कोरिया जिले का जल संरक्षण मॉडल: छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय मंच पर बुनियादी बदलाव किया

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कोरिया जिले का जल संरक्षण मॉडल: छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय मंच पर बुनियादी बदलाव किया

सारांश

कोरिया जिले ने जल संरक्षण में एक अनोखा कदम उठाया है, जो अब पूरे देश में चर्चा का विषय है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे सराहा है, जिससे यह मॉडल चर्चा में है। जानिए कैसे यह पहल जल संकट को कम कर रही है।

मुख्य बातें

जिले में जल संरक्षण की अनोखी पहल प्रधानमंत्री मोदी की सराहना स्थानीय किसानों की भागीदारी भूजल स्तर में सुधार महिलाओं और युवाओं की भूमिका

बैकुंठपुर, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी चर्चा अब सम्पूर्ण देश में हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रसिद्ध कार्यक्रम 'मन की बात' में कोरिया जिले के '5 प्रतिशत जल संरक्षण मॉडल' की खुले दिल से प्रशंसा की, जिससे यह जिला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे-छोटे स्थानीय प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से कोरिया जिले के किसानों और ग्रामीणों की सराहना की, जिन्होंने मिलकर जल संकट का समाधान खोजा और उसे सफलतापूर्वक लागू किया।

कोरिया जिले में लागू '5 प्रतिशत मॉडल' के तहत किसानों ने अपनी खेती योग्य जमीन का 5 प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण के लिए समर्पित किया। इस हिस्से में छोटे-छोटे सोखता गड्ढे बनाए गए, जिनमें वर्षा का पानी जमा होकर जमीन के अंदर चला जाता है। इससे न केवल पानी की बर्बादी रुकी, बल्कि भूजल स्तर में भी महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिला।

इस मॉडल की खास बात यह है कि इसे पूरी तरह जनभागीदारी से लागू किया गया। जिले के 1,200 से अधिक किसानों ने इस पहल को अपनाया और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। गांव-गांव में लोगों ने इसे अपने अभियान की तरह लिया।

महिलाओं ने 'नीर नायिका' बनकर और युवाओं ने 'जल दूत' के रूप में इस अभियान को आगे बढ़ाया। ग्राम सभाओं के माध्यम से योजनाओं का विकेंद्रीकरण किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर ही निर्णय लिए गए और उनका क्रियान्वयन भी प्रभावी ढंग से हुआ। इससे समुदाय खुद इस अभियान का नेतृत्वकर्ता बन गया।

इस अभियान के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं। वर्ष 2025 में करीब 2.8 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भूजल में पुनर्भरण हुआ, जो सैकड़ों बड़े तालाबों के बराबर है। छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में भूजल स्तर में 5.41 मीटर की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

स्थानीय किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिला है। किसान विशाल कुमार दास ने राष्ट्र प्रेस से बताया कि इसे बनवाने का फायदा यह है कि खेत में नमी बनी रहती है, जल स्रोत बढ़ते हैं और बारिश का पानी भी जमा रहता है। वहीं, परमेश्वर राजवाड़े ने कहा कि इस मॉडल से उन्हें हर फसल में फायदा हो रहा है और उनकी खेती पहले से ज्यादा बेहतर हो गई है।

इस पूरे अभियान को लेकर जिला पंचायत के सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में 'कैच द रेन', जल संचय और जनभागीदारी जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 'मोर गांव मोर पानी' अभियान संचालित हो रहा है।

उन्होंने बताया कि कोरिया जिले में कलेक्टर के मार्गदर्शन में 'आवा पानी झोंकी' अभियान चलाया गया, जिसके तहत न केवल रिहायशी क्षेत्रों बल्कि किसानों के खेतों में भी सोखता गड्ढों का निर्माण कराया गया। इस पहल से जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और यह कार्य अभी भी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जल संकट आज एक गंभीर मुद्दा है। कोरिया जिले का यह प्रयास न केवल जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाता है, बल्कि यह हमें यह भी सिखाता है कि स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं। यह उदाहरण अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणास्रोत हो सकता है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोरिया जिले का जल संरक्षण मॉडल क्या है?
यह मॉडल किसानों द्वारा अपनी खेती योग्य जमीन का 5 प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण के लिए समर्पित करने पर आधारित है, जिसमें सोखता गड्ढे बनाए गए हैं।
इस मॉडल के क्या लाभ हैं?
इससे पानी की बर्बादी रुकी है और भूजल स्तर में सुधार हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस पहल के बारे में क्या कहा?
उन्होंने इसे छोटे स्थानीय प्रयासों के रूप में सराहा जो बड़े बदलाव ला सकते हैं।
इसमें जनभागीदारी का क्या महत्व है?
यह मॉडल पूरी तरह से जनभागीदारी से लागू किया गया है, जिससे स्थानीय समुदाय ने इसे अपनाया है।
क्या इस मॉडल का कोई दीर्घकालिक प्रभाव है?
हां, इसके सकारात्मक परिणामों ने जल स्तर में ऐतिहासिक वृद्धि की है।
राष्ट्र प्रेस
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