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कोलकाता पुलिस क्रि-मैक नेटवर्क से जुड़ी, अंतर-राज्यीय अपराधियों की पकड़ होगी आसान

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कोलकाता पुलिस क्रि-मैक नेटवर्क से जुड़ी, अंतर-राज्यीय अपराधियों की पकड़ होगी आसान

सारांश

कोलकाता पुलिस ने केंद्र के क्रि-मैक नेटवर्क से जुड़कर एक बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। अब राज्य की सीमाएँ अपराधियों के लिए ढाल नहीं बनेंगी — 24×7 रियल-टाइम डेटा साझाकरण से अंतर-राज्यीय भगोड़ों की पकड़ आसान होगी।

मुख्य बातें

कोलकाता पुलिस 21 जुलाई 2026 को क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर (क्रि-मैक) नेटवर्क से जुड़ी।
क्रि-मैक को गृह मंत्रालय ने 2020 में लॉन्च किया; इसका प्रबंधन NCRB करता है।
लालबाजार ने डिप्टी कमिश्नरों और थाना अधिकारियों को ICJS क्रेडेंशियल से दिन में कम से कम एक बार पोर्टल एक्सेस करने का निर्देश दिया।
यह प्रणाली 24×7 रियल-टाइम सूचना साझाकरण और राष्ट्रीय स्तर के अलर्ट की सुविधा देती है।
अंतर-राज्यीय अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में तेज़ी आने की उम्मीद।

कोलकाता पुलिस ने 21 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार के क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर (क्रि-मैक) नेटवर्क से औपचारिक रूप से जुड़ने की प्रक्रिया पूरी कर ली, जिससे अब अंतर-राज्यीय अपराधियों को ट्रैक करना और उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करना कहीं अधिक सरल हो जाएगा। लालबाजार स्थित पुलिस मुख्यालय ने सभी डिप्टी कमिश्नरों और थाना अधिकारियों को इस नेटवर्क पर सक्रिय रहने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

क्रि-मैक क्या है और यह कैसे काम करता है

गृह मंत्रालय ने 2020 में क्रि-मैक को एक सुरक्षित, वेब-आधारित डिजिटल मंच के रूप में लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य देशभर की कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच अपराध और अपराधियों से जुड़े डेटा का त्वरित आदान-प्रदान करना है। इस प्लेटफॉर्म का प्रबंधन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) करता है और यह 24×7 रियल-टाइम सूचना साझाकरण के लिए एक केंद्रीय हब की भूमिका निभाता है।

इस प्रणाली के तहत पुलिस और खुफिया एजेंसियाँ एक ही मंच पर अपराधों व संदिग्धों की जानकारी साझा कर सकती हैं। अधिकारियों के अनुसार, राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच संवाद की कमी एक पुरानी चुनौती रही है, जिसे क्रि-मैक के नियमित उपयोग से दूर करने की कोशिश की जा रही है।

लालबाजार के निर्देश और पोर्टल का उपयोग

लालबाजार ने अधिकारियों को इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) क्रेडेंशियल्स के ज़रिए लॉग इन करने और दिन में कम से कम एक बार — अथवा आवश्यकतानुसार उससे अधिक बार — क्रि-मैक पोर्टल को एक्सेस करने का निर्देश दिया है। यह पोर्टल अधिकारियों को एक साथ कई लोगों को संदेश भेजने और 'सर्च ऑप्शन' के माध्यम से किसी भी संदिग्ध या मामले की जानकारी खोजने की सुविधा देता है।

हर थाने के अधिकारी को इस पोर्टल पर सक्रिय रहने का आदेश दिया गया है, ताकि ज़रूरत पड़ने पर देश के किसी भी थाने से त्वरित संपर्क स्थापित किया जा सके।

अंतर-राज्यीय अपराधियों पर नकेल

यह प्रणाली उन अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में विशेष रूप से कारगर साबित होगी जो अपराध करने के बाद कोलकाता या पश्चिम बंगाल से बाहर भाग जाते हैं। यदि किसी दूसरे राज्य की पुलिस ऐसे अपराधियों से कोई साक्ष्य बरामद करती है, तो वह जानकारी तत्काल साझा की जा सकेगी। इसके अलावा, क्रि-मैक के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर के अलर्ट भी प्राप्त किए जा सकेंगे, जो बड़े और जटिल मामलों की जाँच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

आम जनता और जाँच पर असर

गौरतलब है कि अंतर-राज्यीय अपराध के मामलों में अक्सर जाँच लंबी खिंचती है क्योंकि विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच सूचना का प्रवाह धीमा होता है। क्रि-मैक से यह बाधा दूर होने की उम्मीद है, जिससे आम नागरिकों को तेज़ और अधिक प्रभावी न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल पुलिसिंग और इंटेलिजेंस नेटवर्किंग को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की है — निर्देश जारी करना और उनका पालन सुनिश्चित करना दो अलग बातें हैं। राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच डेटा-साझाकरण की खाई पुरानी है और महज़ पोर्टल-लॉगिन से नहीं पटेगी; इसके लिए नियमित प्रशिक्षण और जवाबदेही तंत्र ज़रूरी है। यह भी देखना होगा कि क्या कोलकाता पुलिस इस नेटवर्क का उपयोग केवल सूचना लेने तक सीमित रखती है या सक्रिय रूप से डेटा अपलोड करके राष्ट्रीय डेटाबेस को समृद्ध भी करती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्रि-मैक (क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर) क्या है?
क्रि-मैक गृह मंत्रालय द्वारा 2020 में शुरू किया गया एक सुरक्षित, वेब-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे NCRB संचालित करता है। यह देशभर की कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच 24×7 रियल-टाइम अपराध डेटा साझाकरण की सुविधा देता है।
कोलकाता पुलिस के क्रि-मैक से जुड़ने से क्या फायदा होगा?
इससे कोलकाता पुलिस उन अपराधियों को भी ट्रैक कर सकेगी जो अपराध के बाद राज्य से बाहर भाग जाते हैं। दूसरे राज्यों की पुलिस द्वारा बरामद साक्ष्य और जानकारी तत्काल साझा की जा सकेगी, जिससे जाँच तेज़ होगी।
लालबाजार ने अधिकारियों को क्या निर्देश दिए हैं?
लालबाजार ने डिप्टी कमिश्नरों और थाना अधिकारियों को ICJS क्रेडेंशियल्स से लॉग इन करके दिन में कम से कम एक बार क्रि-मैक पोर्टल एक्सेस करने का निर्देश दिया है। ज़रूरत पड़ने पर इससे अधिक बार उपयोग करने को भी कहा गया है।
क्रि-मैक पोर्टल पर अधिकारी क्या कर सकते हैं?
पोर्टल के ज़रिए अधिकारी कई लोगों को एक साथ संदेश भेज सकते हैं, 'सर्च ऑप्शन' से संदिग्धों या मामलों की जानकारी खोज सकते हैं और राष्ट्रीय स्तर के अलर्ट प्राप्त कर सकते हैं।
क्या पश्चिम बंगाल की पुलिस पहले इस नेटवर्क से नहीं जुड़ी थी?
रिपोर्टों के अनुसार, राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच संवाद की कमी एक पुरानी चुनौती रही है। कोलकाता पुलिस का यह कदम उसी खाई को पाटने की दिशा में उठाया गया है, जिसमें नियमित उपयोग को अनिवार्य किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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