कोलकाता बंदरगाह पर 60 मीटर ऊंचे पोल पर तिरंगा, 'हर घर तिरंगा' पहल के तहत नया लैंडमार्क
सारांश
मुख्य बातें
श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट अथॉरिटी (SMPA) ने 15 अगस्त 2026 की पूर्व संध्या पर कोलकाता के नेताजी सुभाष डॉक पर 60 मीटर (लगभग 197 फीट) ऊंचे पोल पर भारतीय तिरंगा फहराया। केंद्र सरकार की 'हर घर तिरंगा' पहल के अंतर्गत स्थापित यह ध्वज शहर के सबसे ऊंचे राष्ट्रीय ध्वजों में से एक है और ऐतिहासिक बंदरगाह परिसर में एक नए स्थायी लैंडमार्क के रूप में उभरा है।
ध्वज की विशेषताएँ
SMPA के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस पोल पर 30 फीट × 20 फीट का विशाल राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया है। पोल एक स्थायी संरचना है, जिसकी अनुमानित आयु 25 वर्ष है। यह हॉट-डिप गैल्वेनाइज्ड, 20-तरफा पॉलीगोनल हाई-टेन्साइल स्टील शाफ्ट से निर्मित है, जो लगातार पतला होता जाता है और आरसीसी बोर्ड कास्ट-इन-सीटू पाइल फाउंडेशन पर टिका है। झंडे को संचालित करने के लिए मोटराइज्ड डबल-ड्रम विंच सिस्टम का उपयोग किया जाता है।
ऐतिहासिक परिसर में नया अध्याय
यह तिरंगा 1899 में स्थापित ऐतिहासिक क्लॉक टावर के बगल में फहराया गया है, जिसे मूल रूप से आने वाले जहाजों को समय जानने में सहायता के लिए बनाया गया था। नेताजी सुभाष डॉक को 1928 में किंग जॉर्ज डॉक के नाम से शुरू किया गया था और 1973 में इसका नाम बदला गया। कोलकाता पोर्ट देश का सबसे पुराना चालू नदी-आधारित प्रमुख बंदरगाह है, जिसने आधिकारिक तौर पर 1870 में परिचालन शुरू किया था।
द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ी विरासत
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नेताजी सुभाष डॉक ने रणनीतिक भूमिका निभाई थी। चीन-बर्मा-भारत क्षेत्र में 'ओवर द हम्प' अभियान के लिए सैनिक और सैन्य सामग्री यहीं उतारे जाते थे। आज इस डॉक में 10 बर्थ हैं, जिनमें एक हेवी-लिफ्ट बर्थ भी शामिल है।
राष्ट्रीय गौरव और 'विकसित भारत' का संकल्प
अधिकारियों ने बताया कि ऐतिहासिक डॉक के ऊपर लहराता यह तिरंगा भारत की समुद्री विरासत और राष्ट्र-निर्माण में कोलकाता पोर्ट के दीर्घकालिक योगदान का प्रतीक है। SMPA के अनुसार, यह पहल राष्ट्रीय गौरव, एकता और 'विकसित भारत' के प्रति सामूहिक संकल्प की भावना को रेखांकित करती है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि देश की सबसे पुरानी बंदरगाह संस्थाएँ भी समकालीन राष्ट्रीय अभियानों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।