कोलकाता में 200 साल पुरानी इमारत ढही: एक महिला की मौत, 19 लोग मलबे में फंसे
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोलकाता के ब्रजादुलाल स्ट्रीट पर स्थित एक 200 साल पुरानी तीन मंजिला इमारत का हिस्सा 18 अगस्त 2026 की तड़के ढह गया, जिसमें उर्मिला शॉ की मौत हो गई और 19 अन्य लोग मलबे में दब गए। रातभर हुई भारी बारिश को इस हादसे की तात्कालिक वजह बताया जा रहा है। पश्चिम बंगाल अग्निशमन विभाग, राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और एनडीआरएफ की टीमें तत्काल मौके पर पहुँच गईं।
हादसे का घटनाक्रम
स्थानीय निवासियों के अनुसार, उर्मिला शॉ सुबह घर से बाहर निकलने ही वाली थीं कि अचानक इमारत का हिस्सा धड़ाम से गिर गया और वह मलबे में दब गईं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि तेज आवाज सुनकर इलाके के लोग दौड़कर मौके पर पहुँचे तो देखा कि रातभर की बारिश के बाद घर गिर चुका था। मलबे के नीचे उर्मिला शॉ का शव दिखा, जिसे बाद में निकाला गया।
बताया जा रहा है कि उर्मिला शॉ के पति और बेटा भी उन 19 लोगों में शामिल हैं जो मलबे में फंसे हुए हैं। यह इमारत शिमला-बेडन स्ट्रीट इलाके में गिरिश पार्क और चित्तरंजन एवेन्यू के पास एक व्यस्त क्षेत्र में स्थित है।
बचाव कार्य में चुनौतियाँ
इमारत के सामने की गली बेहद तंग होने के कारण बचाव दल को राहत कार्य में भारी दिक्कत हो रही है। इमारत में आने-जाने का केवल एक ही रास्ता था, जिससे मलबा हटाने का काम धीमा पड़ रहा है। एनडीआरएफ और अग्निशमन दल की टीमें लगातार मलबा हटाने और फंसे लोगों को बाहर निकालने में जुटी हैं।
केएमसी की प्रतिक्रिया
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) कमिश्नर स्मिता पांडे ने कहा, 'सुबह करीब 6 बजे इमारत का एक हिस्सा गिर गया — पूरी इमारत नहीं गिरी। इस घटना में एक महिला की मौत हो गई। मलबे में फंसे सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और काफी हद तक मलबा हटा दिया गया है। बाकी मलबा हटाने का काम जारी है।'
गौरतलब है कि केएमसी इस इमारत को पहले ही 'जर्जर और खाली करने योग्य' घोषित कर चुका था। अधिकारियों ने इसे खाली करने या पूरी मरम्मत कराने की सलाह कई बार दी थी। कुछ पुराने निवासियों ने निगम की चेतावनी मानकर घर छोड़ दिया था, लेकिन 20 लोग इसी इमारत में रहते रहे।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
यह हादसा ऐसे समय में आया है जब कोलकाता में मानसून की बारिश चरम पर है और शहर की पुरानी जर्जर इमारतें एक बड़ा सुरक्षा संकट बनी हुई हैं। उत्तर कोलकाता में ऐसी सैकड़ों इमारतें हैं जिन्हें केएमसी 'हेरिटेज' या 'जर्जर' श्रेणी में रख चुका है, फिर भी निवासी वहाँ रह रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि निगम की चेतावनी और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई इस तरह के हादसों की असली वजह है। रेस्क्यू टीमें अभी भी मौके पर सक्रिय हैं और स्थिति पर नज़र रखी जा रही है।