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कोटा नगर निगम में ACB का ट्रैप: संविदा कर्मचारी ₹10,000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार, दूसरा फरार

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कोटा नगर निगम में ACB का ट्रैप: संविदा कर्मचारी ₹10,000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार, दूसरा फरार

सारांश

कोटा एसीबी की ट्रैप कार्रवाई में नगर निगम संविदा कर्मचारी अखिलेश मीणा को PMAY किस्त से ₹10,000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। दूसरा आरोपी नरेश वर्मा फरार है। केंद्रीय आवास योजना में बिचौलियों की रिश्वतखोरी एक बार फिर उजागर हुई।

मुख्य बातें

एसीबी कोटा ने 5 अक्टूबर 2026 को ट्रैप कार्रवाई में कोटा नगर निगम के संविदा कर्मचारी अखिलेश मीणा को ₹10,000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
दूसरा आरोपी संविदा कर्मचारी नरेश वर्मा ट्रैप की भनक लगते ही फरार हो गया; तलाश जारी है।
दोनों पर PMAY की ₹50,000 की पहली किस्त में से रिश्वत माँगने और किस्त रोकने की धमकी देने का आरोप है।
1 अक्टूबर 2026 को सत्यापन में अखिलेश मीणा की ओर से ₹10,000 और नरेश वर्मा की ओर से ₹5,000 की रिश्वत माँग की पुष्टि हुई।
मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज; जाँच एडीजी स्मिता श्रीवास्तव की निगरानी में।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कोटा इकाई ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को ट्रैप कार्रवाई के दौरान कोटा नगर निगम के संविदा कर्मचारी अखिलेश मीणा को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए नगर निगम परिसर के बाहर रंगे हाथों गिरफ्तार किया। एक अन्य संविदा कर्मचारी नरेश वर्मा ट्रैप की भनक लगते ही मौके से फरार हो गया और उसकी तलाश जारी है।

शिकायत और सत्यापन की पृष्ठभूमि

एसीबी के पुलिस महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि शिकायतकर्ता ने एसीबी कोटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत मकान निर्माण के लिए स्वीकृत ₹50,000 की पहली किस्त में से रिश्वत माँगी जा रही थी। कथित तौर पर दोनों आरोपियों ने रिश्वत न देने पर योजना की अगली किस्तों की मंजूरी रोकने की धमकी भी दी थी।

शिकायत मिलने के बाद 1 अक्टूबर 2026 को रिश्वत की माँग का सत्यापन कराया गया। सत्यापन में अखिलेश मीणा की ओर से ₹10,000 और नरेश वर्मा की ओर से ₹5,000 रिश्वत माँगने की कथित पुष्टि हुई।

ट्रैप कार्रवाई का संचालन

सत्यापन के बाद एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई, जिसे कोटा रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक ओमप्रकाश मीणा की निगरानी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार के निर्देशन में अंजाम दिया गया। कार्रवाई का प्रत्यक्ष नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक अनीश अहमद ने किया। इस कार्रवाई के दौरान अखिलेश मीणा को शिकायतकर्ता से नगर निगम परिसर के बाहर ₹10,000 लेते हुए पकड़ा गया।

एक आरोपी फरार, तलाश जारी

ट्रैप के दौरान नरेश वर्मा को कार्रवाई की जानकारी मिल गई और वह मौके से भाग निकला। एसीबी की टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चला रही हैं। गिरफ्तार आरोपी अखिलेश मीणा से पूछताछ और आगे की जाँच एसीबी की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और पुलिस महानिरीक्षक एस. परिमला की निगरानी में की जा रही है।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जाँच

एसीबी ने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज करते हुए आगे की जाँच प्रारंभ कर दी है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राजस्थान में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि PMAY जैसी केंद्रीय योजनाओं में बिचौलियों द्वारा रिश्वतखोरी की यह कोई अकेली घटना नहीं है — एसीबी पहले भी ऐसे कई मामलों में कार्रवाई कर चुकी है।

एसीबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध औपचारिक शिकायत या प्रारंभिक जाँच दर्ज है, तो वह अपना पक्ष रखने के लिए सीधे ब्यूरो से संपर्क कर सकता है। संबंधित व्यक्ति के स्पष्टीकरण की विस्तृत जाँच के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। फरार आरोपी नरेश वर्मा की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में कार्रवाई का अगला चरण स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सबसे कमज़ोर लाभार्थी सबसे पहले शिकार बनते हैं। गौरतलब है कि संविदा कर्मचारी प्रायः अनियमित सेवा शर्तों और कम वेतन के बावजूद सरकारी धन के वितरण में निर्णायक भूमिका में होते हैं — और यही भूमिका उन्हें रिश्वत का अवसर भी देती है। राजस्थान एसीबी की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना होनी चाहिए, लेकिन असली सवाल यह है कि PMAY के डिजिटल भुगतान ढाँचे के बावजूद बिचौलिए किस्त रोकने की धमकी देने में सक्षम कैसे हैं — यह प्रशासनिक खामी का सवाल है, जिसका जवाब महज गिरफ्तारी से नहीं मिलेगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटा नगर निगम में एसीबी ट्रैप क्या है?
5 अक्टूबर 2026 को एसीबी कोटा ने नगर निगम के संविदा कर्मचारी अखिलेश मीणा को PMAY की पहली किस्त से ₹10,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। दूसरा आरोपी नरेश वर्मा ट्रैप की जानकारी मिलने पर मौके से फरार हो गया।
PMAY किस्त में रिश्वत का मामला क्या है?
शिकायतकर्ता का आरोप था कि नगर निगम कर्मचारी अखिलेश मीणा और नरेश वर्मा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत ₹50,000 की पहली किस्त में से रिश्वत माँग रहे थे। रिश्वत न देने पर अगली किस्तों की मंजूरी रोकने की धमकी भी दी गई थी।
एसीबी ट्रैप कार्रवाई की निगरानी किसने की?
ट्रैप कार्रवाई कोटा रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक ओमप्रकाश मीणा की निगरानी और एसीबी कोटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार के निर्देशन में की गई। कार्रवाई का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक अनीश अहमद ने किया।
फरार आरोपी नरेश वर्मा की क्या स्थिति है?
नरेश वर्मा ट्रैप कार्रवाई की भनक लगते ही मौके से फरार हो गया। एसीबी की टीम उसकी तलाश में विभिन्न स्थानों पर अभियान चला रही है और उसे शीघ्र गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।
इस मामले में किस कानून के तहत कार्रवाई होगी?
एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार आरोपी अखिलेश मीणा से पूछताछ एडीजी स्मिता श्रीवास्तव और आईजी एस. परिमला की निगरानी में जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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