कोलकाता पुलिस बनाएगी 'ट्रायल मॉनिटरिंग ऐप', 360 पुराने आपराधिक मामलों की होगी डिजिटल निगरानी
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस ने वर्षों से लंबित आपराधिक मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए एक विशेष 'ट्रायल मॉनिटरिंग ऐप' विकसित करने की योजना बनाई है, जिसके ज़रिए शुरुआती चरण में 360 पुराने विचाराधीन मामलों की डिजिटल निगरानी की जाएगी। 28 जुलाई को पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह पहल न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
ट्रायल मॉनिटरिंग सेल का गठन
इस डिजिटल पहल की नींव के रूप में कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार के इंटेलिजेंस विभाग में 'ट्रायल मॉनिटरिंग सेल' का गठन पहले ही किया जा चुका है। यह सेल फिलहाल धीमी गति से चल रहे मामलों की समीक्षा कर रहा है और जांच अधिकारियों तथा सरकारी वकीलों के साथ बैठकें कर देरी के कारणों की पहचान कर रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, इस सेल ने उन मामलों को चिह्नित किया है जिनमें सुनवाई असामान्य रूप से धीमी रही है। इनमें कुछ ऐसे मामले भी शामिल हैं जो पहले पश्चिम बंगाल पुलिस के अधीन थे, लेकिन अदालत के निर्देश पर उनकी जिम्मेदारी कोलकाता पुलिस को सौंपी गई।
मुख्य घटनाक्रम और चयनित मामले
चयनित 360 मामलों में कुछ अत्यंत संवेदनशील और चर्चित केस भी शामिल हैं। इनमें वर्ष 2010 का पार्क स्ट्रीट आग हादसा और वर्ष 2011 में धाकुरिया के एक निजी अस्पताल में आग लगने से 89 मरीजों की मौत का मामला प्रमुख रूप से शामिल है। शहर के विभिन्न थानों से जुड़े अन्य गंभीर मामले भी इस सूची में हैं।
गौरतलब है कि इनमें से कई मामले एक दशक से अधिक समय से अदालतों में विचाराधीन हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति को रेखांकित करते हैं।
देरी के प्रमुख कारण
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुकदमों में देरी के पीछे कई कारण सामने आए हैं। इनमें जांच अधिकारियों का सेवानिवृत्त होना या तबादला होना, गवाहों का समय पर अदालत में उपस्थित न होना और आरोपियों की अनुपस्थिति प्रमुख हैं।
इसके अलावा कई मामलों में मुकदमे की शुरुआत से पहले आरोप तय करने की प्रक्रिया भी लंबित है, क्योंकि सभी आरोपी एक साथ अदालत में उपस्थित नहीं हो पाते। इन बाधाओं के चलते कई पुराने मामले वर्षों तक खिंचते रहे हैं।
ऐप में क्या होगा उपलब्ध
लालबाजार सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित ऐप में प्रत्येक लंबित मामले की विस्तृत जानकारी दर्ज होगी। पुलिस अधिकारियों, जांच अधिकारियों, ट्रायल मॉनिटरिंग सेल के सदस्यों, सरकारी वकीलों और संबंधित अधिकारियों को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
ऐप पर किसी भी केस की स्थिति तत्काल देखी जा सकेगी — जिसमें यह जानकारी होगी कि कितने गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, कितने शेष हैं, कितने आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और कितने जमानत पर हैं। अब तक हुई सुनवाई और अगली तारीख का विवरण भी ऐप पर उपलब्ध रहेगा।
आगे क्या होगा
पुलिस का कहना है कि इस डिजिटल पहल का उद्देश्य केवल मामलों की निगरानी नहीं, बल्कि न्याय प्रक्रिया को गति देना और अपराधियों को जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाना है। ऐप के लागू होने के बाद पुराने मामलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब देशभर में न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है।