उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप का दौरा किया, 'हर घर तिरंगा' का उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 9 अगस्त 2026 को अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप का दौरा किया और श्री विजयपुरम के ध्वज बिंदु पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर 'हर घर तिरंगा अभियान' का औपचारिक उद्घाटन किया। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति में मनाए जाने वाले इस दिन पर उपराष्ट्रपति की यह यात्रा राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को पुनर्जीवित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा रही।
ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण
राधाकृष्णन ने द्वीप पर उस ऐतिहासिक इमारत का दौरा किया जहाँ नेताजी सुभाष चंद्र बोस दिसंबर 1943 में अपनी ऐतिहासिक अंडमान यात्रा के दौरान ठहरे थे। इसके अलावा उन्होंने चर्च, सैनिकों की बैरक, गन पॉइंट क्षेत्र और स्मृतिका संग्रहालय का भी भ्रमण किया। संग्रहालय में उन्हें द्वीप के समृद्ध इतिहास और भविष्य की विकास योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
राजकीय समारोह में संबोधन
डीबीआरएटी सभागार में आयोजित 'वंदे मातरम' राजकीय समारोह और तिरंगा संगीत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस अभियान के उद्घाटन के लिए इन ऐतिहासिक द्वीपों से अधिक उपयुक्त स्थान और कोई नहीं हो सकता, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम और तिरंगे के इतिहास से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने महान तमिल कवि सुब्रमण्यम भारती के अमर शब्दों को स्मरण करते हुए कहा कि भारती द्वारा मनाया जाने वाला 'मणि कोडी' उत्सव भारतीय भावना के शाश्वत साहस और भारत माता के ध्वज की महिमा को दर्शाता है।
स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि
उपराष्ट्रपति ने काला पानी की यातनाएँ सहने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह केवल एक भौगोलिक हिस्सा नहीं, बल्कि बलिदानों की पवित्र भूमि है। उन्होंने वीर विनायक दामोदर सावरकर और सेलुलर जेल में कष्ट सहने वाले अनगिनत देशभक्तों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनका साहस, देशभक्ति और बलिदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
तिरंगे का ऐतिहासिक संदर्भ
राधाकृष्णन ने 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान का स्मरण कराया, जिसने लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता संग्राम में झोंक दिया था। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 30 दिसंबर 1943 को इन्हीं द्वीपों पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था — जो स्वाधीनता संग्राम का एक अविस्मरणीय ऐतिहासिक क्षण था। गौरतलब है कि 'हर घर तिरंगा अभियान' राष्ट्रीय गौरव को जन-जन तक पहुँचाने की केंद्र सरकार की व्यापक पहल का हिस्सा है।