानी पूरी तरह तकनीक-आधारित हो जाएगी, जिससे मानवीय चूक की संभावना भी घटेगी। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों में सुधार होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस फुटेज की निगरानी कौन करेगा और शिकायत की स्थिति में यह डेटा किसके लिए सुलभ होगा। भारत में हिरासत में होने वाली हिंसा और मौतों के मामलों में अक्सर सीसीटीवी फुटेज 'उपलब्ध न होने' की बात सामने आती है। ₹35 लाख का यह निवेश तभी सार्थक होगा जब फुटेज की स्वतंत्र समीक्षा का तंत्र भी स्थापित हो — अन्यथा यह महज तकनीकी दिखावा बनकर रह सकता है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता के सेंट्रल लॉक अप में कितने सीसीटीवी कैमरे लगेंगे?
कोलकाता के लाल बाजार स्थित सेंट्रल लॉक अप में कुल 59 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनमें 54 डोम कैमरे और 5 बुलेट कैमरे शामिल हैं। इस पूरी परियोजना पर ₹35 लाख तक का खर्च आने का अनुमान है।
इन सीसीटीवी कैमरों की खास विशेषताएँ क्या हैं?
डोम कैमरे 50 मीटर और बुलेट कैमरे 60 मीटर तक की रेंज में रिकॉर्डिंग कर सकते हैं। ये कैमरे रात के गहरे अंधेरे में ब्लैक एंड व्हाइट फुटेज लेने के साथ-साथ बातचीत और परिवेश की आवाजें भी रिकॉर्ड करने में सक्षम हैं।
सेंट्रल लॉक अप में कैमरे क्यों लगाए जा रहे हैं?
अधिकारियों के अनुसार, रात के समय दृश्यता कम होने पर कैदियों पर नज़र रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस सर्विलांस सिस्टम से कैदियों के बीच झड़प, भागने की कोशिश और अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा।
कैमरों की स्थापना पर कितना बजट तय किया गया है?
कैमरों की खरीद और स्थापना के लिए ₹8 लाख निर्धारित किए गए हैं। शेष राशि निगरानी तंत्र को मज़बूत करने और लॉक अप के बुनियादी ढाँचे को उन्नत करने में लगाई जाएगी, जिससे कुल खर्च ₹35 लाख तक पहुँचने का अनुमान है।
सेंट्रल लॉक अप में किन्हें रखा जाता है?
लाल बाजार का सेंट्रल लॉक अप कोलकाता पुलिस की विभिन्न इकाइयों द्वारा गिरफ्तार आरोपियों को अस्थायी रूप से रखने का केंद्रीय स्थान है। इसमें खुफिया विभाग और प्रवर्तन विभाग द्वारा नजरबंद किए गए अभियुक्त भी शामिल होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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