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कोलकाता बंदरगाह पर 60 मीटर ऊंचे पोल पर तिरंगा, 'हर घर तिरंगा' पहल के तहत नया लैंडमार्क

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कोलकाता बंदरगाह पर 60 मीटर ऊंचे पोल पर तिरंगा, 'हर घर तिरंगा' पहल के तहत नया लैंडमार्क

सारांश

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कोलकाता के ऐतिहासिक नेताजी सुभाष डॉक पर 60 मीटर ऊंचे पोल पर 30×20 फीट का तिरंगा फहराया गया। 1870 से परिचालित देश के सबसे पुराने नदी बंदरगाह ने 'हर घर तिरंगा' पहल के तहत यह नया स्थायी लैंडमार्क स्थापित किया।

मुख्य बातें

श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट अथॉरिटी (SMPA) ने नेताजी सुभाष डॉक पर 60 मीटर (लगभग 197 फीट ) ऊंचे पोल पर तिरंगा फहराया।
ध्वज का आकार 30 फीट × 20 फीट है और यह 'हर घर तिरंगा' पहल का हिस्सा है।
पोल 25 वर्षीय स्थायी संरचना है, जिसमें मोटराइज्ड डबल-ड्रम विंच सिस्टम से झंडा संचालित होता है।
कोलकाता पोर्ट देश का सबसे पुराना चालू नदी बंदरगाह है, जिसने 1870 में परिचालन शुरू किया।
नेताजी सुभाष डॉक को 1928 में किंग जॉर्ज डॉक के रूप में खोला गया था और 1973 में नाम बदला गया।
द्वितीय विश्व युद्ध में इस डॉक ने 'ओवर द हम्प' अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट अथॉरिटी (SMPA) ने 15 अगस्त 2026 की पूर्व संध्या पर कोलकाता के नेताजी सुभाष डॉक पर 60 मीटर (लगभग 197 फीट) ऊंचे पोल पर भारतीय तिरंगा फहराया। केंद्र सरकार की 'हर घर तिरंगा' पहल के अंतर्गत स्थापित यह ध्वज शहर के सबसे ऊंचे राष्ट्रीय ध्वजों में से एक है और ऐतिहासिक बंदरगाह परिसर में एक नए स्थायी लैंडमार्क के रूप में उभरा है।

ध्वज की विशेषताएँ

SMPA के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस पोल पर 30 फीट × 20 फीट का विशाल राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया है। पोल एक स्थायी संरचना है, जिसकी अनुमानित आयु 25 वर्ष है। यह हॉट-डिप गैल्वेनाइज्ड, 20-तरफा पॉलीगोनल हाई-टेन्साइल स्टील शाफ्ट से निर्मित है, जो लगातार पतला होता जाता है और आरसीसी बोर्ड कास्ट-इन-सीटू पाइल फाउंडेशन पर टिका है। झंडे को संचालित करने के लिए मोटराइज्ड डबल-ड्रम विंच सिस्टम का उपयोग किया जाता है।

ऐतिहासिक परिसर में नया अध्याय

यह तिरंगा 1899 में स्थापित ऐतिहासिक क्लॉक टावर के बगल में फहराया गया है, जिसे मूल रूप से आने वाले जहाजों को समय जानने में सहायता के लिए बनाया गया था। नेताजी सुभाष डॉक को 1928 में किंग जॉर्ज डॉक के नाम से शुरू किया गया था और 1973 में इसका नाम बदला गया। कोलकाता पोर्ट देश का सबसे पुराना चालू नदी-आधारित प्रमुख बंदरगाह है, जिसने आधिकारिक तौर पर 1870 में परिचालन शुरू किया था।

द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ी विरासत

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नेताजी सुभाष डॉक ने रणनीतिक भूमिका निभाई थी। चीन-बर्मा-भारत क्षेत्र में 'ओवर द हम्प' अभियान के लिए सैनिक और सैन्य सामग्री यहीं उतारे जाते थे। आज इस डॉक में 10 बर्थ हैं, जिनमें एक हेवी-लिफ्ट बर्थ भी शामिल है।

राष्ट्रीय गौरव और 'विकसित भारत' का संकल्प

अधिकारियों ने बताया कि ऐतिहासिक डॉक के ऊपर लहराता यह तिरंगा भारत की समुद्री विरासत और राष्ट्र-निर्माण में कोलकाता पोर्ट के दीर्घकालिक योगदान का प्रतीक है। SMPA के अनुसार, यह पहल राष्ट्रीय गौरव, एकता और 'विकसित भारत' के प्रति सामूहिक संकल्प की भावना को रेखांकित करती है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि देश की सबसे पुरानी बंदरगाह संस्थाएँ भी समकालीन राष्ट्रीय अभियानों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी विचारणीय है कि बंदरगाह की परिचालन क्षमता और आधुनिकीकरण के मोर्चे पर इतनी ही ऊर्जा और निवेश की दरकार है, जितनी इस प्रतीकात्मक स्थापना में लगाई गई।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता बंदरगाह पर फहराए गए तिरंगे की ऊंचाई कितनी है?
नेताजी सुभाष डॉक पर स्थापित पोल की ऊंचाई 60 मीटर (लगभग 197 फीट) है और इस पर 30 फीट × 20 फीट का राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया है। यह कोलकाता के सबसे ऊंचे राष्ट्रीय ध्वजों में से एक है।
'हर घर तिरंगा' पहल क्या है और SMPA इससे कैसे जुड़ी?
'हर घर तिरंगा' केंद्र सरकार की वह पहल है जो स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज के प्रति नागरिकों और संस्थाओं में गर्व जागृत करने के लिए शुरू की गई थी। श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट अथॉरिटी ने इस पहल के तहत नेताजी सुभाष डॉक पर स्थायी ध्वज पोल स्थापित कर इसमें भागीदारी की।
नेताजी सुभाष डॉक का इतिहास क्या है?
नेताजी सुभाष डॉक को 1928 में किंग जॉर्ज डॉक के नाम से खोला गया था और 1973 में इसका नाम बदला गया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसने चीन-बर्मा-भारत क्षेत्र में 'ओवर द हम्प' अभियान के लिए सैनिकों और सामग्री की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कोलकाता पोर्ट कितना पुराना है?
कोलकाता पोर्ट ने आधिकारिक तौर पर 1870 में परिचालन शुरू किया था और यह देश का सबसे पुराना चालू नदी-आधारित प्रमुख बंदरगाह है। इसके परिसर में 1899 में स्थापित ऐतिहासिक क्लॉक टावर भी है।
ध्वज पोल की तकनीकी संरचना कैसी है?
यह पोल हॉट-डिप गैल्वेनाइज्ड, 20-तरफा पॉलीगोनल हाई-टेन्साइल स्टील शाफ्ट से बना है, जो आरसीसी बोर्ड कास्ट-इन-सीटू पाइल फाउंडेशन पर टिका है। इसकी अनुमानित आयु 25 वर्ष है और झंडे को मोटराइज्ड डबल-ड्रम विंच सिस्टम से संचालित किया जाता है।
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