कोटा में रेलवे अंडरपास निर्माण के दौरान मिट्टी धंसी, दो इंजीनियरों की मौत
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के कोटा में 29 मई की रात एक दर्दनाक हादसे में दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक के नीचे नेशनल हाईवे-52 पर निर्माणाधीन अंडरपास में मिट्टी धंस जाने से रेलवे के दो इंजीनियरों की मौत हो गई। दरा क्षेत्र में हुई इस दुर्घटना में दोनों इंजीनियर मलबे में दब गए और उन्हें बचाने का मौका तक नहीं मिला।
हादसे का घटनाक्रम
रेलवे सूत्रों के अनुसार, दरा की नाल में पुश ब्लॉक तकनीक से अंडरपास का निर्माण किया जा रहा था। इस विधि में 13-13 फीट लंबे तीन ब्लॉकों को धक्का देकर रेलवे ट्रैक के नीचे स्थापित किया जाता है। गुरुवार रात डाउन लाइन के पास ब्लॉक सरकाने का कार्य चल रहा था, तभी अचानक मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा धंस गया।
मृतक इंजीनियरों में प्रभात सिंह और एक अन्य अधिकारी शामिल हैं। दोनों निर्माण कार्य की निगरानी के लिए अंडरपास के नीचे खड़े थे। स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों ने दोनों को मलबे से बाहर निकाला और कोटा के एक निजी अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया
हादसे के बाद कोटा रेल मंडल में हड़कंप मच गया। रेलवे प्रशासन ने पूरे मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं। सुरक्षा के मद्देनज़र दुर्घटनास्थल से गुज़रने वाली ट्रेनों की गति 10 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। साथ ही सभी ट्रेनों को वहाँ रुककर आगे बढ़ने के निर्देश जारी किए गए हैं।
रेलवे अधिकारियों ने शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों को तत्काल मुआवज़ा और नौकरी देने का आश्वासन दिया है।
परिवार का लापरवाही का आरोप
मृतक इंजीनियर प्रभात सिंह के परिजनों ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिवार के अनुसार, प्रभात सिंह की नौकरी लगे मात्र तीन महीने ही हुए थे। परिजनों ने सवाल उठाया कि इतने कम अनुभव वाले इंजीनियर को इतने जोखिम भरे निर्माण कार्य पर क्यों तैनात किया गया।
आम जनता और यात्रियों पर असर
यह हादसा दिल्ली-मुंबई मुख्य रेलवे लाइन पर हुआ है, जो देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक है। ट्रेनों की गति सीमा घटाने और अनिवार्य स्टॉपेज के कारण इस मार्ग पर यात्रा समय प्रभावित हो सकता है। गौरतलब है कि रेलवे अवसंरचना निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों पर यह सवाल नया नहीं है।
क्या होगा आगे
जाँच के नतीजे आने तक निर्माण कार्य रोके जाने की संभावना है। रेलवे प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि पुश ब्लॉक तकनीक के उपयोग के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं। परिवारों को दिए गए मुआवज़े और नौकरी के आश्वासन की औपचारिक घोषणा भी अपेक्षित है।