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कोटा में रेलवे अंडरपास निर्माण के दौरान मिट्टी धंसी, दो इंजीनियरों की मौत

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कोटा में रेलवे अंडरपास निर्माण के दौरान मिट्टी धंसी, दो इंजीनियरों की मौत

सारांश

कोटा के दरा क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक के नीचे अंडरपास निर्माण के दौरान मिट्टी धंसने से दो इंजीनियरों की मौत हो गई। मृतक प्रभात सिंह महज़ तीन महीने पहले ही नौकरी में आए थे। परिवार ने लापरवाही का आरोप लगाया, रेलवे ने जाँच के आदेश दिए।

मुख्य बातें

29 मई की रात कोटा के दरा क्षेत्र में रेलवे अंडरपास निर्माण के दौरान मिट्टी धंसने से दो इंजीनियरों की मौत हो गई।
मृतकों में प्रभात सिंह शामिल हैं, जिनकी नौकरी लगे मात्र तीन महीने हुए थे।
अंडरपास का निर्माण पुश ब्लॉक तकनीक से हो रहा था; 13-13 फीट लंबे ब्लॉक ट्रैक के नीचे सरकाए जा रहे थे।
दुर्घटनास्थल पर ट्रेनों की गति 10 किमी प्रति घंटा सीमित की गई, सभी ट्रेनों को अनिवार्य स्टॉपेज के निर्देश।
कोटा रेल मंडल ने जाँच के आदेश दिए; परिवारों को मुआवज़ा और नौकरी देने का आश्वासन।
परिजनों ने रेलवे प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया — कम अनुभवी इंजीनियर को जोखिम भरे कार्य पर तैनात करने पर सवाल।

राजस्थान के कोटा में 29 मई की रात एक दर्दनाक हादसे में दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक के नीचे नेशनल हाईवे-52 पर निर्माणाधीन अंडरपास में मिट्टी धंस जाने से रेलवे के दो इंजीनियरों की मौत हो गई। दरा क्षेत्र में हुई इस दुर्घटना में दोनों इंजीनियर मलबे में दब गए और उन्हें बचाने का मौका तक नहीं मिला।

हादसे का घटनाक्रम

रेलवे सूत्रों के अनुसार, दरा की नाल में पुश ब्लॉक तकनीक से अंडरपास का निर्माण किया जा रहा था। इस विधि में 13-13 फीट लंबे तीन ब्लॉकों को धक्का देकर रेलवे ट्रैक के नीचे स्थापित किया जाता है। गुरुवार रात डाउन लाइन के पास ब्लॉक सरकाने का कार्य चल रहा था, तभी अचानक मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा धंस गया।

मृतक इंजीनियरों में प्रभात सिंह और एक अन्य अधिकारी शामिल हैं। दोनों निर्माण कार्य की निगरानी के लिए अंडरपास के नीचे खड़े थे। स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों ने दोनों को मलबे से बाहर निकाला और कोटा के एक निजी अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया

हादसे के बाद कोटा रेल मंडल में हड़कंप मच गया। रेलवे प्रशासन ने पूरे मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं। सुरक्षा के मद्देनज़र दुर्घटनास्थल से गुज़रने वाली ट्रेनों की गति 10 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। साथ ही सभी ट्रेनों को वहाँ रुककर आगे बढ़ने के निर्देश जारी किए गए हैं।

रेलवे अधिकारियों ने शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों को तत्काल मुआवज़ा और नौकरी देने का आश्वासन दिया है।

परिवार का लापरवाही का आरोप

मृतक इंजीनियर प्रभात सिंह के परिजनों ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिवार के अनुसार, प्रभात सिंह की नौकरी लगे मात्र तीन महीने ही हुए थे। परिजनों ने सवाल उठाया कि इतने कम अनुभव वाले इंजीनियर को इतने जोखिम भरे निर्माण कार्य पर क्यों तैनात किया गया।

आम जनता और यात्रियों पर असर

यह हादसा दिल्ली-मुंबई मुख्य रेलवे लाइन पर हुआ है, जो देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक है। ट्रेनों की गति सीमा घटाने और अनिवार्य स्टॉपेज के कारण इस मार्ग पर यात्रा समय प्रभावित हो सकता है। गौरतलब है कि रेलवे अवसंरचना निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों पर यह सवाल नया नहीं है।

क्या होगा आगे

जाँच के नतीजे आने तक निर्माण कार्य रोके जाने की संभावना है। रेलवे प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि पुश ब्लॉक तकनीक के उपयोग के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं। परिवारों को दिए गए मुआवज़े और नौकरी के आश्वासन की औपचारिक घोषणा भी अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब मृतक इंजीनियर मात्र तीन महीने पहले नियुक्त हुए थे। पुश ब्लॉक जैसी जटिल तकनीक पर काम करने वाले नवनियुक्त कर्मियों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और फील्ड मेंटरशिप की ज़िम्मेदारी किसकी थी, यह जाँच का केंद्रीय प्रश्न होना चाहिए। रेलवे अवसंरचना विस्तार की रफ़्तार और जमीनी सुरक्षा तैयारी के बीच का यह अंतर कोई पहली बार सामने नहीं आया — और मुआवज़े के आश्वासन मात्र से यह खाई नहीं भरेगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटा रेलवे अंडरपास हादसा क्या है?
29 मई की रात कोटा के दरा क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक के नीचे NH-52 पर निर्माणाधीन अंडरपास में मिट्टी धंस जाने से दो रेलवे इंजीनियर मलबे में दब गए और उनकी मौत हो गई। दोनों इंजीनियर निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे थे।
हादसे में किन इंजीनियरों की मौत हुई?
मृतकों में प्रभात सिंह और एक अन्य रेलवे अधिकारी शामिल हैं। प्रभात सिंह की नौकरी लगे मात्र तीन महीने हुए थे।
पुश ब्लॉक तकनीक क्या होती है जिससे यह निर्माण हो रहा था?
पुश ब्लॉक तकनीक में पहले से तैयार कंक्रीट ब्लॉकों को धक्का देकर रेलवे ट्रैक के नीचे सरकाया जाता है। इस मामले में 13-13 फीट लंबे तीन ब्लॉकों को इस विधि से स्थापित किया जा रहा था।
हादसे के बाद रेलवे ने क्या कदम उठाए?
कोटा रेल मंडल ने पूरे मामले की जाँच के आदेश दिए हैं। दुर्घटनास्थल पर ट्रेनों की गति 10 किमी प्रति घंटा सीमित की गई है और सभी ट्रेनों को वहाँ रुककर आगे बढ़ने के निर्देश दिए गए हैं। मृतकों के परिवारों को मुआवज़ा और नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया है।
परिवार ने रेलवे पर क्या आरोप लगाए हैं?
प्रभात सिंह के परिजनों ने रेलवे प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मात्र तीन महीने पहले नियुक्त हुए कम अनुभवी इंजीनियर को इतने जोखिम भरे निर्माण कार्य पर तैनात नहीं किया जाना चाहिए था।
राष्ट्र प्रेस
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